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Showing posts from June, 2021

कामचलाऊ डोली या स्ट्रेचर (Improvised Stretcher) कैसे बनायें

कामचलाऊ डोली (Improvised Stretcher) बीमार या जख्मी व्यक्ति को ले जाने के लिए चिकित्सालयों में लोहे की स्टेचर (Iron Stretcher) काम में लाई जाती है किन्तु स्काउट देश-काल-परिस्थिति के अनुसार रोगी को ले जाने के लिये कामचलाऊ (कृत्रिम) डोली बना लेते हैं जैसे हाथों से | (Hand Sheets)] लाठी और कम्बल, चादर, दरी आदि से, लाठी व रस्सी अथवा लाठी-कमीज पेटी, स्कार्फ आदि की सहायता से। रोगी की हालत दे खाकर आवश्यकतानुसार दो हाथ, तीन हाथ या चार हाथों की शीट तैयार कर ली जाती है। यदि रोगी को हल्की चोट हो तो दो हाथ, यदि रोगी का सामान/ थैला आदि भी ले जाना हो तो तीन हाथ की शीट, यदि रोगी को गम्भीर चोट हो तो चार हाथ की शीट पर उठाया जा सकता है। यदि रोगी अचेत हो या अस्तिभंग हो तो काम चलाऊ लाठी-कम्बल आदि की डोली (Stretcher) बनाकर उठाना चाहिए। एक अच्छा प्राथमिक सहायक बनने के लिये आप सेंट जॉन एम्बूलेंस की प्राथमिक सहायता पुस्तक का अध्ययन कर सकते हैं और उनके द्वारा आयोजित कोसों में सम्मिलित हो सकते हैं।

स्काउट के द्वितीय सोपान के खेल

स्काउट के द्वितीय सोपान के खेल वाइड खेल (Wide Games) असीमित क्षेत्र में खेले जाने वाले खेलों को विस्तृत खेल कहा जाता है। विस्तृत खेलों (Wide Games) का रात्रि में खेलना भी रोचक होता है। इस खेल को खेलने से पूर्व क्षेत्र का चयन दिन में कर लेना चाहिए। स्थान प्राकृतिक सौन्दर्य से परिपूर्ण, शान्त तथा जंगली जानवरों के भय से मुक्त होना चाहिए। यह खेल दो टोलियों या टीमों के मध्य खेला जाता है। BER दुर्ग विजय- किसी जंगल में एक टीम ध्वज गाड़कर किला बना लेती है, दूसरी टीम के सदस्य छिपकर उस ध्वज को पाने का प्रयास करते हैं। यदि किसी टीम का कोई सदस्य दूसरी टीम को दिख जाये तो उसे अपनी टीम में मिलाते जाते हैं। निर्धारित समय में पहली टीम ध्वज प्राप्त करने में सफल हो जाती है तो वह विजय घोषित होगी अन्यथा दूसरी टीम (रक्षक टीम) विजयी मान ली जायेगी। खजाने की खोज – किसी साफ सुथरे जंगल में दिन में जाकर नीली, पीती, हरी या लाल झंण्डियाँ छिपा दी जाती है ताकि वे आसानी से न दिख सकें किन्तु सूक्ष्मतम खोज करने पर मिल जायें। अब रात्रि में दल या टोलीवार या दो टीमें बनाकर लिखित निर्देश देकर उन्हें ढूंढने को कहा जा...

शिविराग्नि पर लोकगीत/ देश गीत में प्रतिभाग/नाटिका

शिविराग्नि पर लोकगीत/ देश गीत में प्रतिभाग/नाटिका स्काउट/गाइड जब अपने शिविर के दैनिक कार्य पूर्ण कर लेते हैं तो दिन भर की थकान मिटाने, हंसने और हंसाने के लिये रात्रि में शिविराग्नि के चारों और बैठकर मनोरंजनात्मक कलापों जैसे-प्रहसन नाटक, भजन, देश-गीत. लोकगीत व लोकनृत्य, कहानी, चुटकुले आदि अपनाते हैं। इस अवसर पर किसी वार्ता, कहानी या किसी महापुरुष के जीवन की घटनाएँ भी प्रस्तुत की जा सकती हैं। शिविराग्नि वह स्थल है जहा एक दूसरे को समझने और प्रेरित होने का अवसर मिलता है। “स्काउट/गाइड सबका/सबकी मित्र और प्रत्येक दूसर स्काउट/गाइड का भाई बहन होता होती है।” यह तीसरे नियम की भावना का द्योतक है। इसमें टोली विधि और नेतत्व कार्यशील रहती है। स्काउटर/गाइडर को उन्हें अच्छी तरह जानने का अवसर प्राप्त होता है। संगीत और कला के प्रति लगाव बढ़ता है । प्रशिक्षण का नैतिक मूल्यों को सिखाने का महत्वपूर्ण स्थान है। इस अवसर पर टोली नायक सहायक टोली नायकों की दीक्षा संस्कार और अन्य पदक, बैज प्रदान करने का भी उचित स्थान है। शिविराग्नि से पूर्व भौतिक संसाधन, शिविर स्थल की रूपरेखा, आग जलाने की विधि, संचा...

