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Showing posts from January, 2021

प्रार्थना सभा व सर्व धर्म प्रार्थनाओं का क्रम

प्रार्थना सभा में प्रतिभागिता महात्मा गांधी जी ने कहा है- “प्रार्थना आत्मा की खुराक है।” भाव-भावना से ओत-प्रोत भाव-विभार होकर की गई प्रार्थना आत्मा को छू जाती है जिसे अंतनिर्हित शक्ति जागृत होकर ईश्वरोन्मुख हो जाती है। प्रार्थना से आत्मा रूपी मैली चादर धुलकर साफ हो जाती है आर, उसम हल्कापन तथा आत्मिक बल आ जाता है। स्काउट/गाइड का प्रार्थना करन का अपना ही एक अनूठा तरीका है। स्वच्छ, शान्त स्थल पर सामूहिक प्रार्थना की जाती है। ऐसी अनुभूति होती है कि, इस स्थल पर मानो मन्दिर, मस्जिद, गिरजा, मठ और गुरुद्वारा एकाकार हो गये हों। प्रत्येक स्काउट गाइड टोलियाँ अपनी-अपनी पूजा पद्धति का अनुसरण करने हेतु स्वतंत्र होती है किन्तु दूसरी पूजा पद्धतियों का समादर करते हैं। वे यह जानते हैं, कि पूजा-विधि व भाषायें अलग-अलग हो सकते हैं पर गन्तव्य बिन्दु एक ही है। सभी मतावलम्बी एक ही ईश्वर की सत्ता पर विश्वास करते हैं, जबकि नाम-ईश्वर, अल्लाह, गॉड, वाहेगुरु आदि अलग-अलग है। हिन्दू धर्म का मत है कि जनसाधारण द्वारा निर्गुण ब्रह्म पर ध्यान केन्द्रित करना असम्भव होता है। अतः इससे सगुण से निगुर्ण की ओर जाने का सू...

वन विद्या (खोज के चिह्न)

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वन विद्या (खोज के चिह्न) वनविद्या ( खोज के चिह्न ) इन खोज के चिह्नों का उपयोग स्काउट – गाइड द्वारा हाइक के समय किया जाता है । एडवांस पार्टी द्वारा सड़क के दायीं ओर 50-50 कदम की दूरी पर ये चिह्न लगाये जाते हैं । सभी स्काउट – गाइड इनके द्वारा मार्ग खोजते हुए आगे बढ़ते हैं । कुछ मुख्य चिह्न – वन विद्या (खोज के चिह्न) वन विद्या (खोज के चिह्न) —————————————————————————— 1. यह मार्ग है , रास्ता साफ है , तीर की दिशा में जाइए । वन विद्या (खोज के चिह्न)  2. रास्ता बन्द है , इधर से मत जाइए ।  वन विद्या (खोज के चिह्न) 3. तीर के निशान की ओर चार कदम पर पत्र छिपा है ( यदि दूरी तीन कदम से अधिक हो तो वह लिख देनी चाहिए ) । वन विद्या (खोज के चिह्न) 4 .यहां ठहरो ।  वन विद्या (खोज के चिह्न)  5 . मैं घर चला गया हूं ( अपने पेट्रोल का नाम और अपने नाम के हस्ताक्षर कर देने चाहिए और पेट्रोल का चिह्न बना देना चाहिए ) ।...

सादा या समानान्तर बन्धन (Sheer Lashing)

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सादा या समानान्तर बन्धन (Sheer Lashing) उपयोग : इस बंधन का प्रयोग दो लाठियों के एक सिरे को जोड़कर दूसरे सिरे को फैलाने अथवा दो लाठियों का या बल्लियों कोजोड़ कर बड़ा करने के लिए किया जाता है।  शियर लैसिंग मार्क-1 इस लैसिंग का प्रयोगक्लोथ लाइन बनाने या इम्प्रुवाइजड टैन्ट बनातेसमय दो लाठियों के सिरे थोड़े फैलाने हों तबइसका प्रयोग किया जाता है। विधि-  एक लाठी के सिरे पर खूटा फांस लगाकर दूसरी लाठीको साथ मिलाकर रस्सी के चार-पांच चक्कर समानान्तर लगाते हैं। मजबूतीके लिए फ्रेपिंग कर देते हैं। अंत में दूसरी लाठी पर खूटा फांस लगा देते हैं। मार्क-2 इसे राउण्ड लैसिंग या पैरलल लैसिंग के नाम सेभी जानते हैं। इसका प्रयोग लाठी की लम्बाई बढ़ाने या झण्डे का पोलबनाने के लिए किया जाता है। विधि- इसमें दोनों लाठियों पर एक साथ खूटा फांसलगाई जाती है और फिर आवश्यकतानुसार रस्सी के चार यापांच लपेट लगाये जाते हैं और अंत में दोनों लाठियों पर खूटाफांस लगा देते हैं। अधिक मजबूती के लिए थोड़े फासले परइसी प्रकार का एक बंधन और लगा सकते हैं। इसमें फ्रेसींग नहीं की जाती। (Sheer Lashing)

