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मोबाइल बैंकिंग सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य बातें:-

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मोबाइल बैंकिंग जब हम घर से दूर हो, और हमें अपने बैंक खाते की जानकारी या किसी परिजन दोस्त को पैसे भेजने हों या किसी तरह का बिल जमा करना हो, तो कभी भी चौबीसों घंटे विभिन्न बैंको के द्वारा मोबाइल बैंकिंग की सेवा शुरू की गई है। यह सेवा पूरी तरह सरल सुक्षित तथा सुविधापूर्ण है। जिसका उपयोग कभी भी कहीं भी किया जा सकता है। मोबाइल बैंकिग की सेवा का लाभ दो तरीकों से प्राप्त किया जा सकता है। 1. मोबाइल बैंकिंग सेवा अप्लीकेशन वैप द्वारा। 2. मोबाइल बैंकिग सेवा एस. एम. एस. (SMS) द्वारा यह सेवा वैप (WAP) के जरिये सभी मोबाइल में GPRS के साथ उपलब्ध है। साथ ही मोबाइल बैकिंग का अप्लीकेशन जावा, ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आई-फोनस और विंडो मोबाइल फोन के लिए उपलब्ध है। मोबाइल बैकिंग अप्लीकेशन और वैप में निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध है। 1.राशि (धन) हस्तांतरण 2. तुरंत भुगतान सेवा 3. पूछताछ सेवाएँ 4. डिमेट एकाउंट सेवा 5. अनुरोध सेवाएँ 6. बिल भुगतान 7. मोबाइल, डिस टी. वी. अथवा मोवीकैश इत्यादि रिचार्ज सेवा 8. अन्य भुगतान (व्यापार भुगतान, जीवन बीमा भुगतान) Things to be noted for Mobile Banking Security मोबाइल बैकिंग सेवा एस....

मोबाइल फोन उपयोग करते समय सावधानियाँ:-

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मोबाइल फोन दैनिक संचार व्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। प्रत्येक मोबाइल फोन में बातचीत तथा संदेश भेजने की क्षमता होती है। जानकारी भेजना, मोबाइल में सुरिक्षत करना एक अभेद्य तरीका है। मोबाइल फोन से लोकेशन का भी पता चलता है। आज के आधुनिक युग में मोबाइल फोन संचार व्यवस्था का सबसे सरल सुगम साधन है जो आसानी से हर गली-मुहल्ले-चौक-चौराहे में उपलब्ध होता है। मोबाइल फोन को भ्रमणि श्रवित यंत्र अथवा सचल दूरभाष यंत्र भी कहते है। मोबाइल फोन को सर्वप्रथम 1940 में विकसित किया गया। 1908 में प्रो. अल्बर्ट झांके तथा दि ओकलैण्ड ट्रांसकौंटीनेन्टल एरियल टेलीफोन और पावर कम्पनी ने दावा पेश किया कि उन्होंने बेतार टेलीफोन विकसित किया है। मोबाइल फोन का प्रचालन कृत्रिम उपग्रह के द्वारा होता है। शुरुआत में मोबाइल फोन की सेवा टेलीफोन के रूप में विकसित होकर आज 3 जी, 4 जी तक चली गई है। शुरू में जी यानि मोबाइल टेलीफोन सर्विस (MTS) तत्पश्चात “इम्प्रूव्ड मोबाइल टेलीफोन सर्विस’ से हुई। इसके बाद एनालॉग सेल्यूलर नेटवर्क 1जी, डिजिटल सेल्यूलर नेटवर्क 2 जी, ब्राडबैंड द्वारा-3 जी तथा नेटिव आई.पी. नेटवर्क-4 जी आया। भारत के स...

हस्तकला की वस्तुएँ तथा गैजेट्स बनाना

हस्तकला की वस्तुएँ तथा गैजेट्स बनाना जनसंख्या विस्फोट तथा शिक्षा के अनियंत्रित व उद्देश्यहीन विस्तार के परिणाम स्वरूप आज देश का असंख्य युवा वर्ग बेकारी और बेरोजगारी की दहलीज पर खड़ा है। युवा वर्ग को जो शिक्षा दी जा रही है उससे वह न घर का रह गया है न घाट का, अर्थात् न तो वह पैतृक पेशे को अपना पा रहा है और नही उसे सरकारी नौकरी ही मिल पा रही है। अतः आज आवश्यकता है उच्च शिक्षा पर नियंत्रण की और युवा शक्ति को स्वरोजगार की ओर अभिमुख करने की। स्काउट गाइड शिक्षा में दक्षताएँ इसी निमित्त रखी गई हैं कि प्रत्येक बालक/बालिका आत्म-निर्भर बने। बचपन से ही हस्तकला की वस्तुएं बनाना सीखे। घर में बिजली का फ्यूज उड़ जान से हमे तब तक अन्धेरे में रहना पड़ता है जब तक कोई इलेक्ट्रिशियन न आ जाये। चाहे टी. वी. हो या पंखा, गैस का चूल्हा हा या अन्य उपकरण, तकनीशियन आने तक हम उस सेवा से वंचित रहना पड़ता है। अतः प्रत्येक स्काउट/गाइड का सामान्य कायाँ तथा छोटे-छोटे काम व मरम्मत के काम जैसे-बल्ब बदलना, ट्यूब बदलना, फ्यूज बाधना. हस्तकला की जानकारी होनी चाहिए ताकि समय और धन की बचत की जा सके हस्तकलाओं में कताई-बुनाई, सिल...

