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Showing posts from July, 2021

मोबाइल बैंकिंग सुरक्षा हेतु ध्यान देने योग्य बातें:-

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मोबाइल बैंकिंग जब हम घर से दूर हो, और हमें अपने बैंक खाते की जानकारी या किसी परिजन दोस्त को पैसे भेजने हों या किसी तरह का बिल जमा करना हो, तो कभी भी चौबीसों घंटे विभिन्न बैंको के द्वारा मोबाइल बैंकिंग की सेवा शुरू की गई है। यह सेवा पूरी तरह सरल सुक्षित तथा सुविधापूर्ण है। जिसका उपयोग कभी भी कहीं भी किया जा सकता है। मोबाइल बैंकिग की सेवा का लाभ दो तरीकों से प्राप्त किया जा सकता है। 1. मोबाइल बैंकिंग सेवा अप्लीकेशन वैप द्वारा। 2. मोबाइल बैंकिग सेवा एस. एम. एस. (SMS) द्वारा यह सेवा वैप (WAP) के जरिये सभी मोबाइल में GPRS के साथ उपलब्ध है। साथ ही मोबाइल बैकिंग का अप्लीकेशन जावा, ब्लैकबेरी, एंड्रॉयड, आई-फोनस और विंडो मोबाइल फोन के लिए उपलब्ध है। मोबाइल बैकिंग अप्लीकेशन और वैप में निम्नलिखित सेवाएं उपलब्ध है। 1.राशि (धन) हस्तांतरण 2. तुरंत भुगतान सेवा 3. पूछताछ सेवाएँ 4. डिमेट एकाउंट सेवा 5. अनुरोध सेवाएँ 6. बिल भुगतान 7. मोबाइल, डिस टी. वी. अथवा मोवीकैश इत्यादि रिचार्ज सेवा 8. अन्य भुगतान (व्यापार भुगतान, जीवन बीमा भुगतान) Things to be noted for Mobile Banking Security मोबाइल बैकिंग सेवा एस....

मोबाइल फोन उपयोग करते समय सावधानियाँ:-

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मोबाइल फोन दैनिक संचार व्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। प्रत्येक मोबाइल फोन में बातचीत तथा संदेश भेजने की क्षमता होती है। जानकारी भेजना, मोबाइल में सुरिक्षत करना एक अभेद्य तरीका है। मोबाइल फोन से लोकेशन का भी पता चलता है। आज के आधुनिक युग में मोबाइल फोन संचार व्यवस्था का सबसे सरल सुगम साधन है जो आसानी से हर गली-मुहल्ले-चौक-चौराहे में उपलब्ध होता है। मोबाइल फोन को भ्रमणि श्रवित यंत्र अथवा सचल दूरभाष यंत्र भी कहते है। मोबाइल फोन को सर्वप्रथम 1940 में विकसित किया गया। 1908 में प्रो. अल्बर्ट झांके तथा दि ओकलैण्ड ट्रांसकौंटीनेन्टल एरियल टेलीफोन और पावर कम्पनी ने दावा पेश किया कि उन्होंने बेतार टेलीफोन विकसित किया है। मोबाइल फोन का प्रचालन कृत्रिम उपग्रह के द्वारा होता है। शुरुआत में मोबाइल फोन की सेवा टेलीफोन के रूप में विकसित होकर आज 3 जी, 4 जी तक चली गई है। शुरू में जी यानि मोबाइल टेलीफोन सर्विस (MTS) तत्पश्चात “इम्प्रूव्ड मोबाइल टेलीफोन सर्विस’ से हुई। इसके बाद एनालॉग सेल्यूलर नेटवर्क 1जी, डिजिटल सेल्यूलर नेटवर्क 2 जी, ब्राडबैंड द्वारा-3 जी तथा नेटिव आई.पी. नेटवर्क-4 जी आया। भारत के स...