स्काउट के प्रथम सोपान की गांठे

गांठ और फॉस में अन्तर यह है कि गाँठ में रस्सी का ही प्रयोग होता है जबकि फॉस में रस्सी को किसी अन्य वस्तु जैसे-खम्भे, पेड़, लाठी आदि से बाधा जाता है। प्रथम सोपान की गांठे- रीफ नॉट, शीट बैंड, बोलाइन शीप शैंक, रीफ नॉट ( डॉक्टरी गांठ ) :  एक ही रस्सी, कपड़े या पट्टी के सिरों को एक साथ बांधने में प्रयुक्त होती है। पट्टी बांधने में इसी गाँठ का प्रयोग करते हैं। यह मरीज के शरीर में चुभती नहीं वरन् गद्दी का कार्य करती है। इसे पार्सल गाँठ भी कहा जाता है। क्योंकि पार्सल करते समय इस गाँठ के ऊपर सील-मुहर लगाने के लिये पर्याप्त स्थान मिल जाता है। इस गाँठ को लगाना भी सरल है। Right Over Left, Left Over Right अर्थात् दाहिने हाथ के सिरे को बायें हाथ वाले सिरे पर तथा बायें हाथ के सिरे को दाहिने हाथ के सिरे के ऊपर रखें। ध्यान रहे रस्सी के दोनों सिरे एक ही ओर को हों। चोकोर गाँठ के दोनों सिरों को मोड़ (Bight) कर बांधा जाये तो यह गाँठ जूते के फीते बांधने के लिये उपयुक्त होती है। इसे चपटी या चौकोर गांठ भी कहते हैं। यह गांठ चुभती नहीं है। डॉक्टर लोग पट्टी के दोनों सिरों को इसी गांठ से बांधते हैं। पार्सल बांध...

स्काउटिंग में गांठें और फांस

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स्काउटिंग में गांठें और फांस स्काउट-गाइड कला में गांठों तथा फांसों का महत्वपूर्ण स्थान है। स्काउट-गाइड या अन्य किसी व्यक्ति को, चाहे वह शिविर में हो या शहर में, गांव में हो या जंगल में, गांठ तथा फांस लगाने की आवश्यकता पड़ती रहती है। किसान को खेती के अनेक कामों में, व्यापारियों को सामान भेजने के लिये पैकिंग करने में व डॉक्टर को ऑप्रेशन के टांके लगाने व घाव पर पट्टी बांधने आदि में इन गांठों की आवश्यकता पड़ती है। स्काउट-गाइड गांठों की निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं:- (1) ये गांठे जल्दी लग जाती हैं व अपने में पूर्ण होती हैं। (2) इन गांठों को लगाने के बाद आसानी से खोला जासकता है। (3) ये गांठें बिना खोले अपने आप नहीं खुलती। नोट- गांठें सीखने के लिये स्काउट-गाइड से कम 3 मीटर लम्बी तथा 1 से.मी. मोटी रस्सी होनी चाहिए। इस रस्सी के दोनों सिरे सुरक्षित होने चाहिएं। अच्छा हो यदि दोनों सिरे अलग-अलग रंगों से रंगे हों।रस्सी के जिस सिरे से गांठ लगाई जाती है, उसे चुस्त सिरा (Running End) कहते हैं तथा दूसरा सिरा, जो काम नहीं करता है, सुस्त सिरा (Standing End) कहलाता है। गांठ (Knot)- रस्सी के सिरे को रस्स...

रस्सी के सिरों को सुरक्षित करना (व्हीपिंग)

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रस्सी के सिरों को सुरक्षित करना (व्हीपिंग) यदि रस्सी के सिरों को भली प्रकार बांधकर न रखा जाये तो रस्सी धीरे-धीरे उधड़ती जाती है और नष्ट हो जातीहै। स्काउट-गाइड अपनी रस्सी के सिरों को इस प्रकार बांधकर रखते हैं कि उसके सिरों की मोटाई भी नहीं बढ़ती और वह खुलती भी नहीं।  रस्सी के सिरों को बांधकर रखना ही रस्सी के सिरों को सुरक्षित करना या स्थाई करना (व्हीपिंग)कहलाता है। विधिः  इसकी विभिन्न विधियां हैं जिनमें सर्वोत्तम विधि है- रस्सी के सिरों को सुरक्षित करना (व्हीपिंग) साधारण मढ़ाई विधि – सिरों को सुरक्षित करने के लिये लगभग एक हाथ लम्बा एक मोटे धागे का डोरा लें। रस्सी के सिरे पर इस डोरे के एक सिरे का फन्दा (लूप)बनाकर रखें। अब शेष डोरे को रस्सी के चारों ओर कसकर पास-पास लपेटते हुए रस्सी के सिरे की तरफ ले जायें। जब डोरा रस्सी के सिरे पर लगभग 2 से.मी. तक लिपट जाये तब डोरे के खुले सिरे को डोरे के पहले सिरे पर बने फंदे में डाल दें। अब फन्दे वाले सिरे को नीचे से पकड़कर खींच दें। डोरे के दोनों बचे सिरों को काट दें। इस प्रकार रस्सी पूर्ण रूप से सुरक्षित हो जाती है।

