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Showing posts from May, 2021

मानचित्र (Maps) के कितने प्रकार होते हैं ?

मानचित्र (Maps) “किसी चौरस सतह पर समस्त पृथ्वी अथवा उसके किसी अंश का सानुपातिक चित्रण मानचित्र कहलाता है।” “A Map is a proportionate representation of the whole or part of earth’s surfece on a flat sheet of paper” Cartography- (मानचित्र विज्ञान)-मानचित्रों एवं अन्य भौगोलिक उपकरणों की रचना संबंधी ज्ञान देने वाली विद्या को मानचित्र विज्ञान कहते हैं। Map making was started 4000 Years back. मानचित्र बनाना, लिखना सीखने से पहले प्रारंभ हुआ, जब मनुष्य जंगली अवस्था में था उस समय संकेतों चिहों द्वारा मार्ग दर्शन करता था। रेड इण्डियन ऐंजटिक तथा एस्कीमों ने सर्वाधिक मानचित्र बनाये। ग्रीक के निवासी आधुनिक मानचित्र के निर्माता कहलाते हैं। इनमें यूरेटिस्थनीज तथा टॉलमी मुख्य थे । मध्य युग में 15वीं शताब्दी में व्यापार, यातायात, उद्योग आदि के विकास से मानचित्र कला की उन्नति हुई। स्कूल स्थापित किये गये-जिसमें 1. एटलियन, 2-फ्रेंच, 3-डच, 4- इंगलिश, 5-जर्मन प्रमुख थे। भारत में मानचित्र कला का विकास 5000 वर्ष पुराना माना जाता है। भारतीय व्यापारी नौकाओं तथा जलयानों द्वारा दूसरे देशों ...

स्काउट आन्दोलन का विश्व संगठन (WOSM) के बारे में जानकारी

स्काउट आन्दोलन का विश्व संगठन (WOSM) के बारे में जानकारी स्काउट आन्दोलन का विश्व संगठन एक अंतर्राष्ट्रीय, अशासकीय संगठन है जिसके निम्नलिखित तीन अंग हैं। 1. विश्व स्काउट सम्मेलन (World Scout Conference) 2. विश्व स्काउट समिति (World Scout Committee) 3. विश्व स्काउट ब्यूरो (World Scout Bureau) 1. विश्व स्काउट सम्मेलन -यह स्काउटिंग का सामान्य सदन है। विश्व संगठन का यह प्रशासकीय अंग है। विश्व के सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि इसके सदस्य होते हैं। प्रत्येक तीन वर्ष में इसकी सभा होती है। किसी भी देश का केवल एक संगठन ही मान्य होता है। राष्ट्रों के अधिकतम 6 सदस्य प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। पंजीकृत देशों के अन्य दर्शक भी सम्मेलन में भाग ले सकते हैं। सम्मेलन का उद्देश्य है -विश्वभर के स्काउट आन्दोलन में एकता, अखण्डता, और प्रगति को प्रोत्साहित करना है, यह निम्नप्रकार प्रतिपादित किया जाता है। * सदस्यों के बीच विचारों का आदान-प्रदान करने की सुविधा देना। • सामान्य नीति निर्धारण करना। • विश्व स्काउट समिति और सदस्य संगठनों से प्राप्त रिपोट और सिफारिशों को स्वीकार करना। * विश्व संगठन के वे सभी वैधानिक कार्...

गर्मी लगने (Heat Exhaustion) और लू लगने (Sun-Stroke) से कैसे बचें

लू लगना (Sun-Stroke) ) हमारे शरीर का तापमान लगभग 36.7° सेन्टीग्रेड या 98.4 फौरनहाइड रहता हैं। ग्रीष्म ऋतु में जब अत्यधिक गर्म हवायें चलने लगती है जिनमें नमी कम हो जाती है और तापमान 37.2 से. या 99° फैरनहाइट से अधिक हो जाता है तो धूप में चलने से व्यक्ति का तापमान भी तीव्रता से बढ़ जाता है। रोगी को थकावट, सिरदर्द, जी मचलाना, गिर पड़ना आदि लक्षण होते हैं । अतः ऐसे रोगी को ठंडे स्थान पर पीठ के बल लिटा दें। अनावश्यक वस्त्र उतार दें। रोगी के शरीर पर पानी का छिड़काव करें। सिर थोड़ा ऊँचा रखें। धड़ के ऊपर गीले तौलिये से बार-बार शरीर पोछे। सीने व पीठ पर गीली पट्टी रखें। कच्चे आम को भूनकर पानी पिलायें। नींबू की शिंकजी, प्याज का रस और पुदीने का पानी भी पिलाया जा सकता है। गर्मी लगना (Heat Exhaustion) गर्मी के दिनों में भीषण गर्मी के कारण यह स्थिति बनती है। चित कपड़े न पहनने, गर्म बन्द कमरे में जहाँ हवा का आगमन न हो अथवा आदमियों से भरे कमरे या गाड़ी में, ताजी हवा न मिलने वाली जगहों में काम करने वाले मजदूरों, सफर में जाने या परेड में उपस्थित होने वाले सिपाहियों को अधिकतर गर्मी लगने की शिकायत रहती है।...

मानचित्र कैसे बनाया जाता है और कैसे सेटिंग कि जाती है ?

मानचित्र बनाना मानचित्र बनाने में मुख्यतया तीन बातों का उल्लेख आवश्यक है- 1. दिशा (Direction) 2. दूरी (Distance) 3. विवरण (Details)। सर्वप्रथम उत्तर दिशा दशांना आवश्यक है जिसे कम्पास से अंकित किया जा सकता हैं। तत्पश्चात् मापनी (Scale) को दाना चाहिए। मापक के अनुसार समस्त विवरण परम्परागत् चिहाँ से अंकित करना चाहिए। यदि कम्पास से कोण (Bearing) लिए गये हों तो उनके अनुसार वस्तुएं अंकित करें। मानचित्र बनाने से पूर्व भी कुछ आवश्यक कार्य करें। जिस क्षेत्र का भूमापन करना हो उसके बीचों बीच या किसी ऊंचे स्थान पर खड़े होकर आवश्यक दृश्यों का अवलोकन कर लें। तत्पश्चात् क्षेत्र की सीमा (Boundry) निर्धारित कर एक काल्पनिक मानचित्र तैयार करें। जिन वस्तुओं को मानचित्र में अंकित करना है उनकी कोणिक दूरी (Bearing) ले लें अथवा समतल पटल (Plain Table) पर किरणें (Rays) अंकित कर लें। Map Setting – मानचित्र की उत्तर-दक्षिण दिशा को भूमि से मिलान करना मानचित्र-स्थापन कहलाता हैं। मानचित्र पर बनी किसी स्थायी वस्तु से भी Map Setting की जा सकती है। जहां आप खड़े हों वहां से वस्तु की ओर को मानचित्र पर रेखा खींच लें। ...