हस्तकला की वस्तुएँ तथा गैजेट्स बनाना

हस्तकला की वस्तुएँ तथा गैजेट्स बनाना जनसंख्या विस्फोट तथा शिक्षा के अनियंत्रित व उद्देश्यहीन विस्तार के परिणाम स्वरूप आज देश का असंख्य युवा वर्ग बेकारी और बेरोजगारी की दहलीज पर खड़ा है। युवा वर्ग को जो शिक्षा दी जा रही है उससे वह न घर का रह गया है न घाट का, अर्थात् न तो वह पैतृक पेशे को अपना पा रहा है और नही उसे सरकारी नौकरी ही मिल पा रही है। अतः आज आवश्यकता है उच्च शिक्षा पर नियंत्रण की और युवा शक्ति को स्वरोजगार की ओर अभिमुख करने की। स्काउट गाइड शिक्षा में दक्षताएँ इसी निमित्त रखी गई हैं कि प्रत्येक बालक/बालिका आत्म-निर्भर बने। बचपन से ही हस्तकला की वस्तुएं बनाना सीखे। घर में बिजली का फ्यूज उड़ जान से हमे तब तक अन्धेरे में रहना पड़ता है जब तक कोई इलेक्ट्रिशियन न आ जाये। चाहे टी. वी. हो या पंखा, गैस का चूल्हा हा या अन्य उपकरण, तकनीशियन आने तक हम उस सेवा से वंचित रहना पड़ता है। अतः प्रत्येक स्काउट/गाइड का सामान्य कायाँ तथा छोटे-छोटे काम व मरम्मत के काम जैसे-बल्ब बदलना, ट्यूब बदलना, फ्यूज बाधना. हस्तकला की जानकारी होनी चाहिए ताकि समय और धन की बचत की जा सके हस्तकलाओं में कताई-बुनाई, सिल...

स्काउट में रात्रि खेल में भाग लेना

रात्रि खेल में भाग लेना रात्रि में खेले जाने वाले खेल रात्रि-खेल कहलाते हैं। उदाहरण के लिये टार्च का खेल ले लें, सभी खिलाड़ी एक अंधकारपूर्ण स्थल पर खड़े हो जाते हैं। दो या तीन नायक अपने पास टार्च ले लेते हैं जिसे वे अलग-अलग स्थान पर चमकाते खिलाड़ी उन्हें पकड़ने का प्रयत्न करते हैं। पकड़े जाने पर नायक उस खिलाड़ी को एक टोकन दे देता है। एक निश्चित समय सीमा के बाद सभी इकट्ठे होते हैं जिस टोली के सदस्यों के पास अधिक टोकन मिलते हैं वह अन्य टोली विजयी कहलाती है। अन्य खेलों के लिये Nature Game and Games Galore किताब देखें।

विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन (WAGGGS) के बारे में जानकारी

विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन (WAGGGS) के बारे में जानकारी विश्व गर्ल गाइड्स और गर्ल स्काउट संगठन, WORLD ASSOCIATION अंतर्राष्ट्रीय विश्व गाइड संगठन की छत्रछाया में, राष्ट्रों के सदस्य संगठनों से निर्मित है जिन्होंने सदस्यता के सिद्धांतों को स्वीकार किया हो और संस्थापक लार्ड बेडन पावेल द्वारा स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप कार्य कर रहे हैं। विश्व गाइड संगठन (WAGGGS) के निम्नलिखित तीन अंग हैं- (क) विश्व सम्मेलन (World Conference) (ख) विश्व बोर्ड (World Board) (ग) विश्व ब्यूरो कार्यालय (World Bureau) (क) विश्व सम्मेलन (World Conference) यह नीति निर्धारक अंग है। जिसकी तीन वर्ष में एक बार सभा होती है। इसमें प्रत्येक सदस्य देश के दो प्रतिनिधि होते हैं। किंतु मत एक ही होता है। सदस्यों की संख्या के अनुसार अन्य लोग भी सम्मिलित हो सकते हैं। (ख) विश्व बोर्ड (World Board) बोर्ड में 12 सदस्य चुने जाते है। जो विश्व सम्मेलन के कार्यों को कार्यान्वित करते हैं। प्रत्येक सदस्य 6 वर्ष के लिये चुना जाता है। ये 12 सदस्य अपने में से सभापति चुन लेते हैं। बोर्ड के सदस्यों में से प्रति तीन वर्ष बाद 1/3...

सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

सदमा (Shock) लगने पर प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें शरीर अथवा मस्तिष्क के आवश्यक कायों में व्याप्त उदासीनता की दशा को सदमा कहते हैं । यह रुधिर संचार व्यवस्था में अव्यवस्था का परिणाम है। कारण -आन्तरिक या बाह्य रक्त-स्त्राव, अस्थि-भंग, दबने, डूबने, जलने, झुलसने, विषपान या सर्पदंश आदि से सदमा होता है। लक्षण -रोगी ठण्ड का अनुभव करता है, शरीर ठण्डा व पसीने से तर हो जाता है। होंठ व चेहरा पीला पड़ जाता है। वह बैचेनी का अनुभव करता है, नाड़ी मंद चलती है तथा सांस तेज हो जाती है, जीभ सूख जाती है। गम्भीर सदमे की स्थिति में रोगी अचेत हो जाता है। उपचार -सर्व प्रथम सदमे का कारण जानना चाहिए। यदि रक्तस्त्राव हो रहा हो तो उसे रोकने का प्रयास करें। यदि रोगी अचेत न हो तो उसे चित्त लिटाकर सिर को शरीर के स्तर से कुछ नीचे व पैरों को ऊपर रखें। कपड़ों को ढीला कर दें और पसीना पोंछ दें। जीभ सूखने पर पूंट-घूट कर पानी या बर्फ के टुकड़े दें। रोगी को सांत्वना दें और यथाशीघ्र औषधालय पहुँचाने की व्यवस्था करें। बिजली का सदमा ( Electric Shock)- किसी व्यक्ति को बिजली का सदमा लगने पर सर्वप्रथम विद्युतधारा को अलग करें। मेन...

बेहोशी (Fainting) होने से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें

बेहोशी (Fainting) होने से प्राथमिक चिकित्सा कैसे लें बेहोशी (Fainting) – मस्तिष्क में रक्त कम पहुँचने के परिणाम स्वरूप बेहोशी होती है। कारण -थकावट का होना, भोजन की कमी, शक्ति से अधिक परिश्रम, संवेग की स्थिति में, मानसिक सदमा या भय का होना, खून का दृश्य देखकर, अपने प्रिय की दुर्घटना या मृत्यु देखकर, किसी दुर्घटना का शिकार होने पर, शरीर में रक्त कमी होने से, ऑपरेशन के समय, स्वच्छ हवा की कमी, मौसम की कठोरता व तीव्रता आदि कारणों से बेहोशी हो सकती है। लक्षण -चक्कर आना, भूमि पर गिर पड़ना, त्वचा व चेहरे का पीला पड़ना व चेहरे पर पसीना होना, सांस हल्की व मंद चलना, नाड़ी की गति धीमी व मन्द हो जाना आदि। उपचार -रोगी को पीठ के बल लिटा दें पर पैर कुछ ऊंचे रखें, कपड़े ढीले कर दें। रोगी के आस-पास भीड़ न लगने दें ताकि उसे स्वच्छ हवा मिल सके। चेहरे पर पानी के छीटें दें। यदि नमक उपलब्ध हो तो उसे सुंघायें। रोगी के ठीक होने पर उसे गर्म चाय या कॉफी दें।

एक दिन की हाइक में प्रतिभागिता

प्रकृति का आनन्द लेने या किसी स्थान का अध्ययन करने के लिये हाइक की जाती है। हाइक से अपनी शक्ति तथा कौशल को परखने का सुअवसर प्राप्त होता है। किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु हाइक की जानी चाहिए। हाइकर को भोजन पकाना, तम्बू तानना, मानचित्र व कम्पास का ज्ञान होना चाहिए। पीठ पर आवश्यक सामग्री से भरा रकसैक साथ में स्काउट कुल्हाड़ी, चाकू, कम्पास,मानचित्र, लाठी आदि अवश्य हों। हाइक में एक महत्वपूर्ण विषय है, जूता नया न हो तथा फीतेदार हो । हन्टर शू अधिक सुविधाजनक रहता है। हाइक का सबसे अच्छा समय है-प्रातःकाल या अपराहन 2-3 बज। प्रातःकाल नाश्ता कर हाइक पर जाया जा सकता है, प्रतिदिन 8 से 10 किलोमीटर चलना आनन्ददायक रहता है। सफल हाइकर को मानचित्र पढ़ना, बनाना तथा रेखाचित्र बनाना (Sketches) आना चाहिए। प्रत्येक हाइकर को हाइक का विवरण अपनी डायरी में अवश्य लिखना चाहिए। हाइक में जाने के लिये अभिभावकों की लिखित स्वीकृति ले लेनी चाहिए। समय पर उपस्थिति तथा गन्तव्य स्थल पर जाना चाहिए तथा समय पर घर लौटना भी आवश्यक है अन्यथा अभिभावक चिन्तित रहेंगे। हाइक में जाने से पूर्व सामग्री का निरीक्षण तथा उपस्थिति अनिव...