हाथ के संकेत, सीटी के संकेत

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हाथ के संकेत, सीटी के संकेत हाथ के संकेत  क्र.  संकेत  अभिप्राय  1.  हाथ को मुंह के आगे इधर से उधर हिलाना-  नहीं, जैसे थे  2.   हाथ ऊंचा उठाकर इधर से उधर धीरे-धीरे हिलाना-   फैल जाओ, बिखर जाओ  3.  उपरोक्त में ही हाथ तेजी से हिलाना  समीप आओ, एकत्रित हो जाओ।  4.  हाथ से किसी एक दिशा में अंगुली से इशारा करना-  उस दिशा में जाओ,  5.  मुट्ठी बंद करके हाथ को तेजी से कई बार ऊपर-नीचे करना-  भागो, दौड़ कर आओ।  6.  हाथ सिर से ऊपर सीधा उठाना   ठहरो, रूको।  7.   दोनों हाथ कंधे की सीध में दोनों तरफ फैलाना-  लीडर के सामने टोली वार एकदूसरे के बराबर कतार में खड़े होना  8.  उपरोक्त स्थिति में ही एक हाथ ऊपर दूसरा नीचे हो-  कदवार, ऊंचे हाथ की तरफ बड़े व नीचे हाथ की तरफ छोटे खड़े हों  9.   दाहिने हाथ को सिर की सीध में ऊपर की ओर खड़ा करना-  सब ठीक है। सुनाई दे रहा है।  10.  दाहिने हाथ को मोड़कर सिर के...

कोर्ट ऑफ ऑनर (मानसभा)

मान-सभा (Court of Honour) इसे टोली नायक परिषद्, दल-सभा, मान-सभा, कोर्ट ऑफ ऑनर, सी. ओ. एच. आदि नामों से पुकारा जाता है। दल-सभा टोली-विधि का अनिवार्य व अभिन्न अंग है। स्काउटर/गाइडर के निर्देशन में यह दल कम्पनी की एक ऐसी समिति है जो, दल कम्पनी के अनुशासन और कार्यसंचालन एवं वित्त व्यवस्था में सहायक होती है। एक ओर यह अपने सदस्यों के सम्मान की रक्षा करती है, स्वतंत्रता व उत्तरदायित्व की भावना को प्रबल कर बड़ों के प्रति आदर की भावना को सुदृढ़ करती है तो, दूसरी ओर यह व्यक्तित्व का विकास कर सुयोग्य नागरिकों का निर्माण करती है। संक्षेप में दल सभा निम्नलिखित कार्य करती है- 1. दल का सम्मान तथा स्तर उच्च बनाये रखना। 2. स्काउट/गाइड कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करना। 3. कार्यक्रमों का कार्यान्वयन व मूल्यांकन करना। 4. स्काउटर/गाइडर की सहायता करना। 5. दल का आय-व्यय बजट तैयार करना। 6. आदर्श नागरिक और नागरिकता की ओर रुझान पैदा करना। 7. राज्य पुरस्कार तथा राष्ट्रपति एवार्ड हेतु संस्तुति करना। भारतीय गणतंत्र में जिस प्रकार विधायिका, कार्यपालिका और न्याय-पालिका के कर्त्तव्य और अधिकार हैं, ठीक उसी प्रकार दल-...

