मानचित्र पठन (Map Reading) का अध्ययन
मानचित्र पठन (Map Reading)
सर्वे ऑफ इण्डिया, देहरादून राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करने वाला भारत का एकमात्र अधिकृत विभाग है, जो भारत के समीपवर्ती तथा अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करता है। भारत के मानचित्र 1:1000000 के मापक जो लगभग 16 मील के सन्निकट होता है, तैयार किये गये है। इन मानचित्रों में 4 अक्षांश और 4 देशान्तर के मध्य का वर्ग प्रदर्शित किया गया है। एक वर्ग में इस प्रकार 4×4-15
वर्ग बनाये गये हैं जिसमें एक वर्ग 1°x1° को प्रदर्शित करता है। प्रत्येक क्षेत्र का
मानचित्र एक पत्रक कहलाता है। इन पत्रकों को संख्याबद्ध कर दिया गया है।
भारत तथा सीमावर्ती देशों के इस क्रम का विस्तार 4° उत्तरी अक्षांश से लेकर 40° उत्तरी अक्षाश तथा 44° पूर्वी देशान्तर से लेकर 124° पूर्वी देशान्तर तक फैला है। इस प्रकार इस क्रम के कुल पत्रकों की संख्या 136 है।
40×40 वाले वर्ग बड़े क्षेत्रों को प्रकट करते हैं जिनमें अधिक विवरण नहीं दर्शाया जा सकता है। इसलिये प्रत्येक वर्ग को पुनः 16 भागों (4°x4°) में विभक्त कर दिया गया है, जिसका एक वर्ग 1°x] है इन्हें 1° पत्रक भी कहा जाता है इनका मापक 1’=4 मील होता है। 1 के पत्रक को पुनः चार समान भागों में बांटकर 16 वर्ग बना दिये गये हैं, जिनका मापक 15’x15′ अथवा 1’=1 मील प्रदर्शित करता हैं। इनमें अधिक विवरण प्रदर्शित किया जा सकता है। प्रत्येक वर्ग को A से P तक तथा
15’x15′ के वर्ग को 1 से 16 तक की संख्या दे दी गई है।
उक्त पत्रकों को अब मील के स्थान पर किलोमीटर में प्रदर्शित किया जाता है।
सम्पूर्ण राष्ट्र को बड़े वर्गों जिसकी भुजा 500 कि. मी. होती है बांटा जाता है। इन 500 कि. मी. की भुजाओं को पुनः 5 भागों में बांट कर 255 वर्ग बनाये गये है जिनका प्रत्येक वर्ग 100 कि. मी. की भुजा का बन जाता है। 100 कि. मी. की इस भुजा को पुनः दस भागों में विभक्त कर एक वर्ग 10 कि. मी. की भुजा प्रकट करता हैं। पुनः इस भुजा का दशांश 1 कि. मी. को प्रदर्शित करता हैं।
मानचित्र पठन में निम्नलिखित बातों का अध्ययन किया जाता है:-
1. विस्तार – अक्षांश और देशान्तरीय फैलाव।
2.मापक – इंच : मील या से. मी. : कि. मी.।
3. क्षेत्रफल
4. धरातल का स्वरूप – नदियों के बहाव को समोच्च रेखाओं से ज्ञात किया जा सकता है।
5. वनस्पति – परम्परागत चिह्नों के अध्ययन से।
6. यातायात के साधन – रेलपथ, सड़क, बैलगाड़ी, ऊँट पथ आदि से।
7. जनसंख्या।
8. व्यवसाय व उद्यम।
9. आर्थिक जीवन व प्रसिद्ध नगर।
सर्वे ऑफ इण्डिया, देहरादून राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करने वाला भारत का एकमात्र अधिकृत विभाग है, जो भारत के समीपवर्ती तथा अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र प्रकाशित करता है। भारत के मानचित्र 1:1000000 के मापक जो लगभग 16 मील के सन्निकट होता है, तैयार किये गये है। इन मानचित्रों में 4 अक्षांश और 4 देशान्तर के मध्य का वर्ग प्रदर्शित किया गया है। एक वर्ग में इस प्रकार 4×4-15
वर्ग बनाये गये हैं जिसमें एक वर्ग 1°x1° को प्रदर्शित करता है। प्रत्येक क्षेत्र का
मानचित्र एक पत्रक कहलाता है। इन पत्रकों को संख्याबद्ध कर दिया गया है।
भारत तथा सीमावर्ती देशों के इस क्रम का विस्तार 4° उत्तरी अक्षांश से लेकर 40° उत्तरी अक्षाश तथा 44° पूर्वी देशान्तर से लेकर 124° पूर्वी देशान्तर तक फैला है। इस प्रकार इस क्रम के कुल पत्रकों की संख्या 136 है।
40×40 वाले वर्ग बड़े क्षेत्रों को प्रकट करते हैं जिनमें अधिक विवरण नहीं दर्शाया जा सकता है। इसलिये प्रत्येक वर्ग को पुनः 16 भागों (4°x4°) में विभक्त कर दिया गया है, जिसका एक वर्ग 1°x] है इन्हें 1° पत्रक भी कहा जाता है इनका मापक 1’=4 मील होता है। 1 के पत्रक को पुनः चार समान भागों में बांटकर 16 वर्ग बना दिये गये हैं, जिनका मापक 15’x15′ अथवा 1’=1 मील प्रदर्शित करता हैं। इनमें अधिक विवरण प्रदर्शित किया जा सकता है। प्रत्येक वर्ग को A से P तक तथा
15’x15′ के वर्ग को 1 से 16 तक की संख्या दे दी गई है।
उक्त पत्रकों को अब मील के स्थान पर किलोमीटर में प्रदर्शित किया जाता है।
सम्पूर्ण राष्ट्र को बड़े वर्गों जिसकी भुजा 500 कि. मी. होती है बांटा जाता है। इन 500 कि. मी. की भुजाओं को पुनः 5 भागों में बांट कर 255 वर्ग बनाये गये है जिनका प्रत्येक वर्ग 100 कि. मी. की भुजा का बन जाता है। 100 कि. मी. की इस भुजा को पुनः दस भागों में विभक्त कर एक वर्ग 10 कि. मी. की भुजा प्रकट करता हैं। पुनः इस भुजा का दशांश 1 कि. मी. को प्रदर्शित करता हैं।
मानचित्र पठन में निम्नलिखित बातों का अध्ययन किया जाता है:-
1. विस्तार – अक्षांश और देशान्तरीय फैलाव।
2.मापक – इंच : मील या से. मी. : कि. मी.।
3. क्षेत्रफल
4. धरातल का स्वरूप – नदियों के बहाव को समोच्च रेखाओं से ज्ञात किया जा सकता है।
5. वनस्पति – परम्परागत चिह्नों के अध्ययन से।
6. यातायात के साधन – रेलपथ, सड़क, बैलगाड़ी, ऊँट पथ आदि से।
7. जनसंख्या।
8. व्यवसाय व उद्यम।
9. आर्थिक जीवन व प्रसिद्ध नगर।
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