स्काउट में बिना बर्तन भोजन कैसे बनायें

मनुष्य जीवन में कभी ऐसी भी स्थिति आ जाय कि उसके पास मात्र कुछ राशन जैसे-आटा, चावल, दाल, आलू, प्याज, बैंगन, नमक हो किंतु कोई पकाने का बर्तन न हो तो क्या वह बिना कुछ खाये सो जाऐगा ऐसी स्थिति फौज में अथवा पर्वतरोहण में आ जाती है। प्राचीन काल में तो शिकारी अपने शिकार की खोज में जंगलों में भटक जाते थे और उन्हें किसी सुरक्षित स्थान जैसे ऊँची चट्टान या पेड़ पर रात गुजरानी पड़ती थी। ऐसी स्थिति में शरीर में ऊर्जा बनाये रखने के लिये भोजन आवश्यक हो जाता है। स्काउट/गाइड बिना बर्तनों के भी अपना खाना तैयार कर लेते हैं और पर्याप्त भोजन पा लेते हैं। बिना बर्तन के वे देश-काल-परिस्थितियों का अवलोकन कर संसाधन जुटा लेते हैं अथवा किसी पत्थर को साफ कर उस पर आटा गूंथ लेते हैं। अब कोई ऐसी लकड़ी जैसे बांस या फलदार अथवा जिससे कोई नुकसान न हो, ऐसी लकड़ी को छीलकर, धोकर उसमें आटे की लम्बी लड़ बनाकर उस लकड़ी पर लपेट कर जली हुई आग पर पका लेते हैं। उसे घुले पत्तल में रखते जाते हैं। आलू को कोयलों में पकाकर उसका बाहरी छिलका हटाकर नमक डाल कर सब्जी के रूप में खा सकते हैं राजस्थान की बाटी और चूर्मा प्रसिद्ध भोज्य पदार्थ ह...

जी. पी. एस. द्वारा मानचित्र मार्ग का अनुसरण कैसे करते हैं ?

जी. पी. एस. द्वारा मानचित्र मार्ग का अनुसरण करना वैश्विवक स्थितिक व्यवस्था (Global Positioning System) इस तंत्र का आविष्कार रोजर एल. एस्टन, इवान ए. गेटिंग और ब्रॉड फोर्ड परकिंसन तीन अमेरिकनों ने 1973 में किया, 1978 में इसे लॉन्च किया गया और 1995 से यह पूर्णतया सफलता पूर्वक कार्य करने लगा। इस व्यवस्था में अंतरिक्ष से किसी कुशल चालक (मल्लाह, पानी के जहाज चालक, वायुयान चालक, अन्य प्रकार के वाहन चालक) द्वारा अपनी स्थिति को जानना संभव होता है। यह व्यवस्था हर मौसम में कार्यशील रहती है। इस व्यवस्था से किसी भी वाहन या व्यक्ति की स्थिति जानी जा सकती है। इस व्यवस्था में सेटेलाइट से किसी भी स्थान का वास्तविक मानचित्र प्रसारित किया जाता है। यह एक ऐसा ऐप है जिसे कोई भी व्यक्ति अपने मोबाइल में अपनी स्थिति को जान सकता है। इसमें उत्तर दिशा, दूरी, परपंरागत चिन्ह, कन्टूर आदि को भी दर्शाया रहता है। जी.पी.एस. मानचित्र आजकल मोबाइल में तरह-तरह के डिजिटल मानचित्र दिये गये है जो कि ग्लोबल पोजीशनिंग सिस्टम द्वारा संचालित होते है। मोबाइल में मैप एप्लीकेशन खोलने पर वो आपकी वास्तविक स्थिति को मैप में दिखाता है ...

वाहन-दुर्घटना पर क्या करें ?

वाहन-दुर्घटना – वाहन दुर्घटना में तुरंत पुलिस को सूचित करें। वाहन के अंदर फंसे व्यक्तियों को बाहर निकालें। वाहन की चपेट में आने पर घायल व्यक्ति को आवश्यकतानुसार प्राथमिक सहायता दें। यदि पुलिस के आने में देरी हो तो किसी अन्य वाहन से घायल को पास के चिकित्सालय में पहुँचायें, सम्भव हो तो घायल व्यक्ति के परिजनों को सूचना दें।

कपड़ों पर आग लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे करें

कपड़ों पर आग लगना- किसी के कपड़ों पर आग लग जाय तो व्यक्ति को पर को तुरंत भूमि पर लिटा दें। कम्बल या मोटे कपड़े से ढक दें। जिस व्यक्ति के वस्त्रों आग लगी हो, वह इधर-उधर भागे नहीं वरन् जमीन पर लेट कर पल्टी मारे ताकि आग को ऑक्सीजन न मिल सकें। अधिक घायलावस्था में तुरंत चिकित्सक दिखायें अथवा चिकित्साालय पहुँचायें।

स्काउट में झोली (Sling) के प्रयोग

झोली (Sling) हाथ, हथेली या भुजा को सहारा देने, उसे हिलने-डुलने से रोकने के लिये झोली का प्रयोग किया जाता है। झोली का प्रयोग निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है – बाजू की झोली (Arm Sling) -बाजू के अग्रभाग और हाथ को सहारा देने के लिए इस झोली का प्रयोग किया जाता है। बाजू- झोली लगाने हेतु रोगी के सामने खड़े हो जाइये, कन्धे के ठीक बाले हिस्से के ऊपर फैली हुई तिकोनी पट्टी का एक सिरा रखिये तथा पट्टी के शीर्ष (Point) वाले सिरे को चोट वाले हिस्से की ओर रखिये, अब आहत भुजा को पट्टी के ऊपर समकोण में मोड़ कर आहत कन्धे पर दोनों सिरे लेकर डॉक्टरी गाँठ लगा दें; शीर्ष को मोड़ कर सेफ्टी पिन लगा दें। कॉलर और कफ स्लिंग (Collar&cuff Sling) -कलाई को सहारा देने के लिये इस झोली का प्रयोग होता है। इसे लगाने के लिये रोगी की कुहनी को मोड़कर स्वस्थ कन्धे के पास अंगुलियाँ रखें। कलाई पर संकरी पट्टी से बूंटा फॉस लगायें तथा आहत भुजा की ओर के कन्धे पर हंसली की हड्डी के निकट के गड्ढे में डॉक्टरी गाँठ लगा दें। तिकोनी झोली Triangular or St. John’s Sling) – इस झोली का प्रयोग हाथ को ऊपर उठाये रखने तथा हं...

घायल व्यक्तियों को कैसे सुरक्षित स्थान में पहुँचाना होता है ?

