स्काउट/गाइड में कुल्हाड़ी का प्रयोग

स्काउट/गाइड में कुल्हाड़ी का प्रयोग

कुल्हाड़ी स्काउट/गाइड की परम मित्र है। किसी मूर्ख व्यक्ति के हाथ में कुल्हाड़ी उसकी शत्रु हो सकती है किन्तु स्काउट गाइड उसका सदुपयोग कर गर्व का अनुभव करते हैं। एक ओर वे इसका सही प्रयोग करना सीखते हैं, दूसरी ओर इसका पर्याप्त अभ्यास कर लेते हैं।
स्काउट गाइड कुल्हाड़ी का वजन लगभग 750 ग्राम तथा इसमें
प्रयुक्त लाठी की लम्बाई 50 से 55 से.मी. तक होती है। कुल्हाड़ी की
धार और सिरा एक सीध में होने पर सही चोट पड़ती है। मूठ ढीली
होने पर पच्चड़ लगा देना चाहिए।

कुल्हाड़ी की देखभाल
कुल्हाड़ी की धार तेज होनी चाहिए। धार लगाने के लिये उसे एक विशेष प्रकार के पत्थर (Grinding Stone) पर वृत्ताकार चलाते हुए दोनों तरफ से रगड़ना चाहिए।
कुल्हाड़ी की सम्भाल आवश्यक है। उसे चमड़े के खोल में रखना चाहिए। यदि चमड़े का खोल न हो तो उसे किसी पेड़ या खूटे पर गाड़ देना चाहिए। कुल्हाड़ी भूमि पर कदापि न फैकी जाय । स्काउट इसे अपनी पेटी पर बने निर्धारित स्थान पर लटकाते हैं।
कुल्हाड़ी का आदान-प्रदान करते समय सिरा स्वयं पकड़कर दूसरों को उसकी मूळ पकड़ाई जानी चाहिए। यदि कुल्हाड़ी ले जा रहे हों तो कन्धे पर धार पीछे की ओर बाहर को होनी चाहिए। हाथ में ले जाते समय स्कन्ध को पकड़कर धार (Edge) शरीर के विपरीत हो । कुल्हाड़ी को सुरक्षित रखने के लिए तेल युक्त कपड़े से उसके लोहे व लकड़ी को रगड़ देना चाहिए।

कुल्हाड़ी का प्रयोग

कुल्हाड़ी की पकड़ बायें हाथ में हो। दायाँ-बायाँ हाथ पकड़ (Grip) के ऊपर इस प्रकार हो कि उसे आवश्यकतानुसार ऊपर नीचे सरकाया जा सके। किसी वस्तु को काटते या फाड़ते समय अनावश्यक जोर लगाने की आवश्यकता नहीं। स्वयं कुल्हाड़ी का वजन ही पर्याप्त है। आवश्यकता होती है लक्ष्य पर ठीक चोट मारने की। काटते समय Vवी’ आकार के 45 अंश के कोण पर कटान करना चाहिए। यदि लकड़ी
फाड़नी हो तो नीचे से एक मोटी लकड़ी रख लेनी चाहिए ताकि कुल्हाड़ी की धार पत्थर या भूमि पर न लगे । यदि किसी बड़े लट्टे को फाड़ना हो तो बीच में पच्चर सरकाते हुए दरार बढ़ाते जाना चाहिए।

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