पैट्रोल इन कौंसिल (टोली सभा)-

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पैट्रोल इन कौंसिल (टोली सभा)- पैट्रोल इन कौंसिल (टोली सभा)- टोली सभा (Patrol-in-Council) टोली के सभी कार्य टोली-नायक के नेतृत्व में एकजुट होकर किये जाते है। प्रत्येक सदस्य की इच्छा-आकांक्षा का ध्यान रखने के लिये टोली-नायक उनसे निकट का सम्पर्क बनाये रखते हैं। टोली-नायक अपने विचारों को सदस्यों पर नहीं थोपता वरन् सदैव उनके विचारों को जानने का प्रयास करता है। टोली के सभी सदस्यों की बैठक कर आवश्यक निर्णय लिये जाते हैं जिसे टोली-सभा (Patrol-in-Council) कहा जाता है। टोली- नायक इस बैठक की अध्यक्षता करता है। इसमें टोली के सभी सदस्य स्वतंत्र रूप से अपने विचार व्यक्त करते हैं और सर्व सम्मती से निर्णय लेकर क्रियान्वित किये जाते हैं। इन निर्णयों को टोली-नायकों द्वारा स्काउटर/गाइडर या दल-सभा तक पहुंचाया जाता है। टोली-सभा औपचारिक सभा की कार्यवाही टोली कार्य पंजिका में अंकित की जाती है। पैट्रोल इन कौंसिल (टोली सभा) में भाग लेना यह टोली की परिषद् होती है। टोली के सभी सदस्य इसके सदस्य होते हैं। टोली नायक इसका सभापति होता है। यह टोली से संबंधित सभी मामलों पर विचार करके निर्णय लेती है। टोली का कोना...

स्काउट में टोली विधि क्या होती है || What is the team method in Scout?

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बाल्यावस्था की एक विशेषता यह है कि, इस आयु-वर्ग के लड़के व लड़कियां अपनी-अपनी टोलियाँ बनाकर खेलना, बातें करना और कार्य करना पसंद करते है। इस प्रवृति को ‘टीम स्पिरिट’ कहा जाता है। चाहे वे टीम अच्छे कार्यों के लिये हो या बुरे। बच्चों की इस प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर बी. पी. ने स्काउटिंग में टोली-विधि को अपनाया। टोली-विधि बी. पी. ने टोली-विधि के सम्बन्ध में कहा है-‘टोली-विधि लड़के/ लड़कियों के लिये स्काउट/गाइड शिक्षा का एक तरीका ही नहीं है, वरन् यह एकमात्र तरीका है। टोली-विधि एक ऐसा आवश्यक लक्षण है, जिससे स्काउट/गाइड प्रशिक्षण दूसरे सभी संगठनों के प्रशिक्षण से भिन्न है।’ टोली-विधि की विशेषता इससे उत्तरदायित्व की भावना का विकास होता है। निरीक्षण और परीक्षण की सुविधा उपलब्ध होती है। लोकतंत्रात्मक भावना का विकास होता है। श्रम-विभाजन के दृष्टिकोण की पुष्टि होती है। मनोवैज्ञानिक विकास का अवसर प्राप्त होता है। टोली-विधि की सफलता पर बी. पी. ने स्वयं प्रयोग किया था। सन् 1907 में 20 लड़कों का एक शिविर, जिन्हें विभिन्न विद्यालयों तथा आयु वर्ग से चुना गया, और बी. पी. ने ब्राउनसी द...

प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit)

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प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की जानकारी प्रत्येक स्काउट/गाइड को प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स की जानकारी होना नितान्त आवश्यक है। प्राथमिक सहायता देने के लिये कुछ सामग्री की आवश्यकता पड़ती है । इस आवश्यक सामग्री को रखने के लिए बनाए गए बॉक्स को फस्ट एड किट कहते हैं प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit) प्राथमिक सहायता किट (First Aid Kit) किसी औसत प्राथमिक बॉक्स में निम्नलिखित वस्तुएं होनी चाहिए:- 1. गोल पट्टी (Roller Bandage) & 4 इंच चौड़ी 2 मीटर लम्बी-8 पट्टियाँ, 2. तिकोनी पट्टी (Triangular Bandage) : – 38″ (1 मीटर) का वर्गाकार सफेद व सस्ता कपड़ा लेकर उसे कर्णवत् काट कर किनारे की सिलाई कर दें। ऐसी-4 पट्टियाँ। 3. गॉज-1/2 इंच चौड़ी 4 इंच लम्बी पोलिथीन में रखी प्रेशरकुकर में उबालकर – गॉज। 4. चिकनी पट्टी3 इंच चौड़ी-12 पट्टियाँ। 5. गर्म पट्टी- 3 इंच चौड़ी-1 रोल। 6. कैंची-1 7. चिमटी-2 8. डिटोल की शीशी-1 9. सोफ्रामाइसीन ट्यूब-1 10. पोलिथीन में लिपटी हुई मोटी गॉज की गद्दियाँ-3 11. टिंचर आयोडीन या आयोडैक्स-2 डिबियां। 12. रुई का पैकेट-1 13. लिन्ट पाउडर-50ग्राम 14. एडेसिव प्लास्टर 15. एन...