घायल व्यक्तियों को पहुँचाना किसी घायल को सुरक्षित स्थान में निम्नलिखित विधियों से ले जाया जा सकता है:- (क) एक ही सहायक से सहारा देकर। (ख) हस्त आसन (Hand Seats) पर। (ग) बैसाखी पर (Stretcher)। (घ) पहिए वाली गाड़ी पर (Wheeled Transport) । भेजने के ढंग या ढंगों का निर्णय निम्नलिखित बातों पर किया जायेगा:- (क) चोट की दशा। (ख) चोट की भीषणता। (ग) उपलब्ध सहायकों की संख्या। (घ) जाने वाले मार्ग की दशा। प्रथमिक सहायता उपचार के उचित उपचार के बाद निम्नलिखित सिद्धांतों को ध्यान में रखना चाहिए:- (1) रोगी जिस आसान में हो या जिस स्थिति में रखा जाए उसे अनावश्यक न बदलिए। (2) रोगी को ले जाते समय निम्नलिखित बातों पर ध्यान अवश्य रखना चाहिए। (क) रोगी की साधारण दशा। (ख) कई मरहम पट्टी इत्यादि जो बांधी गई हो। (ग) रक्त स्त्राव का पुनः होना। (3) रोगी को ले जाने का कार्य अवश्य सुरक्षित, सधा हुआ तथा शीघ्र होना चाहिए। वाहकों द्वारा उठाना (प्रथम गति) दो वाहकों द्वारा उठाना (द्वितीय गति) जब घायल को उतार रहे हों तो उसका सिर सबसे आगे बैसाखी के सिर के ऊपर उठा कर ले जाएँ।

स्काउट में सांठ (Splices)

सांठ (Splices) आई स्पलाइस (Eye Splice ) यह सांठ स्थायी फन्दा बनाने में उपयोगी, सुन्दर व मजबूत रहती है। ध्वज की रस्सी (Guy Rope) का आइलैट (Eyelet) बनाने आदि में यह उपयोगी है। विधि- रस्सी के जिस छोर पर नेत्राकार सांठ बनानी हो उस सिरे की लड़ों को थोड़ा-सा खोलकर आवश्यकतानुसार लूप (Loop) बना लें तथा स्थिर भाग की लड़ों के अन्दर एक के बाद एक लड़ इस प्रकार गूथ लें कि प्रत्येक लड़ एक के बाद एक लड़ में जकड़ जाये। बैक स्पलाइस (BackSplice) क्राउन नॉट की भाँति पहली गाँठ लगायें, अब रस्सी की ओर प्रत्येक लड़ को क्रमशः फँसाते हुए चार-पाँच बार करते चलें। शार्ट सपलाइस (Short Splice )- इस सांठ का प्रयोग दो रस्सियों को आपस में जोड़ने या किसी रस्सी के कमजोर भाग को मजबूती देने के लिये होता है. विधि- इसमें रस्सी के दो सिरों की लड़ों को थोड़ा-सा खोल कर दोनों ओर धागा बांध देना चाहिए ताकि वे अधिक न खुलें। अब जिस तरह दोनों हाथों की अंगुलियों को आपस में एक दूसरे में गूंथा जा सकता है, उसी प्रकार लड़ों को एक दूसरे में फंसा दें। अन्त में हाथ से मथ दें।

स्काउट के प्रथम सोपान की फान्सें

गांठ और फॉस में अन्तर यह है कि गाँठ में रस्सी का ही प्रयोग होता है जबकि फॉस में रस्सी को किसी अन्य वस्तु जैसे-खम्भे, पेड़, लाठी आदि से बाधा जाता है। स्काउट के प्रथम सोपान की फान्सें क्लोव हिच (खूटा फांस):  इसे नाग फांस, छप्पर फांस या छनबन्द भी कहते हैं। यह फांस छप्पर बांधने, पुल बनाने, सीढ़ी या मचान तैयार करने तथा पशुओं को खूटे से बांधने में काम आती है। विधि : रस्सी को इस प्रकार पकड़ें कि उसका बड़ा भाग बांये हाथ में तथा छोटा भाग दांये हाथ में रहे।अब दाहिने हाथ से किसी खम्भे के चारों ओर रस्सी का चक्कर लगा दें। फिर दूसरा चक्कर पहले चक्कर के नीचे सेक्रास करते हुए लगाएं। दोनों चक्करों के बीच में रस्सी केदाहिने सिरे को डालकर दोनों सिरों को खींच देने से गांठ तैयार हो जाएगी। फिशरमैन्स नॉट (मछुआरा गांठ):-  फिसलने वाली रस्सियों को जोड़ने में मछुवा गाँठ का प्रयोग होता है। यदि किसी वस्तु जैसे लोटे को लटकाना हो तो सादी गाँठ के मध्य में उसे फंसा देने पर लोटा फाँस कहलाती है। रस्सी के दोनों सिरों अथवा अलग-अलग रस्सियों के एक-एक सिरे पर उन्हें समानान्तर जोड़कर प्रत्येक तरफ से एक सादी गाँठ लगा दें और ...

रस्सी के सिरे सुरक्षित करना (Whipping)

रस्सी की जानकारी रस्सी, स्काउट/गाइड का एक अच्छी मित्र है। अतः उसका सम्पूर्ण जानकारी होना उनके लिये अत्यावश्यक है। रस्सी-सूत, जूट, नारियल, नायलॉन, तार, टेरिलीन, सन आदि की बनती है। किन्तु सन की रस्सी मजबूत व कोमल होती है। रस्सी को फीट या फेदम में नापा जाता है। रस्सी की परिधि से उसकी मोटाई 3″ तीन ईंच आंकी जाती है अर्थात् मोटी रस्सी वह कहलाती है जिसकी परिधि 3″ और व्यास 1” हो।।” से कम की परिधि की रस्सी को लड़ी(String or Cord) कहा जाता है। 3′ की रस्सी की मजबूती (Safe Working Load /SwL) होगी 2×3-18 CWTS प्राकृतिक रेसों (Natural Fibres) को किसी एक दिशा में बट देने पर धागा (Thread) तथा धागों को विपरीत दिशा में बट देने से लड़ें (Stand) बनती हैं और लड़ों को बटकर रस्सी (Rope) बनती है। साधारणतया रस्सी तीन प्रकार की होती है। 1. दुलड़ी रस्सी (Double laid) दो लड़ें बट कर। 2. तिलड़ी रस्सी (Howser) तीन लड़ें बट कर। 3. चौलड़ी रस्सी (Shround) चार लड़ें एक साथ बटकर किसी रस्सी के दो सिरे होते हैं- चुस्त सिरा (Running end) तथा सुस्त भाग (Standing Part) । चुस्त सिरा क्रियाशील रहत...

खेल व उनके प्रकार

खेल व उनके प्रकार खेलना बच्चे की जन्मजात प्रवृति है। खेलों से उसका शारीरिक, मानसिक व चारित्रिक विकास होता है। खेलों से बच्चों में अनेक सद्गुणों का विकास होता है. जैसे-उत्तम स्वभाव, खिलाड़ी भावना का विकास, एकता की भावना, सहनशीलता. अनुशासन, निःस्वार्थ भाव, नियमों का पालन करने की क्षमता, आत्म-नियंत्रण, नेतृत्व शक्ति का विकास आदि। स्काउट/गाइड शिक्षा भी एकखल है। खेल-खेल में स्काउट/गाइड जीवनोपयोगी अनेक बातें सीख जाते हैं। खेलों में मनोरंजन और शिक्षा का ऐसा सामंजस्य रहता है कि, स्काउट/गाइड उनमें आनन्द की अनुभूति प्राप्त करते हैं। स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडन पावेल ने भी स्काउटिंग को एक खेल, किन्तु शैक्षिक खेल कहा है। अतः स्काउट/गाइड शिक्षा में खेलों का एक विशिष्ट स्थान है। खेलों को अनेक श्रेणियों में बांटा जा सकता है। जिनमें से निम्नलिखित प्रमुख है : 1. सामान्य या दल के खेल (General or Troop Games) – दल में चुस्ती व फुर्ती लाने के लिये प्रारम्भ में ऐसे खेल को खिलाया जाता है। इससे उनमें अनुशासन आता है। प्रत्येक सदस्य को ऐसे खेल में भाग लेने का अवसर प्राप्त होता है। इस श्रेणी में सं...