फैक्ट्री का अध्ययन और मजदूरों के प्रति सम्मान प्रकट करना।

फैक्ट्री का अध्ययन और मजदूरों के प्रति सम्मान प्रकट करना। क्या आपने कभी सोचा कि जिन पुस्तकों को हम पढ़ रहे हैं, जिन कापियों में हम लिखते हैं, जो वस्त्र हम पहन रहे हैं, अथवा जो भी सामग्री हम प्रयोग में ला रहे हैं, वह कहाँ से आती है, इन्हें कौन बनाता है, जो चाय, कॉफी, चीनी, बिस्कुट नमकीन आदि हम उपयोग कर रहे हैं, अथवा जीवन में काम आने वाली समस्त वस्तुओं का निर्माण कहाँ से हो रहा है, इन प्रश्नों का उत्तर आपको किसी मिल या फैक्ट्री में जाकर मित सकता है। स्काउट गाइड की इस जिज्ञासा की पूर्ति के लिये उन्हें किसी फैक्ट्री मिल या कारखाने में ले जाना होगा, जहाँ मजदूर अपना खून-पसीना बहाकर मेहनत कर उत्पादन करता है, किंतु उसका समाज में कोई सम्मान नहीं। सम्मान उसका होता है जो मालिक है, पूँजीपति या बिचौलिया है। मेहनत कोई करता है और मौज कोई उड़ाता है। यूरोप और अमेरिका में मजदूर की वही इज्जत है जो मालिक की। वहाँ जबकि भारत में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। श्रमिक वर्ग और उच्च वर्ग की मजदूरी वेतन न्यूनतम आवश्यकताओं की पूर्ति के आधार पर निर्धारित होता है, मजदूरी/वेतन में जमीन आसमान का फर्क है। उच्च वर्ग अर्थात्...

विद्यालय विकास परियोजना के अंतर्गत सेवा कार्य

विद्यालय विकास परियोजना के अंतर्गत सेवा कार्य अपने प्रधानाचार्य से स्वीकृति लेकर प्रत्येक टोली को अपने विद्यालय विकास की कोई परियोजना चुन लेनी चाहिए जिनमें निम्नलिखित कार्य सम्मिलित किये जा सकते हैं- स्वच्छता अभियान कक्षों की स्वच्छता, फर्नीचर की स्वच्छता, पानी की टंकी, शौचालय, मूत्रालय की स्वच्छता, विद्यालय की पुताई, रंग साजी आदि कार्य अपनाये जा सकते हैं। सौन्दर्यांकरण – पुष्प वाटिका, घास का लॉन, झाड़ी की बाड़ लगाना, मार्गों की सुव्यवस्था आदि कार्य किये जा सकते हैं। वृक्षारोपण – विद्यालय की वह भूमि जहाँ वृक्ष लगाये जा सकते हैं- जैसे मैदान के चारों ओर तथा भवन के आगे-पीछे। इस कार्य में गड्ढे बनाना, खाद देना, पौर लगाना, निढाई-गुड़ाई तथा सिंचाई करते रहना सम्मिलित किये जा सकते है। सद्वाक्य लिखना – कक्षा-कक्षों, बरामदों, भवन के उपयुक्त स्थानों पर सद्विचार लिखने का कार्य अपनाया जा सकता है। उक्त कार्यों के अतिरिक्त भी स्थान, समय और आवश्यकतानुसार कार्य अपनाये जा सकते हैं।

स्काउट में कम्प्यूटर का प्रयोग

स्काउट में कम्प्यूटर का प्रयोग कम्प्यूटर का आविष्कार 1837 में इंगलिश पॉलीमैथ (गणितज्ञ) दार्शनिक, अन्वेषक और यान्त्रिक इंजीनियर चार्लस् बैबेज (Charles Babbage) ने किया। इसलिये उन्हें कम्प्यूटर का जनक (Father of Computer) कहा जाता है। कम्प्यूटर एक इलैक्ट्रॉनिक डिवाइस है जो आंकड़े (Datas) और निर्देशी (Instructions) को प्राप्त करता है। कम्प्यूटर के आविष्कार से संचार जगत को एक नई दिशा मिली है। अनेक कार्यों को एक सेकण्ड में कर डालने वाला कम्प्यूटर आज हमारे जीवन का प्रमुख हिस्सा बन गया है। कम्प्यूटर द्वारा गणना करना सरल और त्वरित हो गया है। यह गणना ही नहीं करता वरन बैंक, कार्यालयों, शिक्षा, अन्वेषण और चिकित्सा विज्ञान में भी क्रांतिकारी कार्य कर रहा है। कम्प्यूटर मनुष्य से तेज काम करता है। इसके परिणाम शत-प्रतिशत सही होते हैं। मनुष्य की भांति यह कभी भी धकावट अनुभव नहीं करता, क्योंकि इसके पास अपना मास्तिष्क नहीं है। यह अनेक कार्य करने में सक्षम हैं। जैसे-तकसंगत समस्यायें, गणितीय गणना कार्य, ई-मेल भेजना, चित्र बनाना आदि। कम्प्यूटर तभी कार्य करता है, जब प्रोग्राम में किसी प्रकार की त्रुटि न हो,...

स्काउटिंग में दल या कम्पनी रचना (Troop Formation)

स्काउटिंग में दल या कम्पनी रचना (Troop Formation) दल/कम्पनी को खड़ा करने अर्थात् रचना करने के अनेक तरीके है। हाथ के संकेतों से यह कार्य बिना आवाज़ किये किया जा सकता है। दल/कम्पनी की कुछ प्रमुख रचनायें (सजावट) निम्न प्रकार की जा सकती हैं। 1. एक कतार रचना (single line Formation) – इसमें सभी टोलियाँ क्रमशः एक ही कतार में लीडर के सामने खड़ी होती है। दोनों हाथ कंधे की सीध में तानते हुए मुट्ठी नीचे की ओर संकेत पर-एक कतार बनती है। यदि एक तरफ का हाथ कुछ नीचा हो तो बड़े दाहिनें-छोटे बायें और यदि एक हाथ कंधे से कुछ ऊंचा हो तो बड़े बाँयें और छोटे दाहिने कदवार खड़े होते हैं। 2. निकट कतार रचना (close Columen Formation)- दोनों हाथ लम्बवत् कुहनी से ऊपर को मुट्ठी अन्दर की ओर के संकेत पर टोलियाँ एक दूसरे से 30” अथवा एक हाथ का फासला लेकर एक टोली के पीछे दूसरी टोली खड़ी होती है। दल नायक कम्पनी लीडर सबसे आगे मध्य में, टोली नायक दायें सहायक अन्तिम छोर पर बायें और दाँये से बायीं ओर को एक हाथ का फासला लेकर स्काउट/गाइड खड़े होते हैं। 3. खुली कतार रचना (open Columen Formation)- दोनों हाथ कन्धे की सीध में ...