सूर्य नमस्कार एक उपयोगी व्यायाम

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सूर्य नमस्कार एक उपयोगी व्यायाम सूर्य नमस्कार युवक-युवतियों के लिये बहुत ही उपयोगी व्यायाम है। यह व्यायाम अनेक आसनों का मिला-जुला रूप है। यदि व्यक्ति बी.पी. के 6 व्यायाम और सूर्य नमस्कार कर ले तो सभी अंगों का व्यायाम हो जाता है। सम्पूर्ण शरीर को आरोग्य, शक्ति व ऊर्जा प्राप्त होती है। सूर्य नमस्कार को प्रतिदिन 10 से 20 बार यथाशक्ति करना चाहिए। ध्यान रखें- जब सीना नीचे हो तो श्रांस बाहर निकालें और सीना ऊपर उठे तब श्वांस अन्दर लें। सूर्य नमस्कार की स्थितियां- सूर्य नमस्कार एक उपयोगी व्यायाम (1.) सूर्य की ओर मुख करके सीधे खड़े हों। दोनों हाथ जोड़कर, अंगूठे सीने से लगा लें और नमस्कार की स्थिति में खड़े हों। दोनों एडी साथ मिलाकर, मन शांत, आंखें बंद व ध्यान दोनों आंखों के बीच में हो। (2.) श्वांस को अन्दर भरते हुए दोनों हाथों को सामने की ओर से ऊपर उठाते हुए कानों से सटाते हुए पीछे की ओर ले जायें। हाथों के साथ शरीर को पीछे की ओर झुकाने का प्रयास करें। नजर आकाश की ओर रहे। पैर स्थिर रखें। (3.) श्वांस को बाहर निकालते हुए हाथों को कानों से सटाते हुए आगे की ओर झुकें, पैर-सीधे, हथेली से जमीन को स्पर्...

बी .पी. के 6 व्यायाम

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बी .पी. के 6 व्यायाम बी.पी.के छ: व्यायाम के सम्बन्ध में स्काउटिंग फॉर बॉयज में बी.पी. ने स्वयं कहा है- ये व्यायाम शरीर के सभी अंगों के लिए हैं। ये बहुत धीमी गति के व्यायाम हैं इनका श्वसन क्रिया से तालमेल हो। यह सतत प्रक्रिया है जिसमें सांस लेना व छोड़ना एक छोटे विश्राम के साथ होता है। अपना स्वयं का समय लेते हुए व्यायाम करें। बी .पी. के 6 व्यायाम सिर, चेहरे और गर्दन का व्यायामः – सिर, चेहरे और गर्दन को कई बार जोर से दोनों हाथों की हथेलियों व अंगुलियों से मलें, गर्दन तथा गले की पेशियों को थपथपायें। अपने बालों में कंघा करें, दांत साफ करे, मुंह और नाक साफ कर एक प्याला ठण्डा पानी पीकर निम्नलिखित कसरतें करें। सीने (छाती) का व्यायामः- सावधान की अवस्था में आगे झुकाते हुए तथा बाजू तने हुए घुटनों की सीध में, हथेलियों का रुख बाहर की ओर कर धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। अब सांस भरते हुए धीरे-धीरे हाथों को सिर के ऊपर लेजा कर जितना संभव हो पीछे तक ले जाऐं। हाथों का वृत्त बनाते हुए ईश्वर का धन्यवाद करते हुए धीरे-धीरे हाथ पूर्वावस्था में नीचे लाऐं। इस व्यायाम को करते समय शरीर और सांस का सामंजस्य बनाये...

स्वयं की देखभाल कैसे करें

स्वयं की देखभाल कैसे करें (a) घर के प्रति तुम्हारा क्या दायित्व है। इसे ठीक सेबताने में सक्षम हों। (b) अपना बिस्तर ठीक कर सकें। (c) व्यक्तिगत स्वच्छता के स्वास्थ्य नियम जानते हों। स्वच्छता- व्यक्तिगत स्वच्छता का जीवन में अत्यंत महत्व है।आप जानते हैं कि हमारे शरीर में अधिकतर बीमारियां स्वच्छता के अभाव, अशुद्ध जल व मानसिक कारणों से होती हैं। मूल बीमारियां बहुत ही कम होती है। हमें व्यक्तिगत स्वच्छता जैसे नाखून काटना, शरीर को साफ रखना, अच्छी तरह हाथ धोने के बाद खाना खाना,शौच के बाद साबुन से हाथ धोना, नाक, कान में उंगली आदि न देना आदि बातों का ध्यान रखना चाहिए।पानी को उबालकर या फिल्टर करके अथवा आर.ओ.एक्वागार्ड आदि से शुद्ध करके पीना चाहिए। स्वास्थ्य के लिए ध्यान देने योग्य बातें:- 1. रात्रि में जल्दी सोयें और प्रातः काल जल्दी उठें। 2. प्रतिदिन प्रातः बी.पी. के छ: व्यायाम करें। 3. खाना खाने से पहले व शौच के बाद हाथों कोसाबुन से धोयें। 4. पेय जल का 72 घण्टे से अधिक संग्रह न करें। 5. नशीले पदार्थों जैसे शराब, बीड़ी, सिगरेट, पान, सुपारी,गुटका, तम्बाकु, ड्रग आदि का सेवन न करें। 6. नाखून व शरीर क...