मान सभा की कार्यवाही नमूना

मान सभा की कार्यवाही नमूना आज दिनांक………………की पूर्वान्ह/अपरान्ह……………………बजे स्थान…………………….पर श्री/कु…………. …की अध्यक्षता में……………………….दल/ कम्पनी की बैठक सम्पन्न हुई जिसमें उपस्थिति इस प्रकार रही- 01. 02. 03. 04. 05. 06. 07. 08. 09. 10. पारित प्रस्ताव पिछली कार्यवाही का वाचन एवं पुष्टि प्रस्ताव सं. 1 दल कम्पनी सचिव श्री/कु….ने दिनांक…. की कार्यवाही का वाचन किया। निम्नलिखित कार्यों सफलता पूर्वक सम्पन्न कर लिये जाने पर प्रसन्नता व्यक्त की गई। 1.. 2. 3. निम्नलिखित अपूर्ण या पूर्ण आंशिक कार्यों को अविलम्ब पूरा करने का संकल्प लिया गया। प्रस्ताव सं.2 वार्षिक कार्यक्रम बनाने पर विचार :- चूंकि वर्षभर के लिये कार्य-नियोजन करना किसी दल/कम्पनी की सफलता का परिचायक होता है। अतः माहवार सर्व-सम्मति से निम्नलिखित कार्य करना निश्चित किया गया। माह जुलाई . माह अगस्त माह सितम्बर माह अक...

स्काउट के द्वितीय सोपान में पायनियरिंग (Pioneering in Scout's second rung)

बी. पी. के अनुसार पायनियर्स वे लोग होते हैं जो औरों से आगे जाकर पीछे आने वालों के लिये जंगल या कहीं भी रास्ता ढूंढते व बनाते हैं। (Pioneers are men who go ahead to open up a way in jungle or elsewhere for those coming after them). स्काउट के द्वितीय सोपान में पॉयनियरिंग के अंतर्गत निम्न बिन्दुओं का अध्ययन की जाती है:- गाँठ-विद्या, पुल निर्माण, मचान व झोपड़ी बनाना, पेड़ गिराना, अनुमान लगाना तथा तत्सम्बन्धी उपकरणों की जानकारी .

स्काउट के द्वितीय सोपान हेतु अर्हताएँ

स्काउट के द्वितीय सोपान हेतु अर्हताएँ 1. पायनियरिंग (क्लिक करें ) :- (अ) लट्ठा फाँस(टिम्वर हिच), सरक फाँस (रोलिंग हिच), ढेकली फाँस (मारलाइन स्पाइक लीवर हिच) और अष्टाकार गाँठ (फिगर ऑफ एट) को लगा सके और उनका उपयोग जाने:- (ब) निम्नलिखित बन्धनों को लगाना और उनका उपयोग जाने:- (अ) वर्गाकार बन्धन (स्कावायर लेसिंग) (ब) अष्टाकार बन्धन (फिगर ऑफ एट लेसिंग) (स) हाथ कुल्हाड़ी (हैण्ड एक्स) या गँडासी(चोपर) का उपयोग जाने, उनके सुरक्षा के नियम जाने तथा उन्हें धार लगाना आता हो। (द) खंजर या चाकू का उपयोग, सुरक्षा और धार लगाना आता हो तथा हथौड़ी, प्लास, पेचकस का प्रयोग करना जाने:- 2.आग:- (अ) शिविर या खुले में विभिन्न प्रकार की आग(चूल्हे) की जानकारी हो, इसका उपयोग शिविर/बाहरी भ्रमण में कर सके। (ब) अधिकतम दो माचिस की तिल्लियों से खुले में लकड़ी की आग जला सके। 3. भोजन:- (अ) मिट्टी के तेल के स्टोव या गैस स्टोव के जलाने की विधि जाने। (ब) दो व्यक्तियों के लिये खुले में दो प्रकार का भोजन और चाय कॉफी बना सकें। (स) गैस लीक होने पर सुरक्षा की सावधानियां जाने। 4. कम्पास और मानचित्र:- (अ) कम्पास से सोलह दिशाओं को जाने...

स्काउट गाइड बटन लगाना और जूतों में पोलिश कैसे करें

बटन लगाना व टाँकना:- स्काउट/गाइड को अपने कपड़ों में ठीक प्रकार बटन लगाना आता हो। बटन टूट गया हो तो उसे शीघ्र टांक लेना चाहिए। कुछ बच्चे बटन टांकने के लिए भी परमुखापेक्षी होते हैं। स्वावलम्बी होने के लिए छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देना आवश्यक है। अच्छा हो घर के अन्य लोगों के बटन टांकने का दायित्व लें। जूतों में पॉलिश लगाना:- स्काउट गाइड अपने जूतों को स्वयं साफ कर पॉलिश करते हैं। पॉलिश लगाने से पूर्व किसी कपड़े से उसे साफ कर लें। पॉलिस लगाकर कुछ देर तक जूते धूप में रख दें। जिससे उसमें चमक आ जायेगी। चमकने के लिए बुश से रगड़ाई करें। यदि जूते कैनवास के हों तो उन्हें पहले साबुन से धोकर सुखा दें। तत्पश्चात् सफेद पॉलिस (पाउडर) लगायें। पुनः उसे सुखने दें तभी पहनें। अच्छा हो छुट्टी के दिन घर में सभी जूतों पर पॉलिस करें।

भारत स्काउट एवं गाइड ध्वज-शिष्टाचार की विधि (Flag Ceremony)

भारत स्काउट एवं गाइड ध्वज-शिष्टाचार (Flag Ceremony) स्काउट/गाइड अपना दैनिक कार्य ध्वज-शिष्टाचार से प्रारम्भ करते हैं। कब-बुलबुल, स्काउट/गाइड तथा रोवर्स रेंजर्स का ध्वज शिष्टाचार का अपना-अपना विशिष्ट तरीका है। स्काउट/गाइड ध्वज शिष्टाचार नालाकार (Horse Shoe Formation) में खड़े होकर किया जाता है। रैलियों व शिविरों में जहाँ संख्या बहुत अधिक हो टोली-नायक दल नायक नालाकार या सूर्य की किरणों की भाँति अर्द्धवृत्त में खड़े होते हैं। शेष सदस्य उनके पीछे खड़े होंगे। नालाकार घेरा बनाने की विधि (Horse Shoe) नालाकार में खड़े करने की इस विधि का आंकलन एक दल (24 से 32) के लिये किया गया है। समतल भूमि पर झण्डे के लिये कोई बिन्दु 0 लिया। जिस पर समकोण बनाते हुए पूर्व-पश्चिम, उत्तर दक्षिण रेखायें खींचली। 0 के ठीक पीछे 2 कदम पर A और 2 कदम पर B लिया, A और B पर एक-एक खूटी गाड़ दी। B से 8 कदम ABC बनाते हुए C लेकर तीसरी खूटी गाड़ दी। अब AC पर दुहरी रस्सी लगा दी और A से खूटी हटा कर (0 के पूर्व-पश्चिम में XY रेखा पर कस कर रस्सी से घेरा बना दिया, XYZ अभीष्ट नालाकर बन जायेगा A0 से Aकी ओर तीन कदम पर PQ रेखा खींच दी ...