स्काउट में मार्चिंग (Marching)

स्काउट में मार्चिंग (Marching) दल कम्पनी को एक कतार में खड़ाकर (कदवार भी खड़ा किया जा सकता है।) गिनती कराई जाती है। ‘दाँये बाँयें से गिनती कर’ के आदेश पर दाँये बाँयें गर्दन मोड़कर एक-दो-तीन की गिनती करते हुए पूरे दल कम्पनी को तीन कतारों में विभक्त किया जाता है। ‘बड़े बायें छोटे दाहिने’ कतार बन’ के आदेश पर दल/कम्पनी एक कतार में खड़ी होती है। ‘बायें से तीन में गिनती कर’ के आदेश पर बायीं तरफ वाला स्काउट/गाइड एक-दो-तीन क्रमशः गिनती करते हुए अपनी गर्दन दाहिने को मोड़ते हैं। अगले आदेश नं. 1 एक कदम आगे, नं. 2 अपनी जगह पर रहेगा, नं. 3 एक कदम पीछे, अथवा नं.) अपनी जगह पर रहेगा, नं. 2 एक कदम पीछे, नं. 3 दो कदम पीछे चलेगा-खुलजा’ के आदेश पर तीन कतारें बन जायेंगी। आगे की पंक्ति का दर्शक अपनी जगह पर रहेगा। पीछे के दोनों दर्शक एक हाथ का फासला लेकर खड़े होंगे। शेष सभी मुट्ठी बंधे एक हाथ का फासला लेन हुए सीध लेंगे। अब दाहिने बायें मोड़कर माचिंग कराई जा सकती है। दूसरी विधि यह है कि लीडर पाँच कदम के फासले पर खड़ा होकर दाहिना दर्शक खड़ा करेगा। – ‘जमा -हो (fal...

समाज सेवा शिविर में प्रतिभाग

समाज सेवा शिविर में प्रतिभाग भारतीय स्काउटिंग के प्रणेता पं.श्रीराम बाजपेयी जी ने सेवा-समिति स्काउट दलों का गठन कर बालकों में सेवा-भाव को पुष्ट करने का कार्य किया। उस समय स्काउट मेलों, बाढ़, दुर्भिक्ष, महामारी आदि कार्यों में निःस्वार्थ सेवा करते थे। इन कार्यों के सम्पादन के लिये सेवा-शिविरों का आयोजन समय-समय पर कर स्काउट/गाइड को सेवा का अभ्यास करते रहना आवश्यक है। सेवा ईश्वर की पूजा है तथा “कर्ता” को इससे आत्मिक मिलता है। सेवा के निम्नांकित कार्य अपनाये जा सकते हैं – किसी मेले में खोये-पाये बच्चों की व्यवस्था, जल पिलाने का कार्य, साइकिल व्यवस्था, दर्शनार्थियों को पंक्तिबद्ध करना, चोर उचक्कों की निगरानी करना। प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र स्थापित करना। बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन, सार्वजनिक स्थलों में प्याऊ की व्यवस्था करना। वृक्षारोपण कार्य। प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम अपनाना। किसी गाँव की स्वच्छता अपनाना। पर्यावरण जागृति अभियान चलाना । सड़क, भवन, पार्क आदि का निर्माण करना। रामलीला जलूस आदि में स्वयं सेवक का कार्य। बाढ़ भूचाल, दूभिक्ष आदि प्राकृतिक आपदाओं में पीड़ितों की सेवा करना।...

कूड़ा निस्तारण प्रोजेक्ट स्वच्छता अभियान

कूड़ा निस्तारण प्रोजेक्ट स्वच्छता अभियान (अपने विद्यालय, स्काउट मुख्यालय में) स्काउट/गाइड आवश्यकतानुसार नगर, ग्राम, बाजार, मेले आदि सार्वजनिक स्थलों पर एक अभियान के रूप में स्वच्छता का कार्य करते हैं। किसी सार्वजनिक स्थल को चुनकर वे साप्ताहिक या मासिक उसकी सफाई व्यवस्था करते हैं। सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता के निम्नलिखित कार्य किए जा सकते हैं- 1. किसी पार्क को अपना लेना। 2. किसी बस्ती में वहाँ के निवासियों के साथ कार्य करना। 3. किसी गाँव को अपनाकर ग्रामवासियों के साथ कार्य करना। 4. किसी तालाब जिसमें मच्छर पल रहे हों उसे सुखा देना। 5. पोखर-गड्ढों को पाटना। 6. मच्छर पलने के स्थान पर मिट्टी का तेल (केरोसिन) छिड़कना। 7. किसी बस्ती के हर घर को शिक्षित करना कि व कूड़ा करकट किसी टिन में ढककर रखें. 8. यदि किसी सार्वजनिक स्थल पर अधिक कूड़ाकचरा जमा हो गया हो तो उसकी सफाई के लिये नगर स्वास्थ्य अधिकारी से सम्पर्क करना। 9. गाँवों में गोबर व कूड़े को गड्ढों में डालकर कम्पोस्ट खाद बनवाना। प्रस्तावित विद्यालय अनेक छोटे-छोटे गाँवों के मध्य में स्थिति हैं, अपने कूड़ा निस्तारण प्रोजेक्ट और विद्यालय स्वच...

