घायल व्यक्तियों को कैसे सुरक्षित स्थान में पहुँचाना होता है ?
घायल व्यक्तियों को पहुँचाना
किसी घायल को सुरक्षित स्थान में निम्नलिखित विधियों से ले जाया जा सकता है:-
(क) एक ही सहायक से सहारा देकर।
(ख) हस्त आसन (Hand Seats) पर।
(ग) बैसाखी पर (Stretcher)।
(घ) पहिए वाली गाड़ी पर (Wheeled Transport) ।
भेजने के ढंग या ढंगों का निर्णय निम्नलिखित बातों पर किया जायेगा:-
(क) चोट की दशा।
(ख) चोट की भीषणता।
(ग) उपलब्ध सहायकों की संख्या।
(घ) जाने वाले मार्ग की दशा।
प्रथमिक सहायता उपचार के उचित उपचार के बाद निम्नलिखित सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए:-
(1) रोगी जिस आसान में हो या जिस स्थिति में रखा जाए उसे अनावश्यक न बदलिए।
(2) रोगी को ले जाते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान अवश्य रखना
चाहिए।
(क) रोगी की साधारण दशा।
(ख) कई मरहम पट्टी इत्यादि जो बांधी गई हो।
(ग) रक्त स्त्राव का पुनः होना।
(3) रोगी को ले जाने का कार्य अवश्य सुरक्षित, सधा हुआ तथा शीघ्र होना चाहिए।
वाहकों द्वारा उठाना (प्रथम गति)
दो वाहकों द्वारा उठाना (द्वितीय गति)
जब घायल को उतार रहे हों तो उसका सिर सबसे आगे बैसाखी के सिर के ऊपर उठा कर ले जाएँ।
किसी घायल को सुरक्षित स्थान में निम्नलिखित विधियों से ले जाया जा सकता है:-
(क) एक ही सहायक से सहारा देकर।
(ख) हस्त आसन (Hand Seats) पर।
(ग) बैसाखी पर (Stretcher)।
(घ) पहिए वाली गाड़ी पर (Wheeled Transport) ।
भेजने के ढंग या ढंगों का निर्णय निम्नलिखित बातों पर किया जायेगा:-
(क) चोट की दशा।
(ख) चोट की भीषणता।
(ग) उपलब्ध सहायकों की संख्या।
(घ) जाने वाले मार्ग की दशा।
प्रथमिक सहायता उपचार के उचित उपचार के बाद निम्नलिखित सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए:-
(1) रोगी जिस आसान में हो या जिस स्थिति में रखा जाए उसे अनावश्यक न बदलिए।
(2) रोगी को ले जाते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान अवश्य रखना
चाहिए।
(क) रोगी की साधारण दशा।
(ख) कई मरहम पट्टी इत्यादि जो बांधी गई हो।
(ग) रक्त स्त्राव का पुनः होना।
(3) रोगी को ले जाने का कार्य अवश्य सुरक्षित, सधा हुआ तथा शीघ्र होना चाहिए।
वाहकों द्वारा उठाना (प्रथम गति)
दो वाहकों द्वारा उठाना (द्वितीय गति)
जब घायल को उतार रहे हों तो उसका सिर सबसे आगे बैसाखी के सिर के ऊपर उठा कर ले जाएँ।
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