शालीन-चाल, आदेश व कवायद (Orderly movement, Commands & Drill)

शालीन-चाल, आदेश व कवायद (Orderly movement, Commands & Drill) व्यक्ति की परख उसके पहनावे, उठने-बैठने, चलने-फिरने तथा बोलचाल से आसानी से हो जाती है। जिन लोगों की शिक्षा अनुशासन पूर्ण वातावरण में होती है उनका चाल-चलन पहनावा तथा व्यवहार शालीन होता है। स्काउट/गाइड संगठन पूर्ण वेश में होने, चुस्ती व फुर्ती से उठने, बैठने, चलने से उनमें जीवटता बनी रहती है एक अनुशासित तथा निश्चित गणवेश धारी संगठन है। स्काउट/गाइड के ठीक व तथा देखने वाले भी उनकी ओर आकर्षित होते हैं। फलस्वरूप वे सुयोग्य नागरिक की श्रेणी में अपना स्थान बना लेते हैं, जिससे स्काउट संगठन की छवि में भी निखार आ जाता है। अतः प्रत्येक स्काउट/गाइड को ठीक प्रकार खड़े होने, बैठने, चलने का ढंग आना चाहिए । जब खड़े हों तो दोनों पैरों में बराबर वजन रहे, बैठे हों तो पालथी मार कर बैठें। किसी बड़े से बात करें तो ‘सावधान’ की स्थिति में खड़े हों। भूमि पर अथवा कुर्सी पर बैठे हो तो धड़ सीधा कर बैठें। चलते समय सीना उठा हो तथा शरीर सीधा रहे। आदेश व कवायद से स्काउट/गाइड में उक्त गुणों का समावेश स्वयमेव हो जाता है। अतः स्काउट गाइड को आदेश-प...

विश्व स्काउट-बैज (World Scout-Badge )

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विश्व स्काउट-बैज (World Scout-Badge ) सिम्बल (Symbol) शब्द ग्रीक भाषा के ‘Symbolon’ शब्द से लिया गया है जिसका अर्थ होता है Token या Pledge. बैज या प्रतीक का कोई गूढ़ अर्थ अवश्य होता है, जैसे कनाड़ा के स्काउट बैज के तीन शीर्ष-नियम, प्रतिज्ञा, सिद्धान्त साथ ही साथ ईश्वर के प्रति कर्त्तव्य, दूसरों के प्रति कर्त्तव्य तथा स्वयं के प्रति कर्त्तव्य के द्योतक हैं. प्रतीक या बैजों का प्रचलन आदिकाल से होता आ रहा है। बैजों से पद की जानकारी होती है, फौज तथा पुलिस में बैजों से यह कहा जा सकता है, कि अमुक व्यक्ति किस पद का है। स्काउट/गाइड तथा स्काउटस/गाइडर्स और अन्य अधिकारियों के पद/स्तर की पहचान उनके द्वारा धारण किये पदकों/बैजों से की जा सकती है। World Scout Flag (Design and Importance) स्काउटिंग के प्रारंभिक वर्षों में बी. पी. ने जब स्काउट बैज को तैयार किया तो लोगों में उसके बारे में भ्रान्तियां और प्रतिक्रियाएं हुई। उन्होंने इस बैज को भाले की नोक जैसा (A spear head) तथा युद्ध और खून खराबे वाला (the emblem of battle and bloodshed) कहकर आलोचना की। बी. पी. ने इसके प्रत्युतर में कहा नहीं ...

राष्ट्र-ध्वज फहराने के नियम

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राष्ट्र-ध्वज (National Flag) “राष्ट्र-ध्वज” किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के गौरव का प्रतीक है। प्रत्येक राष्ट्र का अपना एक ध्वज निर्धारित होता है जिसकी आन-मान-मर्यादा पर मर मिटने के लिए उसके नागरिक सदैव तत्पर रहते हैं। ध्वज अपने राष्ट्र के सम्मान का द्योतक है। हमारे राष्ट्र का वर्तमान ध्वज (तिरंगा) अपने में एक इतिहास संजोये है। सन् 1857 में हरा झण्डा था जिस पर रुपहला सूरज बना था। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और नाना धुन्धपन्त इसी झण्डे के तले लड़े थे। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा सन् 1905 में इंग्लैण्ड में श्याम जी कृष्ण वर्मा और मैडम कामा के सुझाव पर यहां पढ़ने वाले छात्रों ने तीन रंग लाल-सफेद-हरा; लाल पट्टी पर आठ प्रान्तों के प्रतीक आठ तारे, सफेद पट्टी पर वन्देमातरम् तथा हरी पट्टी पर दायीं तरफ सूरज, बांयी तरफ चाँद बना ध्वज स्वीकार किया। सन् 1916 में डॉ. एनीबेसेन्ट (आइरिश महिला) ने होमरूल का आन्दोलन चलाया तथा जेल में लाल और हरे रंग की नौ पट्टियों का झण्डा फहराया, जिनमें ऊपर की चार पट्टियों पर यूनियन जैक तथा शेष पाँच पट्टियों पर सप्तऋषि मण्डल बनाया। दोनों रंग हिन्दू और मुस्लिम एकता के प्रतीक थे। सन...

स्काउट/गाइड का राष्ट्रीय एकता में योगदान

हमारा देश विविधताओं का एक मिसाल है। इन विविधताओं में एकता को मैदानी भूभाग प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्न प्रकार हैं:- 1. भौगोलिक संरचना – पर्वत, पठार, मैदान तथा तटीय मैदान के मानव का भौगोलिक परिवेश भिन्न होने से उसके विचारों, कार्यों एवं विकास में भिन्नता आ जाती है। प्रकृति की गोद में पला व्यक्ति सादगी, ईमानदारी, परिश्रमी, सीधे स्वभाव का होता है। जीविकोपार्जन के लिए उसे कठोर परिश्रम करना पड़ता है जबकि कृषि, उद्योग, यातायात, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण उसका जीवन पर्वत की अपेक्षा सहज होता है। अतः दोनों के रहन-सहन, खान-पान और विचार-विकास में भिन्नता आ जाती है। 2. धार्मिक अन्ध विश्वास – इस देश में विश्व के लगभग सभी प्रमुख धर्मों के अनुयायी निवास करते हैं। हिन्दू, बौद्ध, जैन, सिक्ख, इस्लाम, ईसाई, पारसी आदि धर्मों के अनुयायी अपने धर्म को श्रेष्ठ और दूसरे धर्मों को हेय मानते हैं जिससे धार्मिक उन्माद बढ़ता है और साम्प्रदायिक एकता को ठेस लगती है। 3. भाषावाद – असंख्य भाषाओं का यह देश है जहां अंग्रेजी, उर्दू, हिन्दी, डोगरी, पंजाबी, गुजराती, मराठी, तमिल, मलयालम, कन्...

स्काउट में बांया हाथ कब और क्यों मिलाते हैं ?