स्काउट में दीक्षा संस्कार (Investiture Ceremony)

संस्कारों का हमारे जीवन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। संस्कार जीवन को परिष्कृत व मर्यादित करते हैं। स्काउट/गाइड शिक्षा का अधिकार स्काउट/गाइड को दीक्षा-संस्कार के पश्चात् ही दिया जाता है। स्काउट में दीक्षा संस्कार (Investiture Ceremony) दीक्षा-संस्कार एक प्रकार से सदस्यता- गहण समारोह है। दीक्षा सस्कार के पूर्व स्काउट/गाइड को एक विशेष प्रकार का कोर्स करना पड़ता है, जिसे ‘प्रवेश’ के नाम से जाना जाता है। यह कोर्स स्काउट/गाइड को कम से कम तीन माह में पूरा करना होता है। इस कोर्स में स्काउट गाइड द्वारा नियम व प्रतिज्ञा पर अमल करने के साथ-साथ प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य करने की आदत डाली जाती है। स्काउटर/गाइडर की संतुष्टि पर ही सदस्यता – रस्म या दीक्षा-संस्कार सम्पन्न किया जाता है। प्रवेश का कोर्स पूर्ण कर लेने के पश्चात् किसी शुभ दिन प्रातः या सायं की सुमधुर बेला में शान्त, नैसर्गिक सुषमा युक्त स्थल पर छात्र/छात्राओं के अभिभावक एवं किसी पूजनीय बुजुर्ग व्यक्ति के सानिध्य में स्काउटर्स गाइडर्स द्वारा स्वयं अपने स्काउट्स गाइड्स को दीक्षा देनी चाहिए। दीक्षा संस्कार का दिन...

विश्व गाइड ध्वज (बनावट व महत्व)

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विश्व गाइड ध्वज (World Guidet Flag) विश्व-गाइड-ध्वज का नार्वे की मुख्य गाइड मिस फोक कैरी आस’ द्वारा प्रस्तावित डिजाइन 1930 के विश्व गाइड सम्मेलन, फाक्सलिज, इंग्लैण्ड में स्वीकार किया गया। 80वीं विश्व गाइड सम्मेलन मार्च 1991 में नये विश्व ध्वज व त्रिदल बैज को स्वीकार किया गया। ध्वज का आकार 3:2 के अनुपात में होता है। नीले रंग की पृष्ठभूमि में सुनहरा ध्वज के उपरी भाग में इस तरह बनाया गया है कि मानो नीले आसमान में सूर्य चमक रहा हों। इसके बैज की पंखुड़ियों में बने दोनों सितारे नियम और प्रतिज्ञा के प्रतीक हैं, जो हमारे जीवन में पथ-प्रदर्शन करते हैं। कम्पास की सुई की तरह की रेखा हमें सही दिशा पर चलने का बोध कराती है। त्रिदल के नीचे की अग्नि ज्वाला मानव प्रेम की परिचायक है जो कि हमारे मन में विश्व भाईचारा को दर्शाती है। ध्वज के दाँयी ओर सफेद के साथ गोल्डन चौकोर आकृतियां प्रतिज्ञा के तीन भागों को दर्शाता है। विश्व गाइड ध्वज (बनावट व महत्व) विश्व गाइड ध्वज (बनावट व महत्व) विश्व गर्ल गाइड एसोसिएशन और गर्ल स्काउट की विश्व समिति ने मई 1991 से इस नए विश्व गाइड ध्वज को अपनाया है। इस ध्वज की ना...

विश्व स्काउट ध्वज (बनावट व महत्व)

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विश्व स्काउट ध्वज (बनावट व महत्व) यह ध्वज गहरे बैंगनी रंग का होता है और बीच में सफेद रंग का विश्व स्काउट बैंज बना होता है। बैज के चारों ओर सफेद रंग की रस्सी का गोल घेरा होता है। इस गोल घेरे के नीचे की ओर रीफ नॉट लगी होती है। इस ध्वज की नाप 3 : 2 के अनुपात में होती है। यह बैंगनी रंग अंतर्राष्ट्रीय प्रेम, और सेवा का प्रतीक होता है।  इसमें लगी हुई रीफ नॉट विश्व भ्रातृत्व का प्रतीक है और बैज के दो सितारे स्काउट नियम व प्रतिज्ञा के प्रतीक हैं। इस ध्वज को 18वें विश्व सम्मेलन लिस्वन में सन् 1951 में स्वीकार किया गया। इसे अंतर्राष्रीय शिविरों, सम्मेलनों आदि में फहराया जाता है। यदि इसे दलों में फहराना हो तो भारत स्काउट व गाइड झन्डे से ऊँचा और उसके दाहिनी ओर फहराना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज के बाये तथा इससे नीचा होगा। World Scout Flag (Design and Importance) विश्व स्काउट-ध्वज को 18वें स्काउट सम्मेलन-1961 में लिस्बन में स्वीकार किया गया। ध्वज का आकार संस्था के ध्वज (Association Flag) की भांति 3:2 के अनुपात में होता है। ध्वज का कपड़ा जामुनी रंग (Purple) का होता है जिसके मध्य में 3:2 के अनुपात का विश्व...

