उत्तर दिशा की जानकारी (Finding the North) कैसे प्राप्त करें
उत्तर दिशा की जानकारी (Finding the North)
स्पेन निवासी कोलम्बस भारत की खोज के लिये चला था किन्तु वह भारत न पहचकर अमेरिका पहुंच गया। ऐसा क्यों हुआ? कारण यह था कि उत्तर दिशा को दशाने वाला कोई यंत्र नहीं बना था। बाद में वास्को-डि-गामा के समय ध्रुव दशक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। अतः वह इस यंत्र की सहायता से भारत पहुँच गया।
स्काउट गाइड उत्तर दिशा ज्ञात करने के लिये अपने पास कम्पास तो रखते ही हैं, उसके अभाव में वे अनेक विधियों से भी उत्तर दिशा ज्ञात कर लेते हैं जिनमें कुछ विधियाँ निम्नलिखित है:-
1. सूर्य की सहायता-
उदय होते सूर्य की ओर मुंह कर खड़े हों तो सामने की ओर पूर्व दिशा, पीठ पीछे पश्चिम, बायें हाथ की ओर उत्तर और दाहिने हाथ की ओर दक्षिण दिशा होगी। इसके अतिरिक्त प्रातःकाल छः बजे सूर्य पूर्व में, नौ बजे दक्षिण पूर्व में, बारह बजे दक्षिण में, सायं तीन बजे दक्षिण-पश्चिम में और छः बजे सायं पश्चिम में होता है।
2. हाथ की घड़ी से-
हाथ की घड़ी को स्थिर रखकर घंटे की सुई को सूर्य की सीध में करें। घड़ी के केन्द्र पर एक तिनका खड़ा करें। तिनके की छाया, घंटे की सुई और सूर्य जब एक सीध में हों तो बारह बजे के अंक व छाया की रेखा के मध्य की लम्ब अर्धक रेखा उत्तर दक्षिण को दर्शायेगी।
3. छाया विधि से-
समतल भूमि पर एक लाठी गाड़ दें। सूर्योदय के समय प्रातःकाल तथा सूर्यास्त पर छाया सबसे लम्बी होगी। दोपहर को सबसे छोटी होगी। सबसे छोटी छाया उत्तर दिशा को इंगित करेगी।
4. तारा समूह से-
रात्रि में उत्तर दिशा जानने के लिये सप्तऋषि मण्डल, लघुसप्तऋषि मण्डल, शिकारी (Orion) तथा कैसोपिया (Casiopia) की मदद ली जा
सकती है।
सप्तऋषि मण्डल (Great Bear or Plough)-रात्रि में सात चमकते तारों का एक समूह जो एक किसान के हल की तरह दिखता है तीन तारे वक्राकार में और चार तारे एक चतुर्भज बनाते हैं। इस चतुर्भुज के अन्तिम दो तारे पाइटर (pointer) कहलाते हैं। इन दो पाइन्टर्स की सीध में जो अकेला चमकीला तारा दिखाई देता है वो ध्रुव तारा है। ध्रुव तारा सदैव उत्तर दिशा में होता है।
लघु सप्तऋषि मण्डल (Little Bear) -यह भी सात तारों का एक समूह है।ये तारे अधिक पास-पास तथा छोटे होत हैं तथा सप्तऋषि मण्डल की ही भांति इसका आकार होता है। किन्तु इनके तीन तारे जो वक्राकृति बनाते हैं उनका अंतिम तारा ध्रुव तारा होता है।
शिकारी (Orion)-
यह चौदह चमकीले तारों का समूह हैं जिनसे मिलकर एक शिकारी की सी आकृति बन जाती है। कमर पर पेटी सी बनाते तीन तारे तथा उस पर। तलवार सी लटकी तीन तारे, कन्धों को प्रदर्शित करते दो चमकीले तारे तथा तीन । धुंधले से तारे सिर की आकृति दर्शाते से दिखते है। तलवार के मध्य, कमर के मध्य | तथा सिर के मध्य के तारों को मिलाकर बनने वाली सीधी रेखा ध्रुव तार को दर्शाती है।
कैसोपिया-
पाँच तारे अंग्रेजी के अक्षर के आकार के है जिनसे एक संकरा । और दूसरा अधिक फैला V बनता है। अधिक फैले V के मध्य से खींची गई सीधी रेला | ध्रुव तारे को दर्शाती है।