बांया हाथ मिलाना (Left Hand Shake) स्काउट/गाइड एक दूसरे से बांया हाथ मिलाते हैं। बी. पी. ने इस विचार को अफ्रीका की ‘अशांती’ जाति के सरदार ‘प्रम्पेह’ से ग्रहण किया था। प्रम्पेह ने 1874 में उसके पूर्वजों से हुई सन्धि को उसने नहीं माना। अतः उसे वश में करने का कार्य बी. पी. को सौंपा गया। बी. पी. ने अपनी युक्ति, बुद्धि, कौशल और साहस से उसे बन्दी बना लिया। जब उसे बी. पी. के सम्मुख लाया गया तो उसने अभिवादन के लिए अपना बांया हाथ आगे बढ़ाया, इसका रहस्य पूछने पर उसने कहा कि उनकी जाति में सबसे बहादुर योद्धा (बहादुरों में बहादुर) अपने मित्र से बांया हाथ मिलाता है, जिसका तात्पर्य है, उनके पास कोई शस्त्र नहीं है और वह प्रगाढ़ दोस्ती का प्रतीक है। इस घटना से प्रभावित होकर बी. पी. ने स्काउटिंग में बांया हाथ मिलाने की प्रथा को लागू करना तय किया। कब और क्यों मिलाते हैं ? स्काउट-गाइड परिवार के लोग आपस में मिलते समय सैल्यूट के साथ- साथ बांया हाथ मिलाते हैं । इसके निम्र कारण हैं   1. स्काउट-गाइड आंदोलन में बांया हाथ मिलाने की प्रथा का प्रुचलन एक रोचक घटना से जुड़ा हुआ है। दक्षिणी ...

तपेदिक (Tuberculosis) के बारे में जानकारी

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तपेदिक (Tuberculosis) के बारे में जानकारी तपेदिक (Tuberculosis) , क्षयरोग या टी.बी. एक आम और कई मामलों में घातक संक्रामक बीमारी है जो माइक्रोबैक्टीरिया (सूक्ष्म जीवाणु), आमतौर पर माइक्रोबैक्टीरियम लेकिन यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह हवा के माध्यम तपेदिक के विभिन्न प्रकार की वजह से होती है। जो फेफड़ों पर हमला करता है, से तब फैलता है जब वे लोग जो सक्रिय टी.बी. (क्षय रोग) संक्रमण से ग्रसित है। खाँसी, छींक या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं। ऐसा माना जाता है कि दुनिया की आबादी का एक तिहाई एम तपेदिक से संक्रमित है। नये संक्रमण प्रति सेकण्ड एक व्यक्ति की दर से बढ़ रहे है। एक अनुमान के अनुसार 2007 में विश्व में 13.7 मिलियन जटिल मामले सक्रिय थे हुइ जबकि 2010 में लगभग 8.8 मिलियन नये मामले और 1.5 मिलियन संबंधित मौते जो अधिकतर विकासशील देशों में हुई थी। सक्रिय तपेदिक का निदान रेडियोलॉजी (छाती का एक्स-रे) के साथ-साथ माइक्रोस्कोपिक जाँच तथा शरीर में तरलों की माइक्रोबायोलॉजिकल कल्चर पर निर्भर करता है। भीतरी या छिपी तपेदिक का निदान ट्यूबर क्लयू...

स्काउटिंग में आग बुझाने की कला

आग बुझाना आग बुझाने से पूर्व यह जानना आवश्यक है, कि आग किन कारणों से लगी। घरों में बीड़ी या सिगरेट के जले ठुठ फेंकने, बच्चों के हाथ माचिस पड़ने, मोमबत्ती, दीपक, स्टोव, गैस चूल्हा, बिजली या पटाखों से आग लग सकती है। लकड़ी व घास पर लगी आग बुझाने के लिये पानी का प्रयोग करना चाहिए। पेट्रोल, स्पिरिट, मिट्टी के तेल, कुकिंग गैस, बिजली आदि से लगी आग बुझाने के लिए रेत अथवा रसायनिक आग बुझाने के यंत्र (Chemical Extinguishers) का प्रयोग करना चाहिए। रसायनिक आग बुझाने में भी अलग-अलग रसायन प्रयुक्त होते हैं। सोडा-एसिड-केवल घरेलू आग बुझाने में प्रयुक्त होता है। यह पेट्रोल, स्पिरिट, खनिज तेल तथा बिजली की आग बुझाने के लिए अनुपयुक्त है। कार्बन-डाइ-ऑक्साइड-बिजली की आग बुझाने के लिए उपयोगी है। फोम-टाइप-इसमें पानी, बाइकार्बोनेट आफ सोडा व फोम का मिश्रण होता है। इससे तैलीय आग बुझाई जा सकती है। कार्बन टेट्रा-क्लोराइड-मोटरकार आदि की आग बुझाने में उपयुक्त है किन्तु घर के अन्दर इसका प्रयोग कदापि नहीं करना चाहिए। कपड़ों पर लगी आग के लिये उस व्यक्ति को जमीन पर लिटाकर कम्बल या मोटे कपड़े से ढक दें। सूखी घांस पर लगी...

स्वचालित गणक मशीन (ATM) के बारे में जानकारी

स्वचालित गणक मशीन (ATM) के बारे में जानकारी स्वचालित गणक मशीन जिसे अंग्रेजी में ओटोमेटिक टेलर मशीन तथा लघु रूप में ए.टी.एम. को आटोमेटिक बैंकिग मशीन, कैश पाइंट, होल इन द बॉल, बैनकोमंट जैसे नामों से यूरोप, अमेरिका, रूस में जाना जाता है । यह मशीन एक ऐसा दूरसंचार नियंत्रित व कम्प्यूटरीकृत उपकरण है जो ग्राहकों को वित्तीय हस्तांतरण से जुड़ी सेवाएँ ATM उपलब्ध कराता है। इस हस्तांतरण प्रक्रिया में ग्राहक को कैशियर क्लर्क या बैक टैलर की मदद की आवश्यकता नहीं होती। खुदरा यानि रिटेल बैंकिंग के क्षेत्र में ए. टी. एम. बनाने का विचार समानांतर तौर पर जापान, स्वीडन, अमेरिका और इग्लैण्ड में जन्मा और विकसित हुआ। वर्तमान ए. टी. एम. मशीन इंटरनेट बैंक नेटवर्क से जुड़ा होता है। यह नेटवर्क पी यू एल एस ई, पी एल यू एस आदि नामों से जाने जाते है। इस आधुनिक युग में ए. टी. एम. का प्रयोग लोगों की दिनचर्या का अहम अंग बन गया है अत एवं ए. टी. एम. प्रयोग करते समय कुछ सावधानियाँ आवश्यक है। स्वचालित गणक मशीन का संचालन:- ए. टी. एम. के संचालन हेतु संबंधित बैंक आपको एक एटीएम कार्ड देता है। एटीएम कार्ड के साथ बैंक ग्राहक को...