भारत स्काउट व गाइड ध्वज (बनावट व महत्व)

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भारत स्काउट्स व गाइड्स ध्वज- भारत स्काउट्स एव गाइड्स ध्वज 15 अगस्त, 1951 से भारत स्काउट्स एवं गाइड्स ध्वज देश का एकमात्र ध्वज है। यह गहरे आसमानी रंग की पृष्ठभूमि का होता हैं नीला आसमान जिस प्रकार सम्पूर्ण विश्व को ढके हुए है, उसी प्रकार ध्वज का नीला रंग संगठन की विश्व-व्यापकता का प्रतीक है। बीच में स्काउट/गाइड बैज पीले रंग का बना होता है, जिसकी तीन पंखुड़ियाँ स्काउट/गाइड प्रतिज्ञा की तीन प्रतिबद्धताओं को प्रतिबिंबित करती हैं। बैज के मध्य में बना पीले रंग का अशोक-चक्र धर्म के अनुसार आचरण करने तथा प्रगति-पथ पर आगे बढ़ते रहने का द्योतक है। गाइड-त्रिदल सम्मिलित ध्वज तथा आकाश में सूर्य के समान चमकने का प्रतीक है। (Guide Trefoil) चक्र में चौबीस आरे बने होते हैं जो चौबीस घण्टों को प्रदर्शित करते हैं। ये चौबीस आरे हमें चौबीसों घण्टे सतर्क और सावधान रहने का संदेश देते हैं। स्काउट चिन्ह की नीचे की तीन पंखुड़ियां जिन्हें एक सूत्र में बांधा गया है – अनुशासन और विश्व बन्धुत्व का प्रतीक है। ध्वज की नाप 3:2 के अनुपात में होती है,अर्थात् लम्बाई 3 हो तो चौड़ाई 2 होगी। संस्था के ध्वज में बैज की नाप...

राष्ट्रीय ध्वज की बनावट व महत्व

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राष्ट्रीय ध्वज की बनावट व महत्व इस पोस्ट में राष्ट्रीय ध्वज महत्व और ध्वज शिष्टाचार जाने। राष्ट्रीय ध्वज राष्ट्रीय ध्वजराष्ट्रीय ध्वज किसी भी राष्ट्र के लिये गौरव का प्रतीक है। हमारा राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) तीन बराबर लम्बाई की पट्टियों से मिलकर बना है। जिसमें सबसे ऊपर की पट्टी का केसरिया रंग साहस व बलिदान का प्रतीक है, बीच का सफेद रंग पवित्रता व शांति का प्रतीक है, सबसे नीचेवाला हरा रंग हमारे राष्ट्र की संपन्नता व खुशहाली का प्रतीक है।सफेद पट्टी के बीच में, पट्टी जितनी ही चौड़ाई का गहरे नीले रंग का अशोक चक्र बना होता है। इस चक्र में 24 अरे होते हैं। यह चक्र देश की निरंतर प्रगति को दर्शाता है। भारत की संविधान निर्मात्री सभा ने इसे 22 जुलाई 1947 को राष्ट्रीय ध्वज के रूप में स्वीकार किया था।  ध्वज की लं. व चौ.का अनुपात 3:2 होता है। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा भारत के राष्ट्रीय ध्वज को तिरंगा कहते हैं, राष्ट्रीय ध्वज देश की स्वतंत्रता का प्रतीक होता है। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में, तीन रंग विद्यमान हैं, इसके वजह से इसका नाम तिरंगा रखा गया है। पहले के राष्ट्रध्वज संहिता के अनुसार केवल सरकार...