बस स्टेशन पर प्याऊ की व्यवस्था

बस स्टेशन पर प्याऊ की व्यवस्था भारत स्काउट्स एवं गाइड्स स्थानीय संस्था हल्द्वानी ने द्वितीय सोपान के स्काउट/गाइड के लिये ग्रीष्मावकाश में एक माह तक पेयजल पिलाने का शिविर निम्नलिखित सार्वजनिक स्थानों पर आयोजित करना निश्चित किया। (अ) बस स्टेशन, हल्द्वानी (ब) रेलवे स्टेशन, लालकुआँ (स) पटेल चौक, हल्द्वानी विद्यालय की मान सभा ने बस स्टेशन हल्द्वानी को चुना। अतः टोली नायकों ने स्काउटर/गाइडर के साथ बस स्टेशन का निरीक्षण किया। स्टेशन इंचार्ज से परामर्श कर स्थान का चयन किया गया। पानी के घड़े, पाइप और टिन शेड की व्यवस्था स्टेशन अधिकारी द्वारा किया जाना तय हुआ। प्रतिभागी स्काउट/गाइड की टोलियों की तिथियाँ निर्धारित की गई। पहली जून को स्टेशन अधिकारी द्वारा एक माह तक चलने वाले प्याऊ (पानी पिलाने की सेवा का विधिवत् उद्घाटन किया। इस अवसर पर स्थानीय संस्था के अधिकारी भी उपस्थिति थे। टोलियों में दो की डयूटी प्याऊ में, दो को ट्रे में ग्लास रखकर चलते फिरते पानी पिलाने का कार्य दिया गया। टोली के शेष सदस्य चार घंटे के बाद बदल दिये गये। अगले दिन दूसरी टोलीको अवसर दिया गया। यह क्रम पूरे जून माह तक चलता रहा। ...

निरीक्षण शक्ति का प्रशिक्षण (Kims Games)

निरीक्षण शक्ति का प्रशिक्षण (Kims Games) स्काउटिंग गाइडिंग में स्काउट गाइड की निरीक्षण शक्ति को बढ़ाने के लिए किम्स खेलों का सहारा लिया जाता है। अच्छे स्काउट/गाइड की एक विशेषता यह है कि उसकी निरीक्षण शक्ति तीव्र होती है। एक नजर में देखकर ही सारी सूचनायें जान लेता है। इसके लिये उन्हें निरीक्षण के खेल-आँख, नाक, कान, रसना व स्पर्श के खेल खिलायें जाते हैं। जिनका नाम स्काउटिंग में किम्स गेम दिया गया है। किम बाल ओहरा नामक, भारत में स्थित, आयरिस सेना के सार्जेन्ट का पुत्र, एक बालक था जिसके माता पिता का बचपन में ही देहान्त हो गया था। वह भारतीय बच्चों में घुलमिल गया था और वहीं की भाषा अच्छी तरह जानता था। अकस्मात् एक दिन उसे अपनी पिता की रेजिमेंट दूसरे स्थान पर जाती मिल गयी। घुस गया और पकड़ा गया। जाँच करने पर पाया गया कि वह उसी रेजीमेंट. के सार्जेन्ट का बेटा है उसे रेजिमेन्ट ने अपने अधिकार में लेकर शिक्षित किया। कुछ समय बाद मि. लार्गन मिले, जो एक प्रसिद्ध जवाहरात व्यापारी और गुप्तचर विभाग के भी सदस्य थे। मि. लार्गन ने किम को निरीक्षण में प्रवीण करने के लिये कीमती रत्नों से भरी तश्तरी एक मिनट दिख...