स्काउट के तृतीय सोपान के दक्षता पदक

स्काउट के तृतीय सोपान के दक्षता पदक निम्नलिखित ग्रुप अ और ब से कोई दो दक्षता पदक चुनकर उत्तीर्ण करें। प्रत्येक ग्रुप से एक लेना अनिवार्य है। ग्रुप (अ) ग्रुप (ब) (1) सिविल डिफेंस (Civil Defence) (1) सिटिजन (Citizen) (2)कम्युनिटी वर्कर (Community Worker) (2) बुक बाइंडर (Book Binder) (3) ईकोलोजिस्ट Ecologist) (3) न्यूट्रिलिस्ट (Naturalist) (4) ओर्समेन (केवल स्काउट) (Darsman) (4) पथ फाइंडर (Path Finder) (5) पायनियर (Pioneer) (5) एड्स अवेयरनेस (Aids Awareness) (6) बल्ड कंजर्वेष्ठन (World Conservation ) (6) आरोग्य व्यक्ति महिला (Healthy Marwoman) (7) सेफ्टी नॉलेज (Safety Knowlege) (7) ड्रग अवेयरनेस (Drug Awareness) (8) सेल्फ डिफेंस (Self Defense) (8) बोटमेन (Boatman) (स्काउट) मेजबान (Hostess) गाइड के लिए। (9) कम्प्यूटर जागृति (Computer Awareness)

स्काउट/ गाइड सैल्यूट (Salute) कब करते हैं ?

स्काउट/गाइड सैल्यूट (Salute) स्काउट गाइड सैल्यूट आदर और विनम्रता का प्रतीक है। जो भी पहले देख ले वह सैल्यूट करता है। छोटे-बड़े का भेद किये बिना प्रतिदिन जो पहले देखते हैं वो सैल्यूट करते है। सैल्यूट देते समय दाहिने हाथ को कन्धे की सीध में ले जाकर कुहनी से इस प्रकार मोड़ा जाता है, कि तर्जनी अंगुली दायें भौंह के ऊपर मध्य भाग का स्पर्श करे। दो-तीन सेकंड रुककर हाथ आगे के छोटे रास्ते से गिरा दिया जाता है। यदि हाथ में स्टिक’ हो तो उसे बगल में दबाकर सैल्यूट किया जाना चाहिए। स्काउट लाठी दायें हाथ में हो तो भूमि से तनिक उठाकर बायें हाथ से स्काउट चिह देकर तर्जनी अंगुली से लाठी स्पर्श होगी, बायें कन्धे पर लाठी हो तो दायें हाथ की तीनों अंगुलियां लाठी को स्पर्श करेंगी। दोनों में कोई वस्तु होने पर दायें बायें देखकर अभिवादन (सैल्यूट) किया जाता है। ‘मार्च’ के अतिरिक्त सैल्यूट सावधान अवस्था में ही दिया जाता है। रैली में मार्च करते समय लीडर सैल्यूट करेगा। शेष सभी सदस्य हाथ हिलाते हुए दायें/बायें देखते हुए अभिवादन करेंगे। ‘दाहिना दर्शक’ अर्थात दर्शकों के सामने की लाइन ही दा...

भारतीय स्काउट/गाइड जम्बूरियाँ

भारतीय स्काउट/गाइड जम्बूरियाँ (स्वतंत्रता से पूर्व) पहली जम्बूरी- किंग्सवे कैम्प, नई दिल्ली-1 फरवरी से 7 फरवरी, 1937 मुख्य अतिथि- लार्ड बेडन पावेल (स्वतंत्रता के बाद) पहली जम्बूरी- हैदराबाद, 27 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 1953 मुख्य अतिथि- पं. जवाहरलाल नेहरू, प्रधानमंत्री, भारत दूसरी जम्बूरी – बनी पार्क, जयपुर, 27 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 1956 मुख्य अतिथि- गुरुमुख निहाल सिंह, महामहिम प्रथम राज्यपाल, राजस्थान तीसरी जम्बूरी- बंगलौर, 28 दिसम्बर, 1960 से 1 दिसम्बर, 1961 मुख्य अतिथि- श्रीमती ओलेव लेडी बेडन पावेल चौथी जम्बूरी- इलाहाबाद-27 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 1964 मुख्य अतिथि- श्रीमती सुचेता कृपलानी-मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश पाँचवी जम्बूरी-कल्याणी (पं. बंगाल)-27 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 1967 मुख्य अतिथि- श्री मोरार जी देसाई एवं डॉ. जाकिर हुसैन छठी जम्बूरी-आरे कॉलोनी, बंबई-27 दिसम्बर से 31 दिसम्बर, 1970 मुख्य अतिथि- डॉ. वी. के. आर. वी. राव सातवीं जम्बूरी-फरीदाबाद (हरियाणा)-7 नवम्बर से 11 नवम्बर, 1974 मुख्य अतिथि- श्रीमती इन्दिरा गांधी एवं श्री फखरूद्दीन अली अहमद आठवीं जम्बूरी- मद्रास-18 से 22 ज...

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के मूलाधार : स्काउट-गाइड के सिद्धांत

भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के मूलाधार परिभाषा- भारत स्काउट्स एवं गाइड्स नवयुवक नवयुवतियों के लिए एक स्वयं सेवी, अराजनीतिक, शैक्षिक आन्दोलन है जो वशं, जाति या धर्म के भेदभाव से परे सब के लिये समान रूप से खुला है और लार्ड बेडन पावेल द्वारा 1907 में निर्धारित उद्देश्य, सिद्धांत एवं विधियों पर आधारित है। उद्देश्य- स्काउट/गाइड आन्दोलन का उद्देश्य युवाओं के शारीरिक, बौद्धिक, सामाजिक,भावनात्मक और आध्यात्मिक विकास में मदद कर उन्हें स्थानीय, राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय समुदाय के लिए एक जिम्मेदार नागरिक बनाना है। सिद्धांत- स्काउट/गाइड आन्दोलन निम्नलिखित तीन सिद्धांतों पर आधारित ईश्वर के प्रति कर्त्तव्य:- अपने धर्म के अनुसार ईश्वर आराधना एवं तद्नुरूप आचरण करना । ईश्वर की दी हुई प्रकृति की देखभाल व उसकी प्रगति में सहायक बनना। दूसरों के प्रति कर्त्तव्यः- परिवार, पड़ोस, समाज तथा देश के प्रति अपना कर्त्तव्य करना अर्थात स्थानीय, राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय शान्ति के लिये कार्य करना, समझदारी व सहयोग से कार्य करना, लोगों के प्रति सम्मान व विश्वास का भाव जगाकर सामाजिक उन्नति में सहयोग करना। स्वयं के प्...