सरंक्षक के तीन (R-Reduce, Reuse, Recycle) अर्थात् कम करना, पुनः काम में लाना एवं नये स्वरूप में बदलना।

सरंक्षक के तीन (R-Reduce, Reuse, Recycle) इसे हम दूसरे शब्दों में Waste Management अथात् अपव्यय का प्रबंधन भी कह सकते हैं। अपव्यय का प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ता है। जितनी चीजों की बर्बादी पदार्थ सड़गल कर पर्यावरण को प्रदूषित करेगा। जितना हम वस्तुओं का दुरुपयोग करेंगे, कारखानों एवं मिलों को उत्पादन बढ़ाना पड़ेगा। जिसका परिणाम होगा प्रदूषण में वृद्धि। इस हेतु हमें अपनी जीवन शैली में भी कुछ परिवर्तन लाने होंगे। उदाहरण के लिये जिन लोगों के पास एक कार है, उससे परिवार का काम होगी उतना ही चाहिए। इसका प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। जितनी अधिक कारें होंगी-प्रदूषण उतना चलाया जा सकता है। फिर भी परिवार के प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग कार ही बढ़ेगा। यह नियम घर की प्रत्येक वस्तु पर लागू होता है। तात्पर्य यह है कि हमें अधिक उपयोग की प्रवृत्ति पर लगाम कसनी होगी और सात्विक जीवनयापन की ओर जाना होगा। घर में ऐसी अधिक वस्तुएँ होती हैं जिन्हें हम काम में नहीं लाते। उन्हें फेंक दिया जाता है। उनका स्वरूप बदलकर पुनः काम में लाया जा सकता है। उदाहरण के लिये आपका गर्म-कोट बाहर से खराब दिखता है। यदि उसे आल्टर कर दिया ज...

दम घुटने (Choking) से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

दम घुटने (Choking) से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें दम घुटना (Choking) -श्वास नली में सांस लेने में अवरोध होने पर दम घुटने का अनुभव होता है। कारण -गले में भोजन, फल या अन्य चीज अटक जाने पर सांस लेने में बाधा पड़ती है। लक्षण -रोगी को अचानक खांसी होती है, चेहरा पीला पड़ जाता है तथा शरीर ढीला पड़ जाता है। उपचार -रोगी को पूरे जोर से खांसने को कहें। यदि बड़ी चीज अटकी हो तो एक हाथ से रोगी की कमर पकड़कर गर्दन आगे झुका दें। दूसरे हाथ से गले के निकट पीठ में मुट्ठी से मारें। तीन बार मारने पर वह वस्तु बाहर न निकले तो पेट दबाने की विधि अपनाएं। इस प्रक्रिया में खड़े तथा लिटाकर पेट को दबाया जाता है। यदि यह विधि भी असफल रहे तो तर्जनी अंगुली को गले में डालकर अटकी वस्तु निकाल दी जाती है। पेट दबाने की (Heimlich’s Manocurer) ठीक तकनीक अपनाएं।

कम्पास और मानचित्र की जानकारी व सोलह दिशाओं का ज्ञान

कम्पास की जानकारी (Knowledge of Compass) कम्पास की सई सदैव उत्तर दिशा की ओर रहती है। उत्तर दिशा की सही स्थिति ध्रुव तारा है किन्तु मैग्नेटिक कम्पास की सुई ठाक ध्रुव तारे की ओर न होकर कुछ पश्चिम की ओर मुड़ी होती है। इसका कारण यह है कि उत्तरी ध्रुव स लगभग 1400 मील कनाड़ा के उत्तर में एक शक्तिशाली बिन्दु है जो मैग्नेटिक उत्तर को दर्शाता से प्रत्येक स्काउट/गाइड को दिशाओं का ज्ञान तथा सोलह दिशाओं की जानकारी होनी चाहिए। इस हेतु कम्पास एक सुलभ साधन है। चुम्बकीय कम्पास में एक सुई होती है जो स्वतंत्र रूप से धूमती रहती है। यदि किसी समतल स्थान पर कम्पास को रख दिया जाय तो यह सुई स्थिर होकर उत्तर दिशा प्रदर्शित करती है। उत्तर तीन प्रकार के हैं- True North (वास्तविक उत्तर) ध्रुव तारे से, , Magnetic North (चुम्बकीय उत्तर) कम्पास से तथा Grid North मानचित्र से से ज्ञात किया जाता है। सोलह दिशाओं का ज्ञान मुख्य चार दिशायें हैं-उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम । दो दिशाओं के बीच की अर्द्धक लेने पर कुल आठ दिशायें बन जाती है-उत्तर, उत्तर-पूर्व, पूर्व, दक्षिण-पूर्व, दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चि...

