स्काउट में झोली (Sling) के प्रयोग
झोली (Sling)
हाथ, हथेली या भुजा को सहारा देने, उसे हिलने-डुलने से रोकने के लिये झोली का प्रयोग किया जाता है। झोली का प्रयोग निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है –
बाजू की झोली (Arm Sling) -बाजू के अग्रभाग और हाथ को सहारा देने के लिए इस झोली का प्रयोग किया जाता है।
बाजू- झोली लगाने हेतु रोगी के सामने खड़े हो जाइये, कन्धे के ठीक बाले हिस्से के ऊपर फैली हुई तिकोनी पट्टी का एक सिरा रखिये तथा पट्टी के शीर्ष (Point) वाले सिरे को चोट वाले हिस्से की ओर रखिये, अब आहत भुजा को पट्टी के ऊपर समकोण में मोड़ कर आहत कन्धे पर दोनों सिरे लेकर डॉक्टरी गाँठ लगा दें; शीर्ष को मोड़ कर सेफ्टी पिन लगा दें।
कॉलर और कफ स्लिंग (Collar&cuff Sling) -कलाई को सहारा देने के लिये इस झोली का प्रयोग होता है। इसे लगाने के लिये रोगी की कुहनी को मोड़कर स्वस्थ कन्धे के पास अंगुलियाँ रखें। कलाई पर संकरी पट्टी से बूंटा फॉस लगायें तथा आहत भुजा की ओर के कन्धे पर हंसली की हड्डी के निकट के गड्ढे में डॉक्टरी गाँठ लगा दें।
तिकोनी झोली Triangular or St. John’s Sling) – इस झोली का प्रयोग हाथ को ऊपर उठाये रखने तथा हंसली (Collar bone) की हड्डी के टूटने पर किया जाता है। रोगी की बाजू के अग्रभाग को उसकी छाती पर इस तरह रखें कि उसकी अंगुली की नोक कन्धे की तरफ रहे तथा हथेली का मध्यभाग उरोस्थि पर रहे। काँख (बगल) पर एक गद्दी (Pad) रखकर बाजू के अग्रभाग पर खुली पट्टी रखिये, जिसका एक सिरा हाथ पर और नोक, कुहनी से कुछ दूर रहे। दूसरे सिरे को कुहनी नीचे से धुमाकर पीछे की ओर कन्धे पर लाकर हंसली के ऊपर गड्ढे में दूसरे कन्धे पर डॉक्टरी गाँठ लगा दें। एक सकरी पट्टी आहत भुजा के कुछ ऊपर रखकर कमर पर विपरीत दिशा में बांध दें। जिससे टूटी हंसली की हड्डी सही स्थिति में रहें।
हाथ, हथेली या भुजा को सहारा देने, उसे हिलने-डुलने से रोकने के लिये झोली का प्रयोग किया जाता है। झोली का प्रयोग निम्नलिखित तीन प्रकार से होता है –
बाजू की झोली (Arm Sling) -बाजू के अग्रभाग और हाथ को सहारा देने के लिए इस झोली का प्रयोग किया जाता है।
बाजू- झोली लगाने हेतु रोगी के सामने खड़े हो जाइये, कन्धे के ठीक बाले हिस्से के ऊपर फैली हुई तिकोनी पट्टी का एक सिरा रखिये तथा पट्टी के शीर्ष (Point) वाले सिरे को चोट वाले हिस्से की ओर रखिये, अब आहत भुजा को पट्टी के ऊपर समकोण में मोड़ कर आहत कन्धे पर दोनों सिरे लेकर डॉक्टरी गाँठ लगा दें; शीर्ष को मोड़ कर सेफ्टी पिन लगा दें।
कॉलर और कफ स्लिंग (Collar&cuff Sling) -कलाई को सहारा देने के लिये इस झोली का प्रयोग होता है। इसे लगाने के लिये रोगी की कुहनी को मोड़कर स्वस्थ कन्धे के पास अंगुलियाँ रखें। कलाई पर संकरी पट्टी से बूंटा फॉस लगायें तथा आहत भुजा की ओर के कन्धे पर हंसली की हड्डी के निकट के गड्ढे में डॉक्टरी गाँठ लगा दें।
तिकोनी झोली Triangular or St. John’s Sling) – इस झोली का प्रयोग हाथ को ऊपर उठाये रखने तथा हंसली (Collar bone) की हड्डी के टूटने पर किया जाता है। रोगी की बाजू के अग्रभाग को उसकी छाती पर इस तरह रखें कि उसकी अंगुली की नोक कन्धे की तरफ रहे तथा हथेली का मध्यभाग उरोस्थि पर रहे। काँख (बगल) पर एक गद्दी (Pad) रखकर बाजू के अग्रभाग पर खुली पट्टी रखिये, जिसका एक सिरा हाथ पर और नोक, कुहनी से कुछ दूर रहे। दूसरे सिरे को कुहनी नीचे से धुमाकर पीछे की ओर कन्धे पर लाकर हंसली के ऊपर गड्ढे में दूसरे कन्धे पर डॉक्टरी गाँठ लगा दें। एक सकरी पट्टी आहत भुजा के कुछ ऊपर रखकर कमर पर विपरीत दिशा में बांध दें। जिससे टूटी हंसली की हड्डी सही स्थिति में रहें।
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