स्काउट में रात्रि खेल में भाग लेना

रात्रि खेल में भाग लेना रात्रि में खेले जाने वाले खेल रात्रि-खेल कहलाते हैं। उदाहरण के लिये टार्च का खेल ले लें, सभी खिलाड़ी एक अंधकारपूर्ण स्थल पर खड़े हो जाते हैं। दो या तीन नायक अपने पास टार्च ले लेते हैं जिसे वे अलग-अलग स्थान पर चमकाते खिलाड़ी उन्हें पकड़ने का प्रयत्न करते हैं। पकड़े जाने पर नायक उस खिलाड़ी को एक टोकन दे देता है। एक निश्चित समय सीमा के बाद सभी इकट्ठे होते हैं जिस टोली के सदस्यों के पास अधिक टोकन मिलते हैं वह अन्य टोली विजयी कहलाती है। अन्य खेलों के लिये Nature Game and Games Galore किताब देखें।

विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन (WAGGGS) के बारे में जानकारी

विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन (WAGGGS) के बारे में जानकारी विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन, WORLD ASSOCIATION अंतर्राष्ट्रीय विश्व गाइड संगठन की छत्रछाया में, राष्ट्रों के सदस्य संगठनों से निर्मित है जिन्होंने सदस्यता के सिद्धांतों को स्वीकार किया हो और संस्थापक लार्ड बेडन पावेल द्वारा स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। विश्व गाइड संगठन (WAGGGS) के निम्नलिखित तीन अंग हैं- (क) विश्व सम्मेलन (World Conference) (ख) विश्व बोर्ड (World Board) (ग) विश्व ब्यूरो कार्यालय (World Bureau) (क) विश्व सम्मेलन (World Conference) यह नीति निर्धारक अंग है। जिसकी तीन वर्ष में एक बार सभा होती है। इसमें प्रत्येक सदस्य देश के दो प्रतिनिधि होते हैं। किंतु मत एक ही होता है। सदस्यों की संख्या के अनुसार अन्य लोग भी सम्मिलित हो सकते हैं। (ख) विश्व बोर्ड (World Board) बोर्ड में 12 सदस्य चुने जाते है। जो विश्व सम्मेलन के कार्यों को कार्यान्वित करते हैं। प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष के लिये चुना जाता है। ये 12 सदस्य अपने में से सभापति चुन लेते हैं। बोर्ड के सदस्यों में से प्रति तीन वर्ष बाद 1/3...

सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें शरीर अथवा मस्तिष्क के आवश्यक कायों में व्याप्त उदासीनता की दशा को सदमा कहते हैं । यह रुधिर संचार व्यवस्था में अव्यवस्था का परिणाम है। कारण -आन्तरिक या बाह्य रक्त-स्त्राव, अस्थि-भंग, दबने, डूबने, जलने, झुलसने, विषपान या सर्पदंश आदि से सदमा होता है। लक्षण -रोगी ठण्ड का अनुभव करता है, शरीर ठण्डा व पसीने से तर हो जाता है। होंठ व चेहरा पीला पड़ जाता है। वह बैचेनी का अनुभव करता है, नाड़ी मंद चलती है तथा सांस तेज हो जाती है, जीभ सूख जाती है। गम्भीर सदमे की स्थिति में रोगी अचेत हो जाता है। उपचार -सर्व प्रथम सदमे का कारण जानना चाहिए। यदि रक्तस्त्राव हो रहा हो तो उसे रोकने का प्रयास करें। यदि रोगी अचेत न हो तो उसे चित्त लिटाकर सिर को शरीर के स्तर से कुछ नीचे व पैरों को ऊपर रखें। कपड़ों को ढीला कर दें और पसीना पोंछ दें। जीभ सूखने पर पूंट-घूट कर पानी या बर्फ के टुकड़े दें। रोगी को सांत्वना दें और यथाशीघ्र औषधालय पहुँचाने की व्यवस्था करें। बिजली का सदमा ( Electric Shock)- किसी व्यक्ति को बिजली का सदमा लगने पर सर्वप्रथम विद्युतधारा को अलग करें। मेन...

बेहोशी (Fainting) होने से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

बेहोशी (Fainting) होने से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें बेहोशी (Fainting) – मस्तिष्क में रक्त कम पहुँचने के परिणाम स्वरूप बेहोशी होती है। कारण -थकावट का होना, भोजन की कमी, शक्ति से अधिक परिश्रम, संवेग की स्थिति में, मानसिक सदमा या भय का होना, खून का दृश्य देखकर, अपने प्रिय की दुर्घटना या मृत्यु देखकर, किसी दुर्घटना का शिकार होने पर, शरीर में रक्त कमी होने से, ऑपरेशन के समय, स्वच्छ हवा की कमी, मौसम की कठोरता व तीव्रता आदि कारणों से बेहोशी हो सकती है। लक्षण -चक्कर आना, भूमि पर गिर पड़ना, त्वचा व चेहरे का पीला पड़ना व चेहरे पर पसीना होना, सांस हल्की व मंद चलना, नाड़ी की गति धीमी व मन्द हो जाना आदि। उपचार -रोगी को पीठ के बल लिटा दें पर पैर कुछ ऊंचे रखें, कपड़े ढीले कर दें। रोगी के आस-पास भीड़ न लगने दें ताकि उसे स्वच्छ हवा मिल सके। चेहरे पर पानी के छीटें दें। यदि नमक उपलब्ध हो तो उसे सुंघायें। रोगी के ठीक होने पर उसे गर्म चाय या कॉफी दें।