वस्तु की कोणिक दूरी (Bearing) क्या होती है स्काउट में इसकी उपयोगिता बताइए

उत्तर-दक्षिण रेखा पर किसी वस्तु का घड़ी की सुई की दिशा में जो कोण बनता है | उसे उस वस्तु की कोणिक दूरी (Bearing) कहते है। उदाहरण के लिये किसी स्थान से किसी मन्दिर की कोणिक दूरी कम्पास से 45° आती है तो मन्दिर का बियरिंग 45° हुई। अतः मानचित्र पर कोई वस्तु किसी स्थान से उत्तर दिशा से घड़ी की सुई की दिशा (Clockwise) में जितने अंश का कोण बनाती है वह उस वस्तु की बियरिंग कहलाती है. फारवर्ड बियरिंग (Forward Bearing) किसी स्थान से उत्तर दिशा से घड़ी दिशा में उस वस्तु की जो कोणिक दूरी होगी वह उस वस्तु का फारवर्ड विधान कहलायेगी।R स्थान से स्थान से मन्दिर का फारवर्ड बियरिंग 45 है। बैक बियरिंग (Back Bearing)- वस्तु से पूर्व की कोणिक दूरी बैक बियरिंग कहलाती है। B.B. एक प्रकार से FB. की शुद्धता ज्ञात करने के लिये प्राप्त की जाती है। उक्त उदाहरण में मन्दिर से पूर्व स्थान (A) की कोणिक दूरी 225 B.B. है। FB.180 से कम हो तो उसमें 180° जोड़कर और 180° से अधिक हो तो उसमें से 180° घटाकर B.B. ज्ञात किया जा सकता है। एक ट्रेल( भमण) का अनुसरण जिसमें कोण और दूरी दी गई हो- स्काउटर/गाइडरद्वाराटोली नायको को निम्न प्रक...

स्काउट/गाइड में चाकू (Knife) का प्रयोग

चाकू (Knife) चाकू स्काउट/गाइड का परम मित्र है। चाकू अनेक प्रकार के होते हैं। किन्तु स्काउट/गाइड निम्नलिखित तीन प्रकार के चाकू प्रयोग करते हैं:- 1. स्काउट चाकू (ScoutKnife) 2. डेगर या सीथ चाकू (Daggeror Seath Knife) 3. जैक या क्लैस्प चाकू (JackorClasp knife) 1. स्काउट चाकू – यह बहुउद्देश्यीय होता है। इसमें तीन फल एक धारदार चाकू, एक पेंचकस खोदने व बोतल के ढक्कन खोलने के फल होते हैं। स्काउट इसे अपनी पेटी में बने छल्ले पर आसानी से लटका लेते हैं। 2. डैगर या सीथ चाकू – इस चाकू को मोड़ा नहीं जा सकता। इसके बाहर चमड़े का खोल चढ़ा होता है। इसका प्रयोग गैजेट्स की लकड़ी काटने, छीलने तथा सब्जी काटने में किया जाता है। इसे स्काउट पेटी पर लटकाया जा सकता है। 3. जैक नाइफ – इसे खोला तथा मोड़कर बन्द किया जा सकता है। यह फल, सब्जी आदि काटने के काम आता है सावधानियाँ चाकू के बारे में निम्नलिखित सावधानियाँ रखनी चाहिए:- जोड़ों पर मशीन का तेल डालते रहना चाहिए। * चाकू पर किसी उपयुक्त चीज से धार लगाते रहना चाहिए। धार लगाते समय दोनों तरफ बारी-बारी से गोलाकार रगड़ना चाहिए। * जैक नाइफ को खोलते व बन्द...

मानचित्र में पाँच डी (Five D's of Map)

मानचित्र में निम्नलिखित पाँच (Five D’s) होते हैं (क) विवरण (Description) – मानचित्र पढ़ने व बनाने में निम्नलिखित आवश्यक है- (1) पत्रक का नाम (Name of the Sheet) (ii) पैमाना (Scale) (iii) उत्तर दिशा (North) (iv) उच्चावचन (Altitude) (v) परिचय संख्या (Reference Number) (vi) प्रकाशन एवं भूमान तिथि (Date of publication and Surveying) (vii) aielach fet (Symbols/Convention signs) (viii) अक्षांश और देशांतर रेखाएं (Longitude and Latitude) (ix) क्षेत्रफल (Area Covered) (ख) दिशा ज्ञान (Direction) – मानचित्र के ऊपरी दाहिने शीर्ष पर तीर द्वारा उत्तर दिशा को दर्शाया जाता है तथा साथ ही उत्तर दिशा से चुम्बकीय उत्तर का अन्तर भी। (ग) दूरी (Distance)-मानचित्र के नीचे के मध्य भाग पर पैमाना (Scale) दर्शाया जाता है जिससे दो स्थानों की दूरी ज्ञात की जा सकती है। (घ) प्रतीक चिन्ह (Demarcation)-परंपरागत सांस्कृतिक चिहों, रंगों एवं अन्य सांकेतिक चिन्हों से मानव निर्मित दृश्यावलियों को दर्शाया जाता है। (ड) नामांकन (Designation) – मानचित्र में नदियों, शहरों, झीलों, महाद्वीपों, महासागरों, राष...

स्काउट/गाइड के लिये भोजन बनाना अनिवार्य

स्काउट/गाइड के लिये भोजन बनाना अनिवार्य स्काउट/गाइड के लिये भोजन बनाना इस लिये अनिवार्य किया गया है कि वे बचपन से ही उसे बनाना सीखें। शिविर में टोलीवार भोजन बनाने से प्रत्येक सदस्य को भोजन बनाने की जानकारी हो जाती है तथा उनमें आत्मनिर्भरता का भाव आता है। अपने आप बनाये भोजन से संतोष व स्वाद प्राप्त होता है और बचत भी होती है। दूसरों के द्वारा पकाये गये भोजन में अनेक नुक्ताचीनी की जाती है। अशुद्धता, कच्चापन व अपव्यय की शिकायत बनी रहती है। शिविर, रैली, जम्बूरी में जो टोलियां भोजन स्वयं बनाकर खाती है वे अधिक स्वस्थ और सक्रिय रहती है, इससे उनके विद्यालय स्काउट/गाइड कोष की भी बचत होती है। जिन विद्यालयों के स्काउट गाइड भोजन का खर्च भी विद्यालय से वहन कराते हैं वे एक दो शिविर या रैलियों में भाग लेकर ठण्डे पड़ जाते हैं। अतः विद्यालय कोष का प्रशिक्षण सामग्री, साहित्य, मार्ग-व्यय, शिविर शुल्क, हाइक आदि के लिये उपयोग किया जाना चाहिए। भोजन व्यवस्था की पूर्ण जिम्मेदारी स्काउट/गाइड को स्वयं वहन करनी चाहिए। प्रत्येक स्काउट/गाइड को सब्जी, रोटी, चावल, दाल, सलाद, चटनी, चाय, कॉफी,नाश्ता बनाना तथा भोजन परो...

