सरंक्षक के तीन (R-Reduce, Reuse, Recycle) अर्थात् कम करना, पुनः काम में लाना एवं नये स्वरूप में बदलना।
सरंक्षक के तीन (R-Reduce, Reuse, Recycle)
इसे हम दूसरे शब्दों में Waste Management अथात् अपव्यय का प्रबंधन भी कह सकते हैं। अपव्यय का प्रभाव पर्यावरण पर भी पड़ता है। जितनी चीजों की बर्बादी पदार्थ सड़गल कर पर्यावरण को प्रदूषित करेगा। जितना हम वस्तुओं का दुरुपयोग करेंगे, कारखानों एवं मिलों को उत्पादन बढ़ाना पड़ेगा। जिसका परिणाम होगा प्रदूषण में वृद्धि। इस हेतु हमें अपनी जीवन शैली में भी कुछ परिवर्तन लाने होंगे। उदाहरण के लिये जिन लोगों के पास एक कार है, उससे परिवार का काम होगी उतना ही चाहिए। इसका प्रभाव उत्पादन पर पड़ता है। जितनी अधिक कारें होंगी-प्रदूषण उतना चलाया जा सकता है। फिर भी परिवार के प्रत्येक सदस्य को अलग-अलग कार ही बढ़ेगा। यह नियम घर की प्रत्येक वस्तु पर लागू होता है। तात्पर्य यह है कि हमें अधिक उपयोग की प्रवृत्ति पर लगाम कसनी होगी और सात्विक जीवनयापन की ओर जाना होगा।
घर में ऐसी अधिक वस्तुएँ होती हैं जिन्हें हम काम में नहीं लाते। उन्हें फेंक दिया जाता है। उनका स्वरूप बदलकर पुनः काम में लाया जा सकता है। उदाहरण के लिये आपका गर्म-कोट बाहर से खराब दिखता है। यदि उसे आल्टर कर दिया जाय तो वह पुनः नया बन जाता है। कमीज का कॉलर अन्दर से फट गया है, पर बाकी सही है तो कॉलर आल्टर किया जा सकता है। घर में बड़े-भाई का कोई कपड़ा छोटा पड़ गया है, तो उसे छोटा भाई पहन सकता है। पर समाज में ऐसी प्रवृत्ति बन गई है कि वह प्रयोग किया हुआ वस्त्र क्यों पहने?
घर का फर्नीचर पुराना हो गया तो उसे एक कोने में या छत पर फेंक कर नया खरीदा जाता है। उसकी मरम्मत की जा सकती है, अथवा किसी गरीब परिवार को दिया जा सकता है। पुराने जार या पॉट किचन में सामग्री रखने के काम आ सकते हैं। महिलायें नवजात शिशु के कपड़े घर के बड़े कपड़ों से बनाकर बचत कर सकती हैं। जिन वस्त्रों, कम्बल, गद्दे आदि आप प्रयोग में नहीं ले रहे हैं उन्हें गरीब बच्चों या घरों को दिया जा सकता है। यदि आपके पास अच्छी पुस्तकें पड़ी हों, तो उन्हें गरीब बच्चों अथवा किसी पुस्तकालय को भेंट कर सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि हमें बेकार वस्तुओं को यों ही नहीं फेंक देना चाहिए, वरन् उनका प्रयोग इस प्रकार करें कि वह दूसरों के काम आ जाय। इससे अधिक उत्पादन को कम किया जा सकेगा।
जो वस्तुएँ पर्यावरण के अनुकूल प्रभावकारी हों, प्रदूषण न बढ़े, ऐसी वस्तुओं को पुनउत्पादित किया जा सकता है। उदाहरण के लिये अखबार, रद्दी कागज, पुरानी पुस्तक आदि को रिसाईकिल किया जा सकता है । कागज़ मिल उन्हें खरीद लेती है। इसी प्रकार धातुओं को पुनः गला कर उससे नये स्वरूप में वस्तुएं ढाली जा सकती है। घर की सब्जी, बचा खाना, घास-पात आदि को गड्ढा खोद कर कम्पोस्ट खाद बनाई जा सकती है। किचन का गन्दा पानी किचन गार्डन में काम में लिया जा सकता है।
कहने का तात्पर्य यह है कि यदि कम बर्बादी होगी तो कम रिसाइकिल या रीयूज होगा।
Comments
Post a Comment