कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यक्रम
कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यक्रम
(1)संस्कृत पाठ्यवस्तु को रोचक एवं आनन्ददायी बनाने के लिए गद्य, पद्य, कथा तथासंवाद पाठ को समामेलित किया गया है।
(2)कक्षा 6 संस्कृत में अध्ययन-अध्यापन की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रयाणगीत,छत्तीसगढ़ के पर्व, कम्प्यूटर (संगणक) रायपुर नगर चाणक्य के वचन, ईदमहोत्सवः,गीताऽमृतम्, भोरमदेव, आदर्श छात्र, छत्तीसगढ़ की लोकभाषाएँ, संस्कृत में पत्र लेखन संस्कृत भाषा का महत्तव, वसन्त वर्णन, पौराणिक कथा, पर्यावरण, नीति श्लोक, महापुरुषों की जीवनी,होलिकोत्सव व संस्कृत सूक्तियों को समावेशित किया गया है।
कौशलपरक दक्षताएँ –
1.श्रवण–
1. छात्र संस्कृत की विशिष्ट ध्वनियों को सुनकर पहचान सकेगा. जिसमें अकारान्तपद विसर्ग,
अनुनासिक एवं अनुस्वार की ध्वनियाँ, संयुक्ताक्षर कृष्णम ध्वनियाँ आदि.
2. संस्कृत के सरल वाक्यों को सुनकर अर्थ समझ सकेगा.
2. भाषण–
1. संस्कृत ध्वनियों से बने पदों का शुद्ध उच्चारण कर सकेगा.
2. पाठ्यपुस्तक में आए सुभाषितों को कण्ठस्थ कर सुना सकेगा.
3. संस्कृत में छोटे-छोटे सरल प्रश्नों का उत्तर दे सकेगा.
3. वाचन–
1. सरल संस्कृत गद्यांश का शुद्ध वाचन कर सकेगा.
2. सुभाषितर्ता को कण्ठस्थ कर सुना सकेगा.
4. लेखन–
1. सरल शब्दों का शुद्ध वर्तनी में लेखन कर सकेगा.
2. सरल संस्कृत वाक्यों को सुनकर शुद्ध रूप से लिख सकेगा.
5. चिन्तन–
पाठ्यपुस्तक को पढ़कर अथवा सुनकर उसमें विद्यमान गुण-दोषों के विषय में मत रख सकेगा.
6. भाषिक तत्व–
1. वाक्य में विशेष्य के साथ सही विशेषण का अन्वय कर सकेगा.
2. वाक्य में प्रयुक्त नाम पर ( संज्ञा, सर्वनाम) के साथ क्रिया पदों का अन्वय कर सकेगा.
3. संस्कृत में सरल प्रश्न पूछ सकेगा तथा उनमें उत्तर भी दे सकेगा.
बालगीतो, कहानी एवं संवाद के माध्यम से संस्कृत के प्रति अभिरुचि उत्पन्न करना.
7. अभिरुचि-
संस्कृत व्याकरण
संज्ञा– अकारान्त पुल्लिङ्ग- बालक, नर, देव, वृक्ष आदि.
अकारान्त नपुंसकलिङ्ग – पुस्तक, पुष्प, वन,जल, फल, नयन, मुख, ग्रह, वस्त्र, भोजन, शयन, शरण,नगर स्थान आदि.
अकारान्त स्त्रीलिङ्ग- बालिका,शाला,रमा, कन्या, बाला, जनता, तृष्णा परीक्षा, लता, यात्रा,वर्षा, विद्या,सेवा, कथा, सभा आदि।
इकारान्त पुल्लिङ्ग- मुनि, हरि, कवि, कपि, रवि, आदि। उकारान्त पुल्लिङ्ग-धेनु, तनु, चञ्चु, रज्जु आदि। ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग – नदी, वाणी, भारती, भागीरथी, भगिनी, सरस्वती, जननी, पृथ्वी आदि।
सर्वनाम – अस्मद, युष्मद, तद, किम्
विशेषण – (संख्यावाची) एक से पाँच तक
संख्यावाचक एक, दवि, त्रि, चतुर एवं पञ्चन् शब्द के रूप तीनों लिड्गों में चलते हैं।
उपसर्ग – प्र, परा, अप, सम्, अनु, अव, निस्, निर्, दुर्, पुर्, वि, आङ्, नि, अधि, अपि, अति, सु, उत्, अभि, प्रति, परि, उप।
कारक– कारक चिन्हों का ज्ञान एवं विभक्ति में प्रयोग कर्ताकारक, कर्मकारक, करण कारक सम्प्रदान कारक, अपादान कारक, सम्बन्ध कारक, अधिकरण कारक, सम्बोधन कारक।
क्रिया–
क्रिया का ज्ञान कर लकारों में प्रयोग।
धातु – भू (भव) लिख हस, पा (पिब्) नी (नय)। लकार – लट्, लङ् एवं लृट् लकार का प्रयोग।
वचन – एक वचन, द्विवचन, बहुवचन।
लिङ्ग – पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग, नपुंसकलिंग। पुरुष – प्रथम पुरुष, मध्यम पुरुष, उत्तम पुरुष।
अव्यय – अधुना, श्वः, अधः, पश्चात्, उपरि, ततः, यतः, कुतः, सर्वतः, पुरतः, पुरः, यदा, कदा, तदा, कथम, अतः, कुत्र आदि ।
पाठ्यपुस्तक (कक्षा 6 संस्कृत पाठ्यक्रम)
- स्तुतिः
- संवादः
- गावोविश्वस्य मातरः
- राष्ट्रध्वजः
- मम परिवार:
- प्रश्नोत्तरम्
- छत्तीसगढप्रदेशः
- बालकः धूवः
- आधुनिकयुगस्य आविष्काराः
- मेलापकः
- शृंगिऋषे: नगरी
- अस्माकम् आहारः
- शोभनम् उपवनम
- बालगीतम् (पद्यम्)
- जवाहरलालनेहरुः
- वर्षागीतम् (बालगीतम्)
- दीपावलिः
- छत्तीसगढराज्यस्य धार्मिकस्थलानि
- नीतिनवनीतम्
- सूक्तयः खण्ड (अ)
- जयतु छत्तीसगढप्रदेशः खण्ड (ब)
- .परिशिष्ट-व्याकरणम्
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