उत्तर दिशा की जानकारी (Finding the North) कैसे प्राप्त करें

उत्तर दिशा की जानकारी (Finding the North) स्पेन निवासी कोलम्बस भारत की खोज के लिये चला था किन्तु वह भारत न पहचकर अमेरिका पहुंच गया। ऐसा क्यों हुआ? कारण यह था कि उत्तर दिशा को दशाने वाला कोई यंत्र नहीं बना था। बाद में वास्को-डि-गामा के समय ध्रुव दशक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। अतः वह इस यंत्र की सहायता से भारत पहुँच गया। स्काउट गाइड उत्तर दिशा ज्ञात करने के लिये अपने पास कम्पास तो रखते ही हैं, उसके अभाव में वे अनेक विधियों से भी उत्तर दिशा ज्ञात कर लेते हैं जिनमें कुछ विधियाँ निम्नलिखित है:- 1. सूर्य की सहायता- उदय होते सूर्य की ओर मुंह कर खड़े हों तो सामने की ओर पूर्व दिशा, पीठ पीछे पश्चिम, बायें हाथ की ओर उत्तर और दाहिने हाथ की ओर दक्षिण दिशा होगी। इसके अतिरिक्त प्रातःकाल छः बजे सूर्य पूर्व में, नौ बजे दक्षिण पूर्व में, बारह बजे दक्षिण में, सायं तीन बजे दक्षिण-पश्चिम में और छः बजे सायं पश्चिम में होता है। 2. हाथ की घड़ी से- हाथ की घड़ी को स्थिर रखकर घंटे की सुई को सूर्य की सीध में करें। घड़ी के केन्द्र पर एक तिनका खड़ा करें। तिनके की छाया, घंटे की सुई और सूर्य जब एक सीध में हों ...

भोजन के प्राप्ति के स्रोत व कार्य

भोजन की स्वच्छता परम आवश्यक है। भाज्य पदार्थ ठीक प्रकार से पानी में धोकर पकाये और खाये जायें। खाना पकाने के बर्तन तथा खाना खाने का स्थान स्वच्छ हो। घर में गन्दगी जूता से आती है। अतः जूत बाहर अलग स्थान पर रखे जायें। मक्खी, मच्छर, चूह, काक्रोच आदि को भोज्य पदार्थों से दूर रखा जाये। खाना खाते समय हल्क व स्वच्छ वस्त्र धारण करना लाभकारी है। भोजन करने से पूर्व और बाद में साबुन से ठीक प्रकार से हाथ धोने तथा कुल्ला करना चाहिए। भोजन हमारे शरीर को ऊष्मा तथा शक्ति प्रदान करता है। भोजन के आवश्यक तत्व हैं-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, फैट्स, मिनरल्स, विटामिन एवं जल । इन तत्वों का संतुलित उपभोग स्वास्थ्य के लिये आवश्यक है। इनकी प्राप्ति के स्त्रोत व कार्य निम्नवत है:- भोजन के प्राप्ति के स्रोत व कार्य प्रोटीन स्त्रोत-दूध, अण्डा, गोश्त, मछली, मटर, दालें, तरकारी, सोयाबीन आदि। कार्य – शरीर तन्तुओं का निर्माण और उनकी क्षतिपूर्ति करना। * जीव द्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) का निर्माण करना। पाचक रसों तथा नलिका विहीन ग्रन्थियों के रसों का निर्माण करना। * शरीर में रोग निवारक शक्ति उत्पन्न करना। कार्बोहाइड्रेट तत्व ...

जलने व फफोलों का उपचार (Burns & Scalds)

जलने व फफोलों का उपचार (Burns & Scalds) मामूली जलने पर उस अंग को ठण्डे पानी में डुबा देना चाहिए। गर्म लोहा, बिजली, रस्सी की रगड़ अथवा रसायनों से शरीर का कोई भाग जल सकता है। जबकि गर्म भाप, उबलते पानी, गर्म तेल आदि से जलने पर फफोले पड़ जाते हैं। गम्भीर रूप से जलने व फफोले पड़ने पर रोगी को सदमे से बचायें तथा कम्बल से ढक दें। गर्म चाय दें। फफोले को कदापि न फोड़ें। प्राथमिक सहायक के हाथ साफ हों तथा घाव को न छूएं। घाव को गर्म किये गांज से ढक कर पट्टी बांध दें। डिटौल के घोल से जले घाव को धीरे से साफ करें

ड्रेसिंग (Dressing) क्या है ?

ड्रेसिंग (Dressing) ड्रेसिंग वह आवरण (Covering) है जिससे घाव या आहत अंग ढका जाता है। इससे खून का बहना, घाव का फैलाव तथा रोगाणुओं से रक्षा की जाती है। ड्रेसिंग दो प्रकार से की जा सकती है- सूखी (Dry)और नम (Wet)। सूखी ड्रेसिंग का तात्पर्य है कि जब घाव खुला हो- उस पर रोगाणुमुक्त ड्रेसिंग (Sterilized Dressing) करनी हो, खुले या जले घाव या रक्त श्राव की स्थिति में सूखी ड्रेसिंग की जाती है। यह ड्रेसिंग रोगाणुमुक्त (Sterilised) मिलती है। यदि इस प्रकार की ड्रेसिंग उपलब्ध न हो तो किसी साफ सफेद कपड़े का प्रयोग करना चाहिए। इसके अभाव में किसी साफ रुमाल या स्कार्फ का प्रयोग करना चाहिए। ड्रेसिंग करने से पूर्व प्राथमिक चिकित्सक को अपने हाथों को रोगाणु रोधक घोल से अच्छी तरह धो लना चाहिए। इसके बाद ही रोगाणु रोधक घोल या लोशन से घाव साफ करना चाहिए। घाव के ऊपर ड्रेसिंग रख कर रुई से ढक कर पट्टी बांधनी चाहिए। नम ड्रेसिंग को बन्द घाव पर प्रयुक्त किया जाता है। इसका प्रयोग खुले घाव पर कदापि न करें और न ही रोगाणुरोधक ड्रेसिंग का प्रयोग करें। इसमें ठण्डे पानी की या बर्फ की सेंक (Cold Compress) दी जाती है। बन्द घाव...