स्पेन निवासी कोलम्बस भारत की खोज के लिये चला था किन्तु वह भारत न पहचकर अमेरिका पहुंच गया। ऐसा क्यों हुआ? कारण यह था कि उत्तर दिशा को दशाने वाला कोई यंत्र नहीं बना था। बाद में वास्को-डि-गामा के समय ध्रुव दशक यंत्र का आविष्कार हो चुका था। अतः वह इस यंत्र की सहायता से भारत पहुँच गया।
स्काउट गाइड उत्तर दिशा ज्ञात करने के लिये अपने पास कम्पास तो रखते ही हैं, उसके अभाव में वे अनेक विधियों से भी उत्तर दिशा ज्ञात कर लेते हैं जिनमें कुछ विधियाँ निम्नलिखित है:-
1. सूर्य की सहायता-
उदय होते सूर्य की ओर मुंह कर खड़े हों तो सामने की ओर पूर्व दिशा, पीठ पीछे पश्चिम, बायें हाथ की ओर उत्तर और दाहिने हाथ की ओर दक्षिण दिशा होगी। इसके अतिरिक्त प्रातःकाल छः बजे सूर्य पूर्व में, नौ बजे दक्षिण पूर्व में, बारह बजे दक्षिण में, सायं तीन बजे दक्षिण-पश्चिम में और छः बजे सायं पश्चिम में होता है।
2. हाथ की घड़ी से-
हाथ की घड़ी को स्थिर रखकर घंटे की सुई को सूर्य की सीध में करें। घड़ी के केन्द्र पर एक तिनका खड़ा करें। तिनके की छाया, घंटे की सुई और सूर्य जब एक सीध में हों तो बारह बजे के अंक व छाया की रेखा के मध्य की लम्ब अर्धक रेखा उत्तर दक्षिण को दर्शायेगी।
3. छाया विधि से-
समतल भूमि पर एक लाठी गाड़ दें। सूर्योदय के समय प्रातःकाल तथा सूर्यास्त पर छाया सबसे लम्बी होगी। दोपहर को सबसे छोटी होगी। सबसे छोटी छाया उत्तर दिशा को इंगित करेगी।
4. तारा समूह से-
रात्रि में उत्तर दिशा जानने के लिये सप्तऋषि मण्डल, लघुसप्तऋषि मण्डल, शिकारी (Orion) तथा कैसोपिया (Casiopia) की मदद ली जा
सकती है।
सप्तऋषि मण्डल (Great Bear or Plough)-रात्रि में सात चमकते तारों का एक समूह जो एक किसान के हल की तरह दिखता है तीन तारे वक्राकार में और चार तारे एक चतुर्भज बनाते हैं। इस चतुर्भुज के अन्तिम दो तारे पाइटर (pointer) कहलाते हैं। इन दो पाइन्टर्स की सीध में जो अकेला चमकीला तारा दिखाई देता है वो ध्रुव तारा है। ध्रुव तारा सदैव उत्तर दिशा में होता है।
लघु सप्तऋषि मण्डल (Little Bear) -यह भी सात तारों का एक समूह है।ये तारे अधिक पास-पास तथा छोटे होत हैं तथा सप्तऋषि मण्डल की ही भांति इसका आकार होता है। किन्तु इनके तीन तारे जो वक्राकृति बनाते हैं उनका अंतिम तारा ध्रुव तारा होता है।
शिकारी (Orion)-
यह चौदह चमकीले तारों का समूह हैं जिनसे मिलकर एक शिकारी की सी आकृति बन जाती है। कमर पर पेटी सी बनाते तीन तारे तथा उस पर। तलवार सी लटकी तीन तारे, कन्धों को प्रदर्शित करते दो चमकीले तारे तथा तीन । धुंधले से तारे सिर की आकृति दर्शाते से दिखते है। तलवार के मध्य, कमर के मध्य | तथा सिर के मध्य के तारों को मिलाकर बनने वाली सीधी रेखा ध्रुव तार को दर्शाती है।
कैसोपिया-
पाँच तारे अंग्रेजी के अक्षर के आकार के है जिनसे एक संकरा । और दूसरा अधिक फैला V बनता है। अधिक फैले V के मध्य से खींची गई सीधी रेला | ध्रुव तारे को दर्शाती है।
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