गाँठ-विद्या (Knoting) - फिगर ऑफ एट लेसिंग (Figure of Eight Lashing) -

फिगर ऑफ एट लेसिंग (Figure of Eight Lashing) – इस बन्धन का प्रयोग दो या तीन बल्लियों को जोड़कर तिपाही, तम्बू, झोपड़ी आदि में किया जाता है। तीन बल्लियों के सिरे अष्टाकार बन्धन से इस प्रकार बांधे कि दो बल्लियां एक ओर तथा मध्य की लाठी दूसरी ओर रखें। किनारे की लाठी पर छूटा फाँस लगा दें। अब चुस्त सिरे से लाठियों के ऊपर-नीचे इस लपेटते चले जायें कि रस्सी अंग्रेजी के आठ की आकृति बनाती चले। पाँच-छ: बार लपेटने के बाद दो-दो लाठियों के मध्य तीन-चार बार कसाव (Frapping) कर दें, अन्त प्रकार में मध्य या विपरीत लाठी पर खूटा फाँस लगा दें।

स्काउट/गाइड में कुल्हाड़ी का प्रयोग

स्काउट/गाइड में कुल्हाड़ी का प्रयोग कुल्हाड़ी स्काउट/गाइड की परम मित्र है। किसी मूर्ख व्यक्ति के हाथ में कुल्हाड़ी उसकी शत्रु हो सकती है किन्तु स्काउट गाइड उसका सदुपयोग कर गर्व का अनुभव करते हैं। एक ओर वे इसका सही प्रयोग करना सीखते हैं, दूसरी ओर इसका पर्याप्त अभ्यास कर लेते हैं। स्काउट गाइड कुल्हाड़ी का वजन लगभग 750 ग्राम तथा इसमें प्रयुक्त लाठी की लम्बाई 50 से 55 से.मी. तक होती है। कुल्हाड़ी की धार और सिरा एक सीध में होने पर सही चोट पड़ती है। मूठ ढीली होने पर पच्चड़ लगा देना चाहिए। कुल्हाड़ी की देखभाल कुल्हाड़ी की धार तेज होनी चाहिए। धार लगाने के लिये उसे एक विशेष प्रकार के पत्थर (Grinding Stone) पर वृत्ताकार चलाते हुए दोनों तरफ से रगड़ना चाहिए। कुल्हाड़ी की सम्भाल आवश्यक है। उसे चमड़े के खोल में रखना चाहिए। यदि चमड़े का खोल न हो तो उसे किसी पेड़ या खूटे पर गाड़ देना चाहिए। कुल्हाड़ी भूमि पर कदापि न फैकी जाय । स्काउट इसे अपनी पेटी पर बने निर्धारित स्थान पर लटकाते हैं। कुल्हाड़ी का आदान-प्रदान करते समय सिरा स्वयं पकड़कर दूसरों को उसकी मूळ पकड़ाई जानी चाहिए। यदि कुल्हाड़ी ले जा रहे हों ...

शिविर के औजार और उनका प्रयोग (Camp Tools & Their Uses )

शिविर के औजार और उनका प्रयोग (Camp Tools & Their Uses ) शिविर जीवन स्काउटिंग/गाइडिंग का एक अभिन्न अंग है। इसमें उन्हें । आवश्यक औजारों की आवश्यकता पड़ती है। कुछ प्रमुख आजार निम्नलिखित हैं:- कुछ 1.कुल्हाड़ी (Axe) 2.चाकू (Knife) 3.हथौड़ी (Hammer) 4.आरी (Saw) 5.खुपी (Spud) 6.प्लास (Player) 7.फावड़ा (Shovel) 8.सब्बल (CrowBar) 9.मुंगरी (Mallet) 10.रेती (File) 11.पेंचकस (ScrewDriver) हथौड़ी इसके चपटे भाग से कीलें ठोकी जाती हैं और दो नुकीले सिरों के मध्य-भाग से कीलें बाहर निकालने का काम लिया जाता है। आरी इसके एक ओर दांते बने होते हैं जिससे लकड़ी काटी जाती है। इसकी सहायता से सीधी रेखा में सफाई से लकड़ी काटी जा सकती है। फावड़ा भूमि छीलने, खोदने व नाली बनाने में इसका प्रयोग किया जाता है। खुरपी भूमि समतल करने और घास छीलने में इसका प्रयोग किया जाता है। सब्बल भूमि में खम्भे गाड़ने के लिये इससे गड्ढे बनाये जाते हैं। मुंगरी तम्बू की खूटियाँ गाड़ने व गैजेट्स में इसका प्रयोग किया जाता है। रेती आरी पर धार लगाने के लिये इसका प्रयोग होता है। पेंचकस पेंच वाले कील कसने या खोलने में इसका प्रयोग होता है। ...