स्काउट में मापनी (Scale) का उपयोग

स्काउट में मापनी (Scale) का उपयोग मानचित्र पर दो स्थानों के मध्य की दूरी और धरातल पर उन्हीं स्थानों के मध्य पर वास्तविक दूरी के अनुपात को मापनी कहते हैं। उदाहरण के लिये मापनी में किलोमीटर की दूरी को एक सेन्टीमीटर में दर्शाया गया हो। इस प्रकार मापनी एक ऐसी तकनीक है, जिसके द्वारा छोटे-छोटे हिस्सों को बड़े आकार में तथा बड़े-बड़े क्षेत्रों को छोटे आकार में प्रदर्शित किया जा सकता है। मापनी निम्नांकित प्रकार की होती है- 1. साधारण मापनी, 2. विकर्ण मापनी, 3. तुलनात्मक मापनी, 4. पग मापनी, 5. चक्कर मापनी, 6. समय या दूरी मापनी, 7. वर्नियर मापनी, 8. ढाल या प्रवण मापनी। साधारण मापनी इस मापनी में दो इकाइयाँ प्रकट की जा सकती है जैसे (1) मीटर और से.मी.(2) किलोमीटर और मीटर इत्यादि। इस मापनी का प्रदर्शन एक सरल रेखा द्वारा किया जाता है। इसलिये इसे साधारण रेखात्मक मापनी भी कहते है। साधारण मापक प्रकट करने की तीन विधियाँ है:- कथनात्मक विधि -इसमें मापक की अभिव्यक्ति शब्दों द्वारा की जाती है जैसे -1 से. मी. = 5 कि. मी. अथवा 1″ = 8 मील इत्यादि। उदाहरण – दो नगरों की वास्तविक दूरी 7 कि. मी. है जब कि म...

गाँठ विद्या -मारलिन लिवर हिच(Knoting- Marline Lever Hitch)

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गाँठ विद्या -मारलिन लिवर हिच(Knoting- Marline Lever Hitch) मारलिन लिवर हिच (Marline Lever Hitch) रस्सी की सहायता से लाठी पर शीघ्रता से सीढ़ी बनाने में इस फाँस का प्रयोग किया जाता है। चित्र में ढेकली फाँस का अवलोकन कर इसे आसानी से बनाया जा सकता है। सुस्त भाग पर एक गोलाकार छल्ला बनाकर उसके बीचों-बीच ऊपर से चुस्त सिरा रखकर मध्य में लाठी/बल्ली फंसा दें। यह हॅकली फाँस बन गई।

गाँठ विद्या -रोलिंग हिच (Knoting-Rolling Hitch)

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गाँठ विद्या -रोलिंग हिच (Knoting-Rolling Hitch) रोलिंग हिच (Rolling Hitch)- यह फॉस भी खूटा फॉस की भांति होती है किन्तु उससे अधिक सुरक्षित है। जब रस्से पर अधिक तनाव पड़े या टूटने की संभावना हो तो सरक या लपेट फॉस लगाकर उसे सुरक्षित कर दें। जहां पर रस्सी कमजोर हो उसे सुस्त भाग में लें। तनाव से टूटने वाली रस्सी पर इसे लगाते समय खूटा फाँस की तरह सुस्त भाग पर चुस्त सिरे से दो लपेटे दें।

गाँठ विद्या -स्क्यार लेसिंग ( Knoting-Square Lashing)

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स्क्यार लेसिंग (Square Lashing)- इसे चौकोर बन्धन भी कहा जाता है। यह बन्धन दो बल्लियों को समकोण पर बांधने के लिये प्रयुक्त होता है। मकान बनाने के लिये, मचान-पुल, गैजेट्स आदि में इस बन्धन का प्रयोग होता है। इसे लगाते समय यह ध्यान रखें कि जिस लाठी पर बल पड़ रहा हो उसके विपरीत लाठी पर खूटा फाँस लगायें। अब तीन-चार बार लाठियों के चारों ओर समानान्तर लपेटे लगा दें तथा तीन-चार बार रस्सी के मध्य में लेकर कसाव कर दें। प्रारम्भ में जिस लाठी पर खूटा फाँस लगाया गया हो उसके विपरीत लाठी पर खूटा-फॉस लगाकर बन्धन समाप्त कर दें।

गाँठ विद्या-फिगर ऑफ एट नाट ( Knoting- Figure of Eight Knot)

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गाँठ विद्या-फिगर ऑफ एट नाट ( Knoting- Figure of Eight Knot) फिगर ऑफ एट नाट (Figure of EightKnot) यह गाँठ सादी गाँठ (Figure Thumb Knot) से अधिक सुरक्षित है। इसका उपयोग रस्सी के सिरे को खुलने से रोकना है, इसको लगाते समय स्थिर सिरे को बायें हाथ की हथेली चुस्त सिरे को स्थिर भाग के ऊपरी सिरे पर लूप बनाकर और चुस्त सिरे को स्थिर भाग के पीछे से लप से निकालें। और चुस्त सिरे को खींच कर कस दें .