क्राउन नॉट (Crown Knot)

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रस्सी के सिरे सुरक्षित करना स्काउट के प्रथम सोपान में रस्सी के सिरे सुरक्षित करने की विधियाँ बताई जा चुकी हैं। यहाँ पर निम्न लिखित विधि का वर्णन किया जा रहा है क्राउन नॉट (Crown Knot) रस्सी में तीन लड़ें हों तो उन्हें थोड़ा-सा खोलकर पहली लड़ को दूसरी से, दूसरी को तीसरी से दबाते हुए पहली लड़ के अन्दर से बाहर निकालें, तीनों लड़ों को लेकर धीरे से कस दें। यही क्रम तीन चार बार अपनाएं। चौड़ी रस्सी हो तो इस प्रकार करते हुए चौथी लड़ को पहली के अन्दर कस दें।

डायगनल लैसिंग (Diagonal Lashing )-

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डायगनल लैसिंग (Diagonal Lashing )- डायगनल लैसिंग (Diagonal Lashing )- इस बन्धन का प्रयोग किन्हीं दो बल्लियों या लाठियों को कर्णवत एक साथ बांधने में होता है। जिनके तनाव विपरीत दिशाओं की ओर को हों। जैसे ऐसल के मध्य की लाठियां। दोनों लाठियों पर टिम्बर हिच लगाकर तीन बार किसी एक दिशा में लपेट लें तथा तीन बार समकोण में उनके ऊपर पुनः लपटें और अन्त में दो-तीन कसाव देकर खूटा फॉस से बन्धन समाप्त कर दें। यदि रस्सी बच गई हो तो किसी एक लाठी पर लपेट कर छूटा फाँस लगा दें।

ड्रॉ हिच (Draw Hitch)गाँठ

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ड्रॉ हिच (Draw Hitch)- ड्रॉ हिच (Draw Hitch)-ऊँचाई चढ़ने या उतरने में विशेष कर जहाँ पर रस्से को वापस खींच लेना हो, खिंच खुलनी का प्रयोग किया जाता है। विधि- रस्सी को दोहरा कर शाखा पर रखें। मोड़ के अन्दर एक सिरे का मोड़ लेकर दूसरे सिरे से कस दें। अब दूसरे का मोड़ पहले के अन्दर लेकर कस दें।

बोलाइन ऑन द बाइट Bowline on the Bite ||जीवन रक्षक गाँठ

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बोलाइन ऑन द बाइट Bowline on the Bite ||जीवन रक्षक गाँठ बोलाइन ऑन द बाइट Bowline on the Bite यह जीवन रक्षक गाँठ है। कुर्सी गाँठ की जगह इसे लिया जा सकता है। इसके भी फन्दे छोटे-बड़े होने चाहिए ताकि बड़े फंदे को पैर पर ओर छोटे को सीने पर या हाथ में पकडने के काम में लिया जा सके। इसे बनाते समय लम्बे रस्से को दोहरा करें। चुस्त सिरे को सुस्त सिरे के फंदे से बाहर निकलें अब चुस्तक सिरे को दर्शाये गये तीर की भांति लेकर छोड़ दें। अभीष्ट गाँठ बन जायेगी,

पायनियरिंग तृतीय सोपान की गांठे

पायनियरिंग तृतीय सोपान की गांठे फायर मेन्स चेयर नॉट – Fire man’s chair knot अर्थात् कुर्सी गाँठ ।  मैन हारनेस नॉट- Man harness knot घोड़े की रकाब नुमा गाँठ ।  बोलाइन ऑन द बाइट Bowline on the Bite ||जीवन रक्षक गाँठ ।  ड्रॉ हिच (Draw Hitch)गाँठ डायगनल लैसिंग (Diagonal Lashing ) क्राउन नॉट (Crown Knot)  

मैन हारनेस नॉट- Man harness knot घोड़े की रकाब नुमा गाँठ

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मैन हारनेस नॉट- Man harness knot घोड़े की रकाब नुमा यह गाँठ है। स्काउट/गाइड घोड़े में बैठने पर रस्सी के दोनों ओर पैरों के लिये इसे बना सकते हैं। पर्वतारोही मध्य के क्लाइम्बर को इस गाँठ से सुरक्षित करते हैं। किसी भारी बोझ को घसीटने में भी मध्य के लोग इस गाँठ से खींचने में सहयोग करते हैं। इसे भार वाहक गाँठ भी कहा जाता है। चित्र(A) के अनुसार रस्सी के स्थिर भाग पर एक फन्दा (लूप) बनाइये, फन्दा इस प्रकार का हो कि सीने पर आ सकें। सुस्त सिरे को पैर से दबाइये और बाएं हाथ से फन्दे को उस स्थान पर पकड़िये और बाँयं हाथ से तीर द्वारा दूसरे के नीचे से बाहर निकालिये। उसे कस दीजिए।

भारत में स्काउटिंग गाइडिंग

भारत में स्काउटिंग गाइडिंग भारत आंग्ल शासनाधीन होने के कारण ज्यों-ज्यों इंग्लैण्ड में स्काउटिंग का प्रसार बढ़ता गया, यहां भी ऐंग्लो-इण्डियन बच्चों के लिये स्काउटिंग शुरू की गई। 1909 में कै. टी. एच. बेकर ने बॉय स्काउट एसोसिएशन गठित कर बंगलौर में पहला स्काउट दल बनाया। 1910 में कै. टी. टोड, मेजर डब्लू, पी. पैकनहम, कर्नल जे. एस. विलसन, सर एल्फेड पिकफोर्ड आदि ने भी पुणे, जबलपुर, कलकता आदि में स्काउट दल खोले। 1913 में विवियन बोस ने मध्य भारत में स्काउटिंग प्रारम्भ की। 1915 में डॉ. (मिसेज) एनीबेसेन्ट तथा डॉ. अरुन्डेल ने मद्रास में इण्डियन बॉय स्काउट एसोसिएशन की स्थापना कर दल खोले । उधर 1918 में पं. मदनमोहन मालवीय के सुझाव, पर पं. श्री राम बाजपेयी ने पंडित हृदयनाथ कुंजरु के सहयोग से इलाहाबाद में बालचर सेवा समिति दल का श्री गणेश किया। बाद की मुख्य घटनाएं आगे प्रस्तुत की गई है। 1909 में क्रिस्टल पैलेस लन्दन की घटना से प्रभावित होकर बी. पी. ने 1910 में अपनी बहिन मिस एग्नेस बेडन पावेल की सहायता से गाइडिंग का श्री गणेश किया। 1911 में भारतीय संस्थाओं में भी गाइडिंग प्रारम्भ हो गई। 1912 में बी. पी. न...

बी. पी. के जीवन तथा स्काउटिंग गाइडिंग की प्रमुख घटनाएं

स्काउट का शाब्दिक अर्थ ‘स्काउट’ का शाब्दिक अर्थ है- गुप्तचर, भेदिया, जासूस। फौज में जो चुस्त, चालाक, साहसी हो, रास्ता बनाने, नदी-नालों पर पुल बनाने, संकेतों द्वारा संवाद भेजने, घायलों की प्राथमिक चिकित्सा करने तथा शत्रु की गतिविधियों का पता अपने अधिकारियों को देने का काम करते हैं उन्हें ‘स्काउट’ कहा जाता है। टीचर्स कालेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क के प्रोफेसर जेम्स ई. रसल ने लिखा है- “The Programme of boy scouts is the man’s job cut down to boy’s size. It appeals to the boy not merely because he is a boy, but because he is a man in making. टीचर्स कालेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयार्क के प्रोफेसर जेम्स ई. रसल लार्ड बेडन पावेल ने फौजी स्काउट को बालोपयोगी स्वरूप प्रदान कर उनका चरित्र – निर्माण और व्यक्तित्व का विकास करने वाली संस्था बनाया, ताकि वे एक सुयोग्य नागरिक बन सकें। इसलिये बी. पी. को स्काउटिंग का जनक कहा गया है। उनके जीवन का अध्ययन स्काउट आन्दोलन की पृष्ठभूमि है। भारत और अफ्रीका उनकी कर्मस्थली थे। अतः स्काउटिंग में यहां के अनुभव...