स्काउट में आग (Fire) का उपयोग कैसे करें

भारतीय संस्कृति में अग्नि को देवता की संज्ञा दी गई है। क्षितिज, जल, पावक, गगन, समीर- इन पाँच तत्वों में पावक को महत्वपूर्ण स्थान है। यह मानव का परम मित्र है किन्तु जब कभी इसके साथ असावधानी की जाती है तो यह विनाश लीला भी कर बैठती है। अग्नि एक पवित्र तत्व है। प्रातः सायं पूजा-पाठ में दीपक जलाना, धूप अगरबत्ती जलाना, हवन आदि कार्य भारतीय जनमानस की दैनिक प्रक्रिया है। अग्नि को साक्षी मानकर पति-पत्नी इसके सम्मुख सात फर लगा कर जीवन पर्यन्त वैवाहिक पवित्र बन्धन में बंध जाते हैं। हमारा भोजन अग्नि में ही पकाया जाता है। गरीब घरों में आग तापकर ऊष्मा प्राप्त की जाती है, साधु-सन्यासी अग्नि के सहारे ही जीते हैं। आधुनिक युग में आग जलाने के लिये माचिस या लाइटर का प्रयोग होता है, किन्तु प्राचीनकाल में जब उक्त वस्तुओं का आविष्कार नहीं हुआ था तो लोग आग जलाने के लिये अनेक प्राकृतिक साधनों का प्रयोग किया करते थे। भारत में एक लोहे. के टुकड़े (अगेला) से एक सख्त सफेद पत्थर (डांसी) पर चोट (रगड़) मारकर चिंगारियां पैदा की जाती थी जिन्हें त्वरित ज्वलनशील तृणों (बुकीला) पर बिठाकर तथा उसके बाहर कपड़ा लपेटकर आग जला ...

स्काउट में मिट्टी के तेल का स्टोव या गैस स्टोव से भोजन कैसे पकाएं

स्काउट में मिट्टी के तेल का स्टोव या गैस स्टोव से भोजन कैसे पकाएं स्काउट/गाइड को शिविर अथवा हाइक में उन्हें ठीक प्रकार मिट्टी के तेल के स्टोव या गैस स्टोव जलाना आना चाहिए। जंगल में जहां सूखी लकड़ी उपलब्ध हो उसमें खाना बनाया जा सकता है। शिविर अथवा रैलियों में स्काउट/गाइड स्वय खाना बनाते हैं। अतः प्रत्येक स्काउट/गाइड का खुले में दो प्रकार का भोजन, जिसमें सब्जी-रोटी या दाल-रोटी अथवा दाल-भात (दाल-चावल) बनाना आना चाहिए तथा चाय कॉफी भी बना सके। जो बच्चे अपने घरों में खाना बनाने में सहयोग करते हैं। उन्हें शिविरों में खुले में भोजन तैयार करने में कोई कठिनाई नहीं होती, घर पर गैस चूल्हें पर भोजन पकाना आसान है जबकि खुले मैदान में जहाँ हवा चल रही हो, धूप हो, वहाँ खाना पकाना कठिन कार्य है। भोजन बनाने से पूर्व अनेक बातों का ध्यान रखना चाहिए। कितने लोग खाने वाले हैं। उस हिसाब से आटा, चावल, दाल, मसाले, तेल आदि की मात्रा को ध्यान में रखना होगा। नमक, मिर्च कितना हो, पानी की मात्रा उस चीज को पकाने में कितनी होगी, वह चीज पक गई है या अभी कच्ची है, चाय या कॉफी बनाते समय पानी, चाय पत्ती, चीनी, कॉफी की मात...

रुढ़ चिन्ह क्या हैं ?