अस्थि-भंग के प्रकार व उपचार जानें

अस्थि-भंग के प्रकार व उपचार हड्डी की टूटन या दरार को अस्थि-भंग कहते है। यह टूटन निम्नांकित तीन प्रकार की हो सकती है:- 1. साधारण अस्थि-भंग – इसमें हड्डी में दरार आ सकती है किन्तु त्वचा यथावत रहती है। लक्षण -हड्डी के टूटने के स्थान पर रोगी को दर्द होता है। अंग कार्य नहीं करता तथा रोगी को सदमा हो सकता है। उस हिस्से पर हाथ लगाने से दर्द होता है। टूटे भाग में सूजन आ जाती है। वह भाग विकृत दिखता है तथा टूटी हड्डी में किरकिराहट की आवाज आती है। उपचार -टूटे भाग पर खपच्ची या उपलब्ध सामग्री बांध दें। रोगी को सांत्वना दें। सदमे की स्थिति में उसका उपचार करें तथा डॉक्टर को बुलाने या रोगी को चिकित्सालय तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। 2. मिश्रित अस्थि भंग – इसमें हड्डी टूटने के अलावा कोई अयव, धमनी, सिरा या नस भी प्रभावित रहती है। लक्षण -व्यक्ति टूटे हुए अंग को साधारण रूप में प्रयोग नहीं कर पाता, हड्डी के तीखे या टूटे किनारों के बीच के भाग को अनुभव किया जा सकता है। टूटे स्थान पर दर्द होता है तथा सूजन आ जाती है। यह अंग छोटा या टेढ़ा हो जाता है जिससे रोगी सामान्य अवस्था में कार्य नहीं कर पाता। अ...

गाँठ-विद्या (Knoting) -लट्ठा-फाँस (Timber Hitch)

गाँठ-विद्या (Knoting) लट्ठा-फाँस (Timber Hitch) – यह फाँस पतली लकड़ियों को गट्ठर बांधने, लट्ठों को चढ़ाने-उतारने, घसीटने, जकड़ने तथा कर्णाकार बन्धन के शुरू में प्रयुक्त होती है अर्थात् दो लाठियों या बल्लियों के मध्य के अन्तर को कम करती है। रस्सी के सुस्त भाग पर चुस्त भाग से उसी पर विपरीत मोड़ कर तीन-चार लपेटे लगा दें। सुस्त भाग – को खींचने पर कसाव बढ़ जाता है। लट्टे या गट्ठर को खींचने के लिये क्लिक हिच का प्रयोग किया जाता है।

मानचित्र बनाने की त्रिकोणी विधि

मानचित्र बनाने की त्रिकोणी विधि इस विधि में चुम्बकीय कोण (बेयरिंग) ज्ञात कर लिये जाते है और दूरी को चैन या टेप से नाप लिया जाता है। जब दिशा और दूरी ज्ञात हो जाय तो मानचित्र बनाना सरल हो जाता है। चुम्बकीय कोण (बेयरिंग) का तात्पर्य है किसी वस्तु का चुम्बकी उत्तर से उस वस्तु का घड़ी की दिशा में बना कोण। कम्पास भूमापन में निम्न प्रक्रिया अपनायें:- जिस क्षेत्र का मापन करना है उसका निरीक्षण कर एक कच्चा खाका बना लें। कम्पास को ‘अ’ स्टेशन पर सैट कर लें। उसे क्षैतिज दिशा में समतल कर लें। ‘ब’ स्थान पर रेजिंग रॉड लगायें और उसका कोण ज्ञात कर लें। ‘अ’ स्थान पर विभिन्न वस्तुओं के कोण ज्ञात कर लें। ‘अ’ और ‘ब’ की दूरी को नाप लें और उसे एलोयन करें। ‘ब’ स्थान से भी ‘अ’ से ज्ञात किये गये ऑब्जेक्ट्स के कोण ज्ञात करें। ‘ब’ के कोण बैक वियरिंग कहलायेंगे। यही प्रक्रिया ‘स’, ‘द’ आदि से भी अपनाते चलें। ‘अ’ और ‘ब’ केन्द्रों से लिये गये कोण और बीच की दूरी को कागज पर प्लाटिंग करे...

डूबने (Drawning) से प्राथमिक चिकित्सा कैसे करें

डूबने (Drawning) से प्राथमिक चिकित्सा कैसे करें डूबना (Drawning)- डूबने की घटनाएं आये दिन होती रहती हैं। प्रत्येक स्काउट/गाइड को डूबते को बचाने की कला आनी चाहिए। बचाने वाले को तैरने का अच्छा अभ्यास हो। कभी-कभी डूबता व्यक्ति बचाने वाले पर इस प्रकार लिपट जाता है कि उसे भी डुबा सकता है। अतः ऐसी स्थिति में अपने को तुरन्त छुड़ा लेना चाहिए। अपने को सदैव उसके पीछे रखें । डूबते व्यक्ति को चित्त कर उसकी कुहनी या गर्दन के पीछे पकड़कर स्वयं भी पीठ के बल तैरना चाहिए। यदि बचाव दल पास में हो तो जीवन रक्षक डोरी का प्रयोग किया जा सकता है। डूबते हुए व्यक्ति के पेट में पानी भर जाने की स्थिति में उसका उपचार करें। उसे रेत पर औंधा मुंह कर लिटा दें तथा पानी बाहर निकालने का अभ्यास शुरु करें। अचेतावस्था में उसे कृत्रिम सांस दें । कृत्रिम सांस-देते समय देख लें कि उसकी जीभ गले में न अटक जाये। सदमे का इलाज करें तथा डॉक्टर को बुलायें।