गाइड गणवेश के जानकारी व सही पहनना

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किसी भी संगठन की पहचान उसके सदस्यों के पहनावे से की जा सकती है। स्काउट/गाइड संस्था भी एक निश्चित वेशधारी संगठन है। यही पहनावा उसकी पहचान है। चुस्त, फुर्तीले तथा सही वेशधारी व्यक्ति की ओर सभी का ध्यान आकर्षित होता है। अतः स्काउट/गाइड को सही यूनिफॉर्म पहननी चाहिए। पहनी जाये तो वह पूर्ण आकर्षक हो। सही और आकर्षक यूनिफार्म संगठन एवं स्वयं को यश प्रदान करती है। जब कभी हम नये और आकर्षक परिधान में होते हैं तो हमें आत्म-सम्मान की अनुभूति होती है। किन्तु गन्दे, फटे, सिकुड़े वस्त्र पहनने पर आत्म-ग्लानि का आभास होता हैं। गाइड गणवेश के जानकारी व सही पहनना गाइड गणवेश के विभिन्न हिस्सों के नाम जाने तथा उन्हें सही ढंग से पहनना जाने। गाइड गणवेश (यूनिफार्म) अनिवार्य गणवेश :- फ्रॉक (ओव्हरऑल )- गहरे आसमानी रंग की अपारदर्शी कपड़े की फ्रॉक जिस पर दो पैच जेब ऊपर और दो साइड जेब हो और आस्तीन की लम्बाई 8 से. मी. हो जिसमें कफ 4 से. मी. ऊपर की ओर उलटकर सिले होंगे। स्पोर्ट कॉलर और दोनों कंधों पर शोल्डर स्ट्रेप्स हो । फ्रॉक ज्यादा तंग नहीं होगी चाहिए। अथवा सलवार, कमीज और दुपट्टा- गहरे आसमानी रंग की सलवार, हल...

स्काउट गणवेश की जानकारी व सही पहनना

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किसी भी संगठन की पहचान उसके सदस्यों के पहनावे से की जा सकती है। स्काउट/गाइड संस्था भी एक निश्चित वेशधारी संगठन है। यही पहनावा उसकी पहचान है। चुस्त, फुर्तीले तथा सही वेशधारी व्यक्ति की ओर सभी का ध्यान आकर्षित होता है। अतः स्काउट/गाइड को सही यूनिफॉर्म पहननी चाहिए। पहनी जाये तो वह पूर्ण आकर्षक हो। सही और आकर्षक यूनिफार्म संगठन एवं स्वयं को यश प्रदान करती है। जब कभी हम नये और आकर्षक परिधान में होते हैं तो हमें आत्म-सम्मान की अनुभूति होती है। किन्तु गन्दे, फटे, सिकुड़े वस्त्र पहनने पर आत्म-ग्लानि का आभास होता हैं। स्काउट गणवेश की जानकारी व सही पहनना स्काउट गणवेश के विभिन्न भागों के नाम- जाने तथा उन्हें सही ढंग से पहनना जाने।(यूनिफार्म) स्काउट गणवेश अनिवार्य गणवेश:- 1. कमीज (शर्ट )-  स्टील ग्रे रंग, दो ढक्कनदार जेबें ( जेबों केबीच में बैज जितनी चौड़ी खड़ी पट्टी) दोनों कन्धों पर शोल्डर स्ट्रैप्स लगे हों,आधी बाजू या लपेटी हुई पूरी बाजू। 2. हाफ पैंट या पैंट (शॉर्ट या ट्राउजर):  नेवी ब्ल्यू रंग की हाफ पैन्ट या पैन्ट होगी। लेकिन राष्ट्रपति अवार्ड जाँच शिविर या राष्ट्रपति अवार्ड रैली में पैन्ट...

स्काउटिंग में भलाई का कार्य (Good Turn)

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स्काउटिंग में भलाई का कार्य (Good Turn) प्राचीन काल में नाइट्स (Knights) सच्चे स्काउट होते थे। उनके नियम भी स्काउट नियम की भांति थे। वे अपने कर्तव्य पालन को प्राथमिकता देते थे जैसे झूठ बोलना, चोरी करना, दूसरों को सताना आदि से कोसों दूर रहते थे। अपने देश की मान-मर्यादा की रक्षा के लिए वे मर मिटने को सदैव तत्पर रहते थे जो साहसिक कार्यों की खोज में घूमते रहते थे। इनके नियम निम्नलिखित होते थे। अपने सम्मान की पवित्रता बनाये रखना, ईश्वर, राजा व देश के प्रति वफादार होना, महिलाओं, बच्चों व असहाय व्यक्तियों के प्रति विनम्र होना, प्रत्येक व्यक्ति की सहायता को तत्पर रहना, जरूरतमंदों को भोजन व धन देना, जिसके लिये बचत करना, अपनी रक्षा व देश की रक्षा के लिये शस्त्र चलाना सीखना, अपने को स्वस्थ और बलिष्ठ बनाये रखना, प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य अवश्य करना, बी. पी. ने उक्त नियमों के आधार पर ही स्काउट नियम निर्धारित किये। स्काउट गाइड भी प्रतिदिन कम से कम एक भलाई का कार्य अवश्य बनाते हैं। सेवा-भाव की आदत छोटे-छोटे भलाई के कार्यों से ही सुदृढ़ हो सकती है। वे इन कार्यों का श्री गणेश अपने घर से करते ह...