रुढ़ चिन्ह मानचित्रों में विभिन्न विवरण एवं सूचनाएं पूर्व निश्चित् चिह्नों के द्वारा प्रदर्शित की जाती है। विश्वभर में इन चिन्हों को अपनाने की एक परम्परा चली आ रही है। अतः इन्हें परम्परागत चिह्न कहा जाता है। इन चिन्हों को रूढ़ या अभिसामयिक चिह भी कहा जाता है। इन चिह्नों को प्रत्येक देश का सर्वे विभाग प्रमाणित करता है। भारतीय सर्वे ऑफ इण्डिया ने प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक दृश्य प्रदर्शित करने के लिये निम्नाकिंत रंगों को मान्यता प्रदान की है:- लाल रंग- भवन व सड़कों के प्रदर्शन के लिये। पीला रंग- कृषि क्षेत्रों को दिखाने के लिये। हरा रंग- वनस्पति, वन एवं बागों के लिये। नीला रंग- तालाब, झील, नदी तथा जलाशयों के लिये। कत्थई रंग- समोच्च रेखाओं के लिये। भूरा रंग – पर्वत छाया के लिये।

गैस लीक होने पर सुरक्षा की सावधानियां जाने

गैस लीक होने पर सुरक्षा की सावधानियां जाने गैस: गैस लीक होने क मुख्यतया तान कारण होते है- 1- पाइप में कोई छेद या फटा होने के कारण। 2- रेगुलेटर का वाशर कट जाने के कारण। 3-सिलेन्डर में पिन वाशर खराब होने के कारण। उपायः 1- कारण को दूर करें। 2-सिलेन्डर लेने से भलीभाँति जॉच लें। – लीकेज होने पर कोई भी इलेकट्रिक स्विच, लाइटर इत्यादि का प्रयोग न करें, खिडकी तथा दरवाजे खोल दें और गैस एजेंसी को फोन करें। गैस सिलेन्डर में आग लगने पर घबरायें नहीं। आसपास रखे अन्य ज्वलनशील पदार्थो को अलग कर दें तथा कम्बल को पानी में भिगोकर सिलेन्डर को ढकें जिससे कि ऑक्सीजन का सम्पर्क टूट जाये। गैस एजेंसी को फोन करें।

मानचित्र पठन (Map Reading) का अध्ययन

मानचित्र पठन (Map Reading) सर्वे ऑफ इण्डिया, देहरादून राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करने वाला भारत का एकमात्र अधिकृत विभाग है, जो भारत के समीपवर्ती तथा अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करता है। भारत के मानचित्र 1:1000000 के मापक जो लगभग 16 मील के सन्निकट होता है, तैयार किये गये है। इन मानचित्रों में 4 अक्षांश और 4 देशान्तर के मध्य का वर्ग प्रदर्शित किया गया है। एक वर्ग में इस प्रकार 4×4-15 वर्ग बनाये गये हैं जिसमें एक वर्ग 1°x1° को प्रदर्शित करता है। प्रत्येक क्षेत्र का मानचित्र एक पत्रक कहलाता है। इन पत्रकों को संख्याबद्ध कर दिया गया है। भारत तथा सीमावर्ती देशों के इस क्रम का विस्तार 4° उत्तरी अक्षांश से लेकर 40° उत्तरी अक्षाश तथा 44° पूर्वी देशान्तर से लेकर 124° पूर्वी देशान्तर तक फैला है। इस प्रकार इस क्रम के कुल पत्रकों की संख्या 136 है। 40×40 वाले वर्ग बड़े क्षेत्रों को प्रकट करते हैं जिनमें अधिक विवरण नहीं दर्शाया जा सकता है। इसलिये प्रत्येक वर्ग को पुनः 16 भागों (4°x4°) में विभक्त कर दिया गया है, जिसका एक वर्ग 1°x] है इन्हें 1° पत्रक भी कहा जाता है इन...

मोच आने (Sprain) से कैसे उपचार करें

मोच आना (Sprain) जोड़ों के चारों ओर के अस्थिबन्धन तन्तुओं में खिंचाव आने से फटने से मोच आती है। इस दशा में रोगी के जोड़ों दर्द होता है। सूजन आ जाती है। रोगी उस अंग को हिला नहीं सकता। मोच आने पर रोगी को हिलने-डुलन न दे तथा मोच पर कसकर पट्टी बाध दें। ठण्डे पानी से पट्टी को भिगोते रहें। रोगी को डॉक्टर को दिखावें।

सर्प दंश या सांप काटने (Snake Bite) पर कैसे करें

सर्प दंश (Snake Bite) सर्प के काटने पर तुरन्त डॉक्टर को बुलाना चाहिए। सर्प की पहचान करनी चाहिए। यदि सर्प अधिक जहरीला हो तो तुरन्त कार्यवाही की जानी चाहिए। टूनिकेट या बन्ध का प्रयोग कर जहर को हृदय की ओर जाने से रोकें तथा जहर को बाहर निकालने के लिये तेज धार के चाकू या ब्लेड से. (घन) के चिन्ह का कट लगाकर जहर मिश्रित रक्त को बहनें दें। फिर घाव का पोटेशियम परमेग्नेट से धो डालें। रोगी को गर्म रखें तथा सोने न दें।

समोच्च रेखायें क्या होती हैं ?

समोच्च रेखायें मानचित्रों पर समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली कल्पित रेखाओं को समोच्च रेखायें कहते हैं । इनकी विशेषताएँ निम्नवत् हैं:- ‘ये रेखायें समान ऊँचाई वाले स्थानों को परस्पर जोड़ती है। एक समोच्च रेखा दूसरी को कभी नहीं काटती। गोलाकार समोच्च रेखायें पर्वत या खड्ड को प्रदर्शित करती हैं। ” समोच्च रेखायें पूर्ण होती है खण्ड नहीं। *ये रेखायें किसी स्थान का वास्तविक ढाल बताती है। * ऊँचाई दिखाने में इन पर बाहर से अंक लिखे जाते हैं और गहराई दिखाने में मध्य में। * पास-पास की समोच्च रेखायें तीव्र ढाल तथा दूर-दूर की मंद ढाल प्रकट करती है। -समोच्च रेखाओं में पार्श्व चित्र द्वारा वास्तविक भू-आकृतियों को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। * समोच्च रेखाओं से धरातल की वास्तविक आकृति को समझा जा सकता है। Grid Reference – मानचित्र में Easting और Northing द्वारा किसी स्थान की स्थिति व्यक्त की जा सकती है। इसे चार, छः या आठ (Digits) में अंकित किया जाता है जैसे 1191 अथवा 118916 अथवा 11859165। छः अंकों के परिचय में पहले पश्चिम से पूर्व को तीन अंक पढ़ें जैसे 11.8 तत्पश्च...

स्काउट में साइकिल चलाना अनिवार्य

साइकिल चलाना प्रत्येक स्काउट/गाइड को साइकिल चलाना आना चाहिए, स्काउट/गाइड मितव्ययी होते हैं। अतः वे अन्य वाहनों पर अपव्यय नहीं करते वरन् आत्मनिर्भर रहते हैं। चाहे विद्यालय जाना हो या स्काउट/गाइड प्रशिक्षण या सेवा कार्य हेतु जाना हो अपनी साइकिल पर भरोसा करते हैं। अपनी साइकिल को हर समय ठीक तैयार रखते हैं। हवा भरना, पंचर जोड़ना, ब्रेक ठीक करना आदि कार्य सीख कर स्वयं करते हैं। साइकिल चालक को सड़क पर चलने के नियमों का पूर्ण ज्ञान होना भी आवश्यक है। सड़क पर बायें चलें। दो साइकिल सवार साथ-साथ (Abreast) कदापि न चलें। आगे निकलने के लिये दाँये से काटें। सड़क क्रॉस करते समय आगे-पीछे और दाँयें-बाँएं देखकर क्रॉस करें। मोड़ों पर हाथ का संकेत दें। अधिक जानकारी के लिये वाहन चालकों के लिये सड़क पर चलने के नियम का अवलोकन करें।

डंक लगने (Sting s& Bites) व बिच्छू का काटने (Scorpion Bites ) के उपचार

डंक लगना व काटना (Stings & Bites) मधुमक्खी, भौरा, ततैया आदि के काटने पर सर्वप्रथम डंक निकाल लेना चाहिए। सोडियम बाईकाबोनट से घाव धोना चाहिए। बिच्छू का काटना (Scorpion Bites ) गर्म -पानी में कपड़े की गददी भिगोकर दस पन्द्रह मिनट तक बार-बार रखें। लहसुन पास कर डकलगे स्